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Sunday, 1 February, 2026
होमराजनीति'एपस्टीन फाइल में PM का नाम': कांग्रेस ने मांगा जवाब, विदेश मंत्रालय ने आरोप खारिज किए

‘एपस्टीन फाइल में PM का नाम’: कांग्रेस ने मांगा जवाब, विदेश मंत्रालय ने आरोप खारिज किए

कांग्रेस ने कथित तौर पर ऐसे ईमेल शेयर किए हैं जिनमें एपस्टीन 2017 में PM के इज़राइल और US दौरे पर चर्चा कर रहे हैं; विदेश मंत्रालय ने कहा कि ये दावे सिर्फ 'पूरी तरह से तिरस्कार' के लायक हैं.

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नई दिल्ली: कांग्रेस ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से स्पष्टीकरण की मांग की. यह मांग ऐसे समय की गई है, जब अमेरिका की जांच से जुड़ी फाइलों में कथित तौर पर जेफ्री एपस्टीन से जुड़े मामले में प्रधानमंत्री का नाम सामने आने की बात कही जा रही है. वहीं विदेश मंत्रालय ने किसी भी तरह के संबंध को खारिज करते हुए इसे “दोषी अपराधी की घटिया कल्पनाएं” बताया है.

कांग्रेस ने इस विवाद पर अपना रुख और कड़ा किया और सोशल मीडिया पर दो दस्तावेज साझा किए. इन दस्तावेजों में कथित तौर पर एपस्टीन, जो एक करोड़पति फाइनेंसर और दोषी यौन अपराधी था, प्रधानमंत्री की कूटनीतिक गतिविधियों और बैठकों पर चर्चा करता दिख रहा है.

कांग्रेस के महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने एक ट्वीट में कहा कि इस “वास्तव में शर्मनाक” मुद्दे पर प्रधानमंत्री की चुप्पी “अस्वीकार्य” है.

विदेश मंत्रालय ने शनिवार को एक बयान जारी कर आरोपों को खारिज किया. बयान में कहा गया, “हमने तथाकथित एपस्टीन फाइल्स से जुड़े एक ईमेल संदेश की रिपोर्ट देखी है, जिसमें प्रधानमंत्री और उनके इजरायल दौरे का जिक्र है. जुलाई 2017 में प्रधानमंत्री की इजरायल की आधिकारिक यात्रा के तथ्य के अलावा, ईमेल में किए गए बाकी इशारे एक दोषी अपराधी की घटिया कल्पनाओं से ज्यादा कुछ नहीं हैं, जिन्हें पूरी तरह से नकारा जाना चाहिए.”

ये फाइलें एपस्टीन के कथित सेक्स-तस्करी नेटवर्क और उसके सहयोगियों से जुड़े मामलों की जांच और मुकदमों से संबंधित सार्वजनिक अदालत और जांच रिकॉर्ड हैं. इन्हें अमेरिका के न्याय विभाग ने एपस्टीन फाइल्स ट्रांसपेरेंसी एक्ट के तहत जारी किया है.

एक दस्तावेज में 9 जुलाई 2017 की तारीख वाला एक ईमेल दिखाया गया है, जिसमें एपस्टीन ने लिखा, “The Indian Prime minister modi took =dvice. and danced and sang in israel for the benef=t of the US president. they had met a few weeks ag=. . IT WORKED. ! (sic).”

यह संदर्भ प्रधानमंत्री मोदी की 4 से 6 जुलाई 2017 की इजरायल यात्रा से जुड़ा बताया गया है. यह यात्रा भारत और इजरायल के बीच कूटनीतिक संबंधों के 25 साल पूरे होने के मौके पर हुई थी और किसी भारतीय प्रधानमंत्री की इजरायल की पहली यात्रा थी. इससे कुछ ही दिन पहले, 26 से 27 जून 2017 को प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका गए थे, जहां उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से पहली द्विपक्षीय बैठक की थी.

कांग्रेस के पवन खेड़ा ने एक्स पर लिखा, “एपस्टीन और नरेंद्र मोदी के बीच यह अक्षम्य जुड़ाव राष्ट्रीय सम्मान और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा का मामला है, जिसमें प्रधानमंत्री से तुरंत जवाबदेही जरूरी है. प्रधानमंत्री स्पष्ट करें. 1. वह जेफ्री एपस्टीन से किस बात की सलाह ले रहे थे. 2. अमेरिका के राष्ट्रपति के किस लाभ के लिए वह इजरायल में गा और नाच रहे थे. 3. संदेश में लिखा है — ‘IT WORKED!’. तो आखिर क्या काम कर गया.”

