नयी दिल्ली, 28 जनवरी (भाषा) केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि उसने तमिलनाडु में किसान-उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के कामकाज की समीक्षा करने और सुधारात्मक उपाय सुझाने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है।
समिति को दो महीने के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।
यह निर्णय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के हाल ही में इरोड दौरे के बाद लिया गया, जहां उन्होंने किसानों और अन्य संबंधित लोगों के साथ एफपीओ को होने वाली संचालन, तकनीकी और बाजार संबंधी चुनौतियों पर चर्चा की।
मंत्रालय ने बयान में कहा, ‘इन सूचनाओं पर तेजी से कार्रवाई करते हुए मंत्रालय ने राज्य में एफपीओ के