बारामती/मुंबई: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के पार्थिव शरीर को ले जा रहा एक बड़ा ट्रक बारामती की सड़कों से गुज़रा. चारों तरफ लोगों की भारी भीड़ थी. ट्रक पर अजित पवार की एक काफी बड़ी तस्वीर लगी थी, जिस पर पीले और लाल रंग की माला थी. उनके निजी स्टाफ और बॉडीगार्ड, जो हमेशा उनके साथ रहते थे, इस बार भी उनके साथ थे—आखिरी बार.
विद्या प्रतिष्ठान मैदान में, जहां गुरुवार को अजित पवार का अंतिम संस्कार हुआ, ज़मीन का भूरा रंग कहीं दिखाई नहीं दे रहा था. पूरा मैदान लोगों से भरा था. इसमें बारामती के निवासी भी थे और अजित पवार के वे समर्थक भी, जो महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों से बारामती पहुंचे थे.
जैसे ही ‘अजित दादा’ का पार्थिव शरीर मैदान में लाया गया, वहां पूरी तरह सन्नाटा छा गया. कुछ देर बाद लोगों ने “अजित दादा परत या” (अजित दादा वापस आओ) के नारे लगाने शुरू कर दिए.
सुबह 11 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच, महाराष्ट्र ने छह बार उपमुख्यमंत्री रहे अजित पवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी. यह वही बारामती है, जहां से 35 साल पहले उन्होंने राजनीति की शुरुआत की थी और 1991 से वे इसी सीट का विधानसभा में प्रतिनिधित्व करते रहे.
अंतिम संस्कार के दौरान अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेता पवार परिवार के दुख में साथ खड़े नज़र आए, जब उनके बेटे पार्थ और जय अंतिम संस्कार की रस्में निभा रहे थे, तब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के संस्थापक शरद पवार, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी (बीजेपी), और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार शिंदे एक साथ बैठे थे.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी अंतिम संस्कार में शामिल होने बारामती पहुंचे. उनके साथ नवनिर्वाचित बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन भी थे. अमित शाह ने पवार परिवार के राजनीतिक मुखिया शरद पवार को सांत्वना दी, अजित पवार के पार्थिव शरीर पर फूल चढ़ाए और उनके बेटों से कुछ देर बात कर दुख जताया. मंच पर उनके साथ अजित पवार की अगुवाई वाली एनसीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल भी मौजूद थे.

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत, आंध्र प्रदेश के मंत्री नारा लोकेश, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर, राज्य मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले, छगन भुजबल और चंद्रकांत पाटिल, एनसीपी नेता सुनील तटकरे और धनंजय मुंडे, महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे समेत कई अन्य नेता भी मौजूद थे और उन्होंने अजित पवार के पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित की. अभिनेता रितेश देशमुख और उद्योगपति अमित कल्याणी भी वहां मौजूद थे.
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, जिनके साथ अजित पवार ने महा विकास आघाड़ी (एमवीए) सरकार में उपमुख्यमंत्री के तौर पर काम किया था, बुधवार रात अपनी पत्नी रश्मि और विधायक बेटे आदित्य के साथ बारामती पहुंचे और पवार परिवार को सांत्वना दी.

जैसे-जैसे भीड़ बढ़ती गई, आयोजक लोगों से संयम बरतने और “अजित दादा जिस एक सिद्धांत पर जीते थे—अनुशासन” को याद रखने की अपील करते रहे. भीड़ में “एकच वादा, अजित दादा” के नारे भी गूंजे. यह नारा उनकी पहचान बन गया था और यह दिखाता था कि उनके वादों को कितना पक्का माना जाता था.
अजित पवार के बारे में कहा जाता था कि वे वही काम करने के लिए हां कहते थे, जो वे कर सकते थे. जो उनके बस में नहीं होता था या संभव नहीं होता था, उसके लिए वे साफ मना कर देते थे.
एकजुट पवार परिवार
बुधवार को विमान हादसे में अजित पवार की अचानक मौत और गुरुवार को उनके अंतिम संस्कार के दौरान पूरा पवार परिवार गम में एकजुट नज़र आया. इसमें शरद पवार और उनके भाई प्रतापराव पवार की पीढ़ी से लेकर उनके बच्चे, अजित पवार के भाई-बहन और अगली पीढ़ी—पार्थ, जय, रोहित सभी शामिल थे.
अजित पवार के बड़े बेटे पार्थ ने अपने भाई जय के साथ मिलकर पिता का अंतिम संस्कार किया. इससे कुछ देर पहले, अजित पवार की चचेरी बहन सुप्रिया सुले ने उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार का हाथ पकड़कर उन्हें उस जगह तक ले गईं, जहां अजित पवार का पार्थिव शरीर रखा गया था.

