नयी दिल्ली, 30 जनवरी (भाषा) मणिपुर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार के अगले कदम को लेकर अटकलें तेज हैं, क्योंकि राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किए जाने के एक साल अगले महीने पूरे हो जाएंगे और वहां लोकप्रिय सरकार के पुनर्गठन के सिलसिले में अभी कोई स्पष्ट बयान नहीं आया है।
मणिपुर में पिछले साल 13 फरवरी को राष्ट्रपति शासन लागू किए जाने के साथ ही राज्य की 60 सदस्यीय विधानसभा को निलंबित कर दिया गया था। यह कदम राज्य में मेइती और कुकी समुदायों के बीच महीनों से जारी जातीय हिंसा के बाद उठाया गया था।
मणिपुर विधानसभा का पांच साल का कार्यकाल मार्च 2027 में समाप्त होगा।
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा के पूर्वोत्तर समन्वयक संबित पात्रा ने पार्टी के मेइती और कुकी विधायकों के साथ अलग-अलग, कई दौर की बातचीत की।
सूत्रों ने बताया कि 14 दिसंबर 2025 को भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष और पात्रा दोनों समुदायों के विधायकों से एक ही छत के नीचे मिले।
उन्होंने बताया कि इस बैठक में मणिपुर विधानसभा के अध्यक्ष टी सत्यब्रत सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह सहित 30 से अधिक भाजपा विधायक शामिल हुए।
सूत्रों के अनुसार, भाजपा के सात कुकी विधायकों में से चार ने बैठक में हिस्सा लिया, जबकि तीन अन्य कुछ अपरिहार्य कारणों से इसमें शामिल नहीं हो सके।
उन्होंने कहा कि भाजपा की ओर से अभी तक इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है कि राज्य में राष्ट्रपति शासन के एक साल पूरे होने से पहले लोकप्रिय सरकार के पुनर्गठन की संभावना है या नहीं।
सूत्रों के मुताबिक, अगर मणिपुर में आने वाले हफ्तों में लोकप्रिय सरकार कार्यभार नहीं संभालती है, तो राष्ट्रपति शासन के विस्तार के लिए संसद के बजट सत्र के पहले भाग में दोनों सदनों में एक वैधानिक प्रस्ताव पारित कराना होगा।
मणिपुर में 2022 में हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा ने कुल 32 सीट जीती थीं। वहीं, जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के छह उम्मीदवार विधानसभा के लिए चुने गए थे, जिनमें से पांच बाद में भाजपा में शामिल हो गए थे। इससे, राज्य विधानसभा में भाजपा सदस्यों की कुल संख्या 37 हो गई।
मणिपुर विधानसभा में नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के छह, नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) के पांच, कांग्रेस के पांच, कुकी पीपुल्स एलायंस (केपीए) के दो, जदयू का एक और तीन निर्दलीय विधायक हैं। वहीं, एक सीट संबंधित विधायक के निधन के कारण रिक्त है।
भाषा पारुल धीरज
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