जम्मू, 29 जनवरी (भाषा) इस बार गणतंत्र दिवस परेड में जम्मू-कश्मीर की सदियों पुरानी कला, हस्तशिल्प और लोक परंपराओं को दर्शाने वाली झांकी ने राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा स्थान हासिल किया है। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा कि यह सम्मान केंद्र-शासित प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और जीवंत परंपराओं को मान्यता देता है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर की झांकी में शिल्प कौशल, प्रदर्शन और कहानी कहने का सहज मिश्रण था, जो केंद्र-शासित प्रदेश की शाश्वत रचनात्मक भावना को दर्शाता है।
सरकार ने बताया कि झांकी में पारंपरिक कलाओं की भव्यता को दर्शाते हुए नक्काशी वाला चमकदार समोवार, प्रतीकात्मक डिजाइन से समृद्ध बारीकी से बुने हुए कानी शॉल, हथकरघों से निर्मित ज्यामितीय सामंजस्य वाले कालीन और अखरोट की लकड़ी से बने नक्काशीदार शिल्प प्रदर्शित किए गए।
झांकी में प्रदर्शित केसर के बैंगनी फूल और उनके गहरे लाल रेशे भूमि, श्रम और विरासत से जुड़ी एक कालातीत पहचान के प्रतीक थे।
झांकी में प्रदर्शित रौफ नृत्य की कोमलता, कुद नृत्य की ऊर्जा और पहाड़ी, भद्रवाही तथा गोजरी नृत्यों की जीवंत परंपराएं क्षेत्र की सांस्कृतिक विविधता, उल्लास और सामूहिक भावना को दर्शाती थीं।
इस झांकी की कल्पना, डिजाइन और अवधारणा पद्मश्री और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित कलाकार बलवंत ठाकुर के नेतृत्व में तैयार की गई थी।
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