नयी दिल्ली, 31 जनवरी (भाषा) विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को अरब देशों के विदेश मंत्रियों के साथ एक सम्मेलन में कहा कि पश्चिम एशिया अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है, इसलिए “हमारे साझा हितों” की मांग है कि स्थिरता, शांति व समृद्धि जैसी ताकतों को मजबूत किया जाए।
जयशंकर ने कहा कि गाजा संघर्ष को खत्म करने की योजना को आगे बढ़ाना आज एक “व्यापक रूप से साझा प्राथमिकता” है।
उन्होंने यहां भारत-अरब विदेश मंत्रियों के दूसरे सम्मेलन में अपने उद्घाटन भाषण में सूडान, यमन, लेबनान और सीरिया में जारी संघर्षों को रेखांकित किया और आसपास के क्षेत्रों तथा उनके बाहर पड़ने वाले इसके प्रभावों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा, “इन अनेक चुनौतियों पर विचार करते हुए, हमारे साझा हित की मांग है कि स्थिरता, शांति और समृद्धि जैसी ताकतों को मजबूत किया जाए।”
जयशंकर ने पश्चिम एशिया की स्थिति, विशेषकर संघर्षग्रस्त गाजा के पुनर्निर्माण के प्रयासों के बारे में भी बात की।
उन्होंने कहा, “हम एक महत्वपूर्ण समय पर यह सम्मेलन कर रहे हैं, जब वैश्विक व्यवस्था विभिन्न कारणों से परिवर्तन के दौर से गुजर रही है।”
उन्होंने कहा कि राजनीति, अर्थव्यवस्था, प्रौद्योगिकी और जनसांख्यिकी सभी में बदलाव हो रहे हैं।
विदेश मंत्री ने कहा, “यह कहीं और उतना स्पष्ट नहीं है जितना पश्चिम एशिया में है, जहां पिछले वर्ष के दौरान परिदृश्य में नाटकीय बदलाव हुआ है।”
जयशंकर ने कहा कि इसका प्रभाव भारत समेत ‘हम सभी’ पर पड़ता है और काफी हद तक इसके निहितार्थ अरब जगत के साथ भारत के संबंधों के लिए भी प्रासंगिक हैं।
उन्होंने कहा, “पिछले कुछ वर्षों में पश्चिम एशिया में कई महत्वपूर्ण घटनाएं हुई हैं। इनमें से कई घटनाओं का प्रभाव सीमाओं से परे देखा गया है।’’
जयशंकर ने विशेष रूप से गाजा की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा, “गाजा संघर्ष को समाप्त करने की योजना को आगे बढ़ाना आज व्यापक रूप से साझा प्राथमिकता है। विभिन्न देशों ने व्यक्तिगत रूप से या सामूहिक रूप से शांति योजना को लेकर नीतिगत घोषणाएं की हैं।”
भारत द्वारा आयोजित इस भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक में कई देशों के विदेश मंत्री उपस्थित हुए।
जयशंकर ने अपने संबोधन में आतंकवाद के साझा खतरे का भी जिक्र किया।
भाषा जोहेब संतोष
संतोष
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