नयी दिल्ली, 29 जनवरी (भाषा) संसद में बृहस्पतिवार को पेश वित्त वर्ष 2025-26 की आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि लगातार निवेश से रेल नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ है, जिसमें 2014 के बाद की अवधि में परिचालन की दृष्टि से तैयार पटरियों की लंबाई पिछले दशक की तुलना में दोगुनी से भी अधिक हो गई है।
आर्थिक समीक्षा के मुताबिक, 2004 से 2014 के बीच प्रति वर्ष औसतन 1,499 किलोमीटर रेल पटरियां परिचालन के लिए उपलब्ध हुईं और यह आंकड़ा 2014 से 2024 के बीच बढ़कर औसतन 3,118 किलोमीटर हो गया।
आर्थिक समीक्षा में कहा गया है, ‘‘भारतीय रेलवे अपनी नेटवर्क क्षमता का विस्तार करके, संपत्तियों का आधुनिकीकरण करके और ‘मल्टीमोडल कनेक्टिविटी’ को मजबूत करके भारत के बुनियादी ढांचे के परिदृश्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाना जारी रखे हुए है।’’
इसमें कहा गया है, ‘‘मार्च 2025 तक रेल नेटवर्क 69,439 ‘रूट’ किलोमीटर तक फैल गया। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान, नेटवर्क में 3,500 किलोमीटर की वृद्धि करने का लक्ष्य है। अक्टूबर 2025 तक नेटवर्क के 99.1 फीसदी हिस्से का विद्युतीकरण हो चुका है।’’
आर्थिक समीक्षा के अनुसार, ‘‘रेलवे भारत के माल ढुलाई और ऊर्जा संसाधनों की रीढ़ के रूप में भी उभरा है, जो विशेष गलियारों, आधुनिक टर्मिनल और ‘फर्स्ट-माइल कनेक्टिविटी’ परियोजनाओं के जरिये कोयला परिवहन, औद्योगिक आपूर्ति शृंखलाओं तथा कंटेनर परिवहन का समर्थन करता है।’’
आर्थिक समीक्षा में रेलवे क्षेत्र में कुछ प्रमुख बुनियादी ढांचा पहलों, जैसे आर्थिक रेलवे गलियारे (पीएम गतिशक्ति), मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल (एमएएचएसआर), समर्पित फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी), स्टेशन पुनर्विकास, सुरक्षा, प्रौद्योगिकी और ट्रैक उन्नयन पर प्रकाश डाला गया है। इसमें रेलवे में जारी परिवर्तनकारी सुधारों को रेखांकित किया गया है।
भाषा वैभव पारुल
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