नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में एसिड अटैक के 198 मामले लंबित हैं, जबकि पश्चिम बंगाल में ऐसे 160 मामले लंबित हैं. यह जानकारी इस हफ्ते हाईकोर्ट्स ने सुप्रीम कोर्ट को दी.
सुप्रीम कोर्ट को दी गई रिपोर्ट के मुताबिक, गुजरात में 114, बिहार में 68 और महाराष्ट्र में 58 एसिड अटैक के मामले लंबित हैं. यह जानकारी 17 हाईकोर्ट्स की ओर से दी गई ऑफिस रिपोर्ट में सामने आई है, जो दिसंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के जवाब में सौंपी गई थी. आदेश में कहा गया है कि बाकी आठ हाईकोर्ट्स की स्टेटस रिपोर्ट का अब भी इंतज़ार है.
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने 27 जनवरी को कई सख्त निर्देश जारी किए, जिन्हें बुधवार को सार्वजनिक किया गया. इसमें अलग-अलग राज्यों में मामलों के लंबित रहने की स्थिति और पीड़ितों के समुचित पुनर्वास की तुरंत ज़रूरत पर जोर दिया गया है.
यह आदेश एसिड अटैक पीड़िता शाहीन मलिक की ओर से दायर याचिका पर आया है. शाहीन मलिक ने मांग की है कि जबरन एसिड पिलाने के शिकार लोगों को भी दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत “एसिड अटैक पीड़ित” माना जाए.
कोर्ट ने कहा, “हम सभी हाईकोर्ट्स से अनुरोध करते हैं कि वे एसिड अटैक से जुड़े मामलों में ट्रायल को तय समय-सीमा में जल्द से जल्द पूरा करने पर विचार करें और जरूरत पड़ने पर इन्हें प्राथमिकता के आधार पर भी निपटाया जाए.”
पुनर्वास योजना
छह पन्नों के अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जहां हाईकोर्ट्स को ट्रायल को उसके “तार्किक अंत” तक पहुंचाना चाहिए, वहीं राज्य सरकार और सभी संबंधित अधिकारियों की यह भी उतनी ही जिम्मेदारी है कि वे पीड़ितों के लिए उचित पुनर्वास उपायों पर विचार करें, उन्हें तैयार करें और लागू करें.
कोर्ट ने सभी राज्य विधिक सेवा प्राधिकरणों (SLSA) को निर्देश दिया है कि वे एसिड अटैक पीड़ितों के लिए मुआवजा, पुनर्वास और चिकित्सा सहायता से जुड़ी मौजूदा योजनाओं पर विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करें. जिन राज्यों में ऐसा कोई ढांचा मौजूद नहीं है, वहां के SLSA के कार्यकारी अध्यक्षों को “जरूरी कदम उठाने” और अनुपालन रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया गया है.
डेटा देने के लिए चार हफ्ते की समय-सीमा
शीर्ष अदालत ने राज्य सरकारों, हाईकोर्ट्स और SLSA को चार हफ्ते के भीतर लंबित मामलों की संख्या के अलावा अन्य विस्तृत जानकारी देने का निर्देश दिया है.
मांगी गई जानकारी में साल-दर-साल एसिड अटैक की घटनाओं की डिटेल्स, क्या चार्जशीट दाखिल हुई या नहीं, मौजूदा मामलों की स्थिति (निपटाए गए और ट्रायल में चल रहे मामलों की संख्या), और लंबित अपीलों की संख्या शामिल है.
कोर्ट ने यह भी कहा है कि हर पीड़ित से जुड़ा व्यक्तिगत डेटा दिया जाए, जिसमें उनकी शैक्षणिक योग्यता, वैवाहिक स्थिति और रोज़गार की स्थिति शामिल हो. इसके अलावा इलाज पर राज्य सरकार द्वारा किए गए या किए जाने वाले खर्च की पूरी वित्तीय और चिकित्सा जानकारी भी देनी होगी.
जबरन एसिड पिलाने या सेवन कराने के शिकार लोगों से जुड़ी विस्तृत जानकारी भी मांगी गई है.
इस मामले की अगली सुनवाई 9 मार्च को तय की गई है. तब तक सभी संबंधित प्राधिकरणों को रिपोर्ट से जुड़ी सभी शर्तों का पालन करना होगा.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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