सुनेत्रा, जो पद्मसिंह पाटिल की बहन हैं, जिन्हें कभी शरद पवार का करीबी सहयोगी माना जाता था—करीब चार दशकों तक अजित पवार की पत्नी रहीं.
उन्होंने अपने पति के शरीर पर पवित्र जल छिड़का, सिर और पैर छूकर प्रणाम किया और प्रार्थना की. इसके बाद सुले ने उनका हाथ पकड़कर उन्हें मंच से नीचे उतारा. सुले ने अजित पवार की शोकग्रस्त बहनों के साथ भी यही किया.

अजित पवार की मौत की खबर फैलते ही सुले ने व्हाट्सऐप पर एक शब्द का स्टेटस डाला था: “Devastated” (टूट गई हूं). गुरुवार को उन्होंने एक आधिकारिक बोर्ड साझा किया, जिस पर अजित पवार की कम उम्र की तस्वीर थी और लिखा था: “सदस्य, 10वीं लोकसभा, उपमुख्यमंत्री, महाराष्ट्र.”
अजित पवार ने 1991 में बारामती लोकसभा सीट जीतकर पहली बार चुनावी राजनीति में कदम रखा था, लेकिन उसी साल अपने चाचा शरद पवार के लिए रास्ता बनाने के लिए उन्होंने पद छोड़ दिया था.
सुले के स्टेटस में लिखा था: “यह हमारे परिवार के लिए बहुत मुश्किल वक्त है. हमें जो प्यार, चिंता और संदेश मिले हैं, उनके लिए हम दिल से आभारी हैं.”
महाराष्ट्र की राजनीति में पवार परिवार हमेशा बहुत करीबी और अनुशासित माना जाता रहा है. परिवार में यह परंपरा शरद पवार की दिवंगत मां ने शुरू की थी कि हर पीढ़ी के सभी सदस्य एक जगह इकट्ठा होकर दीवाली मनाएं.
चाचा शरद पवार, अजित पवार के लिए पिता समान रहे क्योंकि किशोरावस्था के बाद ही उन्होंने अपने पिता अनंतराव पवार को खो दिया था.
शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी से अजित पवार की बगावत और महायुति के साथ गठबंधन ने परिवार की एकता को तोड़ दिया था. 2023 की बगावत के बाद बारामती में परिवार की सियासी ज़मीन पर दो कड़े चुनावी मुकाबले हुए.
पहला मुकाबला तब हुआ, जब अजित पवार ने अपनी पत्नी सुनेत्रा को राजनीति में उतारा और अपनी चचेरी बहन, मौजूदा बारामती सांसद सुप्रिया सुले के खिलाफ खड़ा किया.
इस लड़ाई ने पूरे पवार परिवार को पक्ष चुनने पर मजबूर कर दिया. अजित पवार के भाई श्रीनिवास पवार और उनका पूरा परिवार, परिवार के मुखिया शरद पवार के खिलाफ जाने को तैयार नहीं था और उन्होंने सुले के लिए प्रचार किया. सुनेत्रा चुनाव हार गईं और बाद में उन्हें राज्यसभा भेजा गया.
छह महीने बाद फिर ऐसा ही मुकाबला हुआ, जब शरद पवार की एनसीपी ने अजित के भतीजे युगेंद्र पवार को राज्य विधानसभा चुनाव में उनके खिलाफ उतारा. युगेंद्र यह चुनाव हार गए, क्योंकि बारामती के लोगों ने लोकसभा और विधानसभा—दोनों में यथास्थिति बनाए रखने का फैसला किया और किसी एक पक्ष को नहीं चुना.
हाल के समय में पवार परिवार के दोनों गुटों के रिश्तों में नरमी आई थी. पिछले साल अगस्त में अजित पवार और सुनेत्रा पवार समेत पूरा परिवार युगेंद्र की शादी में एक साथ शामिल हुआ और सभी ने साथ में फोटो भी खिंचवाई.
इस महीने पुणे और पिंपरी-चिंचवड नगर निगम चुनावों में भी अजित पवार ने अपने भतीजे रोहित पवार (शरद पवार की एनसीपी के विधायक) और सुप्रिया सुले के साथ मिलकर प्रचार किया. ये चुनाव दोनों एनसीपी ने मिलकर लड़े थे. इन रैलियों में से एक में रोहित पवार ने अजित पवार को फिल्म KGF के नायक के नाम पर “रॉकी भाई” कहा था.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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