खेड़ा के पोस्ट को साझा करते हुए जयराम रमेश ने लिखा, “यह वास्तव में शर्मनाक है. प्रधानमंत्री को खुद तुरंत स्पष्टीकरण देना चाहिए.”

कांग्रेस ने एक दूसरी फाइल भी अपलोड की, जिसमें कथित तौर पर एपस्टीन और ट्रंप के पूर्व मुख्य रणनीतिकार स्टीव बैनन के बीच संदेशों का आदान-प्रदान दिखाया गया है. एपस्टीन की अगस्त 2019 में जेल में आत्महत्या से मौत हो गई थी. उस पर सेक्स तस्करी के आरोप में मामला दर्ज होने के एक महीने बाद उसकी मौत हुई थी.

24 मई 2019 की तारीख वाले इस संदेशों के आदान-प्रदान में कथित तौर पर मोदी का नाम भी सामने आता है. एक स्क्रीनशॉट में एपस्टीन बैनन को लिखता हुआ दिखता है, “मोदी के साथ मीटिंग सच में बहुत दिलचस्प थी, उन्होंने बहुत बड़े बहुमत से जीत हासिल की है। उनके आदमी ने कहा कि वॉशिंगटन में कोई उनसे बात नहीं करता, लेकिन उनका मुख्य दुश्मन चीन है! और इस इलाके में उनका प्रॉक्सी पाकिस्तान है. वे 22 में G20 की मेज़बानी करेंगे” 2019 के लोकसभा चुनाव के नतीजे 23 मई को घोषित हुए थे.

इस दस्तावेज को साझा करते हुए, खेड़ा ने एक्स पर लिखा, “कुछ अहम सवाल उठते हैं. 1. 2019 के चुनावों के आसपास मोदी एक बदनाम अमेरिकी व्यक्ति जैसे एपस्टीन से क्यों मिल रहे थे. 2. जब ‘वॉश’ में कोई उनसे बात करने को तैयार नहीं था, तो मोदी देश को अमेरिका से अपनी दोस्ती की बात क्यों बता रहे थे. 3. गलवान संकट के बाद, सिर्फ एक साल के भीतर, उन्होंने अपने ‘मुख्य दुश्मन’ चीन को क्लीन चिट क्यों दी. 4. अमेरिकी मीडिया अधिकारी और राजनीतिक रणनीतिकार स्टीव बैनन के किस ‘विजन’ से मोदी खुद को जोड़ते हैं. 5. क्या बैनन और मोदी के बीच प्रस्तावित बैठक हुई थी. उसमें क्या चर्चा हुई थी.”

हालांकि, एपस्टीन और बैनन के बीच कथित संदेशों में “मीटिंग” को लेकर बात साफ नहीं है. इसमें मोदी और एपस्टीन की किसी बैठक का संकेत नहीं मिलता, जैसा कि कांग्रेस दावा कर रही है. इसका मतलब किसी सामान्य राजनीतिक बैठक से भी हो सकता है, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी शामिल हुए हों या जिसे उन्होंने संबोधित किया हो. बीजेपी मुख्यालय में उन्होंने जीत का भाषण दिया था, जब रुझानों से सत्तारूढ़ पार्टी की बड़ी जीत का संकेत मिल रहा था.

उस समय के दौरान एपस्टीन और मोदी के बीच किसी आमने-सामने की बैठक होना लगभग असंभव लगता है. मोदी जून 2017 से सितंबर 2019 के बीच अमेरिका नहीं गए थे. 22 सितंबर 2019 को “हाउडी मोदी” कार्यक्रम हुआ था. उस समय तक एपस्टीन, जिसे 2006 में पहली बार यौन अपराधों में दोषी ठहराया गया था और जिसने जेल की सजा काटी थी, 6 जुलाई 2019 को सेक्स तस्करी के आरोप में दोबारा गिरफ्तार हो चुका था. एक महीने बाद, 10 अगस्त 2019 को उसकी कथित तौर पर आत्महत्या से मौत हो गई.

संदेश में “his guy” के बारे में यह कहना कि वॉशिंगटन में कोई उससे बात नहीं करता, यह भी साफ नहीं करता कि वह व्यक्ति कौन है. यह प्रधानमंत्री मोदी नहीं है. “his guy” भारत, अमेरिका या कहीं और का कोई भी व्यक्ति हो सकता है, जिसकी पहचान और पृष्ठभूमि अज्ञात है.

स्पष्ट रूप से कहा जाए तो, इन फाइलों के तहत जारी दस्तावेजों में किसी का नाम होना अपने आप में किसी गलत काम या आपराधिक संबंध को साबित नहीं करता.


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