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Thursday, 29 January, 2026
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टेक्सटाइल सेक्टर में उथल-पुथल के बीच बांग्लादेश भारत से आने वाले यार्न पर ड्यूटी लगा सकता है

बांग्लादेश के मिल मालिकों का कहना है कि शुल्क-मुक्त धागे के आयात से उनके कारोबार को खतरा है और उन्होंने अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी है. वहीं, कपड़ा निर्यातकों का कहना है कि नए शुल्क उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता को नुकसान पहुंचा सकते हैं.

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नई दिल्ली: बांग्लादेश आयातित कॉटन यार्न पर 10 से 20 प्रतिशत तक शुल्क लगाने पर विचार कर रहा है. यह यार्न ज्यादातर भारत से आता है. यह फैसला देश में टेक्सटाइल मिल मालिकों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से पहले लिया जा सकता है.

बांग्लादेश द्वारा कस्टम ड्यूटी लगाए जाने से घरेलू कपास कीमतों में चल रही रिकवरी रुक सकती है. ये कीमतें 2025 में भारत से ड्यूटी-फ्री आयात के कारण गिर गई थीं.

उद्योग के अनुमान के मुताबिक, ड्यूटी-फ्री सुविधा हटने से यार्न पर कुल शुल्क लगभग 37 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा. इससे कच्चे माल की लागत में करीब 60 सेंट प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी होगी. इसका सीधा असर बांग्लादेश के 28 अरब डॉलर के निटवियर निर्यात सेक्टर पर पड़ेगा.

वर्ष 2024–25 में भारत से बांग्लादेश का यार्न आयात बढ़कर 556.12 मिलियन किलोग्राम हो गया. इसकी कीमत 1.79 अरब डॉलर रही. यह मात्रा में 22.22 प्रतिशत और मूल्य में 20.15 प्रतिशत की बढ़ोतरी है.

भारत बांग्लादेश को कॉटन यार्न सप्लाई करने वाला सबसे बड़ा देश है. वहीं चीन तैयार कपड़ों का सबसे बड़ा निर्यातक है. भारत ने 2025 में 3.57 अरब डॉलर का कॉटन यार्न निर्यात किया. इसमें से करीब 45.9 प्रतिशत बांग्लादेश को भेजा गया.

यह प्रस्ताव फिलहाल सरकार के सक्रिय विचाराधीन है. यह घरेलू टेक्सटाइल मिल मालिकों की संभावित हड़ताल के बाद सामने आया है. मिल मालिकों का कहना है कि ड्यूटी-फ्री यार्न आयात ने उन्हें बंद होने की कगार पर पहुंचा दिया है. वहीं गारमेंट निर्यातकों का कहना है कि नए शुल्क बांग्लादेश की वैश्विक प्रतिस्पर्धा को नुकसान पहुंचाएंगे. खासकर तब, जब देश 2026 में अल्पविकसित देश की श्रेणी से बाहर होने की तैयारी कर रहा है.

इससे पहले भी बांग्लादेश ने भारतीय कॉटन यार्न पर शुल्क लगाने पर विचार किया था. इस मुद्दे पर बांग्लादेश ट्रेड एंड टैरिफ कमीशन ने 5 जनवरी को चर्चा की थी.

12 जनवरी को बांग्लादेश के वाणिज्य मंत्रालय ने नेशनल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू को पत्र भेजकर बॉन्डेड वेयरहाउस सुविधा को निलंबित करने की मांग की थी. यह सुविधा 10 से 30 काउंट वाले कॉटन यार्न के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति देती है.

22 जनवरी को बांग्लादेश गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन और बांग्लादेश निटवियर मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस निलंबन को हटाने की मांग की. इसके बाद बांग्लादेश टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन के नेतृत्व में मिल मालिकों ने अलग प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसे लागू करने की मांग की.

गारमेंट निर्यातक इस मुद्दे को अलग नजरिए से देखते हैं. उनका कहना है कि देश में बना यार्न महंगा होता है और उसकी गुणवत्ता भी अक्सर एक जैसी नहीं रहती. ग्लोबल ब्रांड भारतीय यार्न को ज्यादा पसंद करते हैं. उनका कहना है कि आयात में रुकावट से लागत बढ़ेगी, डिलीवरी में देरी होगी और बांग्लादेश के वैश्विक कपड़ा बाजार पर असर पड़ेगा.

पिछले साल अप्रैल में बांग्लादेश ने भारत से यार्न आयात को बेनापोल, भोमरा, सोनामस्जिद, बांग्लाबंधा और बुरिमारी जैसे प्रमुख भूमि बंदरगाहों से रोक दिया था. नेशनल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू ने कहा था कि यह फैसला गलत घोषणा और अनुचित प्रतिस्पर्धा को रोकने के लिए लिया गया.

