नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को कहा कि भारत ने यह साबित कर दिया है कि ताकत का इस्तेमाल जिम्मेदारी और समझदारी के साथ किया जा सकता है, जैसा कि ऑपरेशन सिंदूर में देखा गया.
वित्त वर्ष 2026-27 के बजट सत्र के पहले दिन संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इस अभियान ने भारत का पराक्रम दिखाया है और सरकार ने यह कड़ा संदेश दिया है कि किसी भी आतंकी हमले का जवाब दृढ़ और निर्णायक कार्रवाई से दिया जाएगा.
राष्ट्रपति ने सामाजिक न्याय, समावेशी विकास और विकसित भारत को लेकर केंद्र सरकार के विजन को भी सामने रखा.
संसद का यह सत्र दो चरणों में होगा. पहला चरण बुधवार से शुरू होकर 13 फरवरी को समाप्त होगा. दूसरा चरण, जिसमें बजट पर चर्चा होगी, 9 मार्च से शुरू होकर 2 अप्रैल तक चलेगा.
मुर्मू ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए निर्भीक सोच बेहद जरूरी है. उनके अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर ने भारतीय सशस्त्र बलों की बहादुरी को उजागर किया. उन्होंने कहा कि स्वदेशी संसाधनों का इस्तेमाल कर आतंकी ठिकानों को नष्ट किया गया.
आतंकवाद के प्रति शून्य सहनशीलता पर जोर देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि हमलों पर सरकार की प्रतिक्रिया मजबूत और निर्णायक बनी रहेगी. उन्होंने नौवें सिख गुरु गुरु तेग बहादुर की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत न तो किसी को डराएगा और न ही डर में जिएगा.
उन्होंने कहा, “श्री गुरु तेग बहादुर जी ने हमें सिखाया कि ‘भय कहूं को देत नहिं, नहिं भय मानत आन’. इसका मतलब है कि हमें न किसी को डराना चाहिए और न ही किसी से डरना चाहिए. इसी निर्भीक सोच और भावना के साथ हम देश की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं.”
राष्ट्रपति ने कहा, “भारत ने साबित कर दिया है कि ताकत का इस्तेमाल जिम्मेदारी और समझदारी के साथ किया जा सकता है. ऑपरेशन सिंदूर के जरिए दुनिया ने भारतीय सशस्त्र बलों का पराक्रम देखा. अपने ही संसाधनों से हमारे देश ने आतंक के अड्डों को नष्ट किया.”
उन्होंने भविष्य की रक्षा तैयारियों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मिशन सुदर्शन चक्र पर काम चल रहा है.
उन्होंने कहा, “मेरी सरकार ने यह कड़ा संदेश दिया है कि भारत पर होने वाले हर हमले का जवाब मजबूत और निर्णायक होगा. सिंधु जल संधि को स्थगित रखा गया है और यह भी आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई का हिस्सा है. देश की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए मिशन सुदर्शन चक्र पर भी काम किया जा रहा है.”
ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और विकास के लिए राष्ट्रपति ने कहा कि विकसित भारत-जी राम जी कानून बनाया गया है. उन्होंने कहा, “इस नए सुधार से गांवों में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी मिलेगी.”
जैसे ही राष्ट्रपति ने जी-राम-जी का उल्लेख किया, सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सांसदों, जिनमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद भी शामिल थे, ने मेज थपथपाकर सराहना की. वहीं विपक्षी सांसद विरोध में खड़े हो गए और कानून वापस लेने की मांग करने लगे.
अपने भाषण में राष्ट्रपति ने आत्मनिर्भरता पर जोर देने के लिए कवि रवींद्रनाथ टैगोर को उद्धृत किया. उन्होंने कहा, “गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने कहा था कि आत्मनिर्भर जीवन जीए बिना स्वतंत्रता अधूरी है. भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मेरी सरकार लगातार ठोस कदम उठा रही है. आज मेक इन इंडिया की सोच से बने उत्पाद दुनिया के अलग-अलग बाजारों तक पहुंच रहे हैं.”
उन्होंने कहा कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पुराने नियम बदले जा रहे हैं. उन्होंने कहा, “सरकार ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ के रास्ते पर आगे बढ़ रही है.”
मुर्मू ने कहा कि पिछड़े वर्गों का कल्याण सरकार की प्राथमिकता है और इस दिशा में लगातार काम किया जा रहा है.
एनडीए सरकार की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार और घोटालों से मुक्त व्यवस्था बनाने में सफल हो रही है. उन्होंने कहा, “इसका नतीजा यह है कि करदाताओं का हर एक रुपया देश के विकास और जनकल्याण पर खर्च हो रहा है. आज भारत आधुनिक बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व निवेश कर रहा है.”
उन्होंने कहा कि सरकार देश में सामाजिक न्याय के लिए प्रतिबद्ध है.
उन्होंने कहा, “वर्ष 2026 के साथ हमारा देश इस सदी के दूसरे चरण में प्रवेश कर चुका है. भारत के लिए इस सदी के पहले 25 वर्ष कई सफलताओं, गौरवपूर्ण उपलब्धियों और मूल्यवान अनुभवों के साथ पूरे हुए हैं.
पिछले 10-11 वर्षों में भारत ने विभिन्न क्षेत्रों में अपनी मजबूत नींव तैयार की है. बाबा साहेब आंबेडकर हमेशा समानता और सामाजिक न्याय पर जोर देते थे. हमारा संविधान भी हमें इसी दिशा में प्रेरित करता है कि सच्चा सामाजिक न्याय तभी है, जब देश के हर नागरिक को बिना किसी भेदभाव के उसके पूरे अधिकार मिलें.”
राष्ट्रपति ने बताया कि सरकार दलितों, पिछड़े वर्गों, आदिवासी समुदाय और हर वर्ग के लिए पूरी संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है.
उन्होंने कहा, “सबका साथ, सबका विकास की सोच का असर हर नागरिक के जीवन पर सकारात्मक रूप से पड़ रहा है.” उन्होंने यह भी कहा कि जहां 2014 में सामाजिक सुरक्षा योजनाएं केवल 25 करोड़ नागरिकों तक पहुंचती थीं, वहीं अब करीब 95 करोड़ भारतीयों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिल रहा है.
राष्ट्रपति ने संसद से एकजुट होकर विकसित भारत की दिशा में काम करने का आह्वान किया और सभी दलों के सांसदों से संसद में शालीन और सकारात्मक चर्चा करने की अपील की, ताकि लोकतंत्र मजबूत हो और देश का विकास हो सके.
जुलाई-अगस्त 2025 में हुआ संसद का मानसून सत्र भारी हंगामे की भेंट चढ़ गया था और विपक्ष के विरोध के कारण सत्र का बड़ा हिस्सा बाधित रहा.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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