बीटीएमए लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि भारतीय निर्यातक यार्न काउंट कम दिखाकर लागत से कम दाम पर बिक्री कर रहे हैं. रसेल ने तब प्रोथोम आलो से कहा था कि भारतीय मिलें उत्पादन लागत से कम कीमत पर यार्न और कपड़े निर्यात कर रही हैं. उन्होंने चेतावनी दी थी कि बांग्लादेश का टेक्सटाइल सेक्टर भी जूट उद्योग जैसा हाल झेल सकता है. संगठन ने एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने और बेहतर निगरानी व्यवस्था बनने तक भूमि बंदरगाहों से आयात रोकने की मांग भी की है.

भूमि बंदरगाहों पर पाबंदी से पहले भारत के करीब 32 प्रतिशत यार्न निर्यात बांग्लादेश में जमीन के रास्ते जाते थे. समुद्री रास्ते पर जाने से लॉजिस्टिक लागत बढ़ी और देरी हुई. इससे खास तौर पर उत्तरी बांग्लादेश की छोटी और मझोली मिलों को नुकसान हुआ, जो सस्ते भूमि परिवहन पर निर्भर थीं. पाबंदियों के बावजूद मुनाफा नहीं सुधरा.

टेक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर बांग्लादेश के कुल निर्यात का 80 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा हैं और लाखों लोगों को सीधे और परोक्ष रूप से रोजगार देते हैं. दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र के तहत बांग्लादेशी कपड़ों को भारत में ड्यूटी-फ्री पहुंच मिलती थी. भारतीय बंदरगाहों और हवाई अड्डों से ट्रांसशिपमेंट से लॉजिस्टिक लागत भी कम होती थी.

अब यही आपसी निर्भरता टकराव का कारण बन गई है. बीटीएमए का दावा है कि मिलों के पास 120 अरब टका से ज्यादा का बिना बिका यार्न जमा है. संगठन का कहना है कि 50 से ज्यादा मिलें पहले ही बंद हो चुकी हैं. गैस की कमी ने हालात और खराब कर दिए हैं. मिल मालिकों ने चेतावनी दी है कि देशभर में अनिश्चितकालीन बंद से करीब 10 लाख कामगार प्रभावित हो सकते हैं.

पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद ब्राजील बांग्लादेश के लिए कच्चे कपास का सबसे बड़ा स्रोत बन गया है. यह जानकारी दिसंबर 2025 में अमेरिकी कृषि विभाग की रिपोर्ट में दी गई. इसके बावजूद भारत बांग्लादेश के लिए कॉटन यार्न का सबसे बड़ा सप्लायर बना हुआ है. 2024–25 के मार्केटिंग वर्ष में कुल आयात का 82 प्रतिशत भारत से आया.

ढाका में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार और नई दिल्ली के बीच रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं. अप्रैल 2025 में भारत ने वह अहम ट्रांसशिपमेंट सुविधा वापस ले ली थी, जिससे बांग्लादेशी निर्यात कार्गो भारतीय भूमि सीमा चौकियों, बंदरगाहों और हवाई अड्डों से गुजर सकता था. यह फैसला यूनुस की उस टिप्पणी के बाद लिया गया था, जिसमें उन्होंने चीन की अर्थव्यवस्था को भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र तक फैलाने की बात कही थी और उसे ‘लैंडलॉक्ड’ बताया था.

अनिश्चितकालीन हड़ताल

बुधवार को हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अधिकारियों ने संकेत दिया कि प्रस्तावित निलंबन के अमल को फिलहाल टाल दिया गया है. हालांकि, यह साफ नहीं है कि 1 फरवरी को प्रस्तावित हड़ताल होगी या नहीं. 12 फरवरी को राष्ट्रीय चुनाव निर्धारित हैं, इसलिए अंतिम फैसला अगली सरकार पर छोड़ा जा सकता है.

बांग्लादेश की कपड़ा मिलों का कहना है कि वे पहले से ही टूटने की कगार पर हैं. पिछले हफ्ते ढाका में बीटीएमए के अध्यक्ष शौकत अजीज रसेल ने घोषणा की कि मिलों को 1 फरवरी से अनिश्चितकाल के लिए बंद करना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि यह फैसला पूरी मजबूरी में लिया जा रहा है, क्योंकि मिल मालिकों के पास अब बैंक कर्ज चुकाने की क्षमता नहीं बची है.

ढाका ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रसेल ने कहा कि इस सेक्टर का पूंजी आधार आधे से ज्यादा घट चुका है, जिससे मिलें बकाया देनदारियां चुकाने में असमर्थ हो गई हैं. उन्होंने कहा कि अगर हम अपनी सारी संपत्ति भी बेच दें, तो भी कर्ज चुकाना संभव नहीं होगा.

उन्होंने आगे कहा कि मैं सभी मंत्रालयों और संबंधित विभागों के पास गया हूं, लेकिन हर कोई जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डाल रहा है. कोई ठोस फैसला सामने नहीं आ रहा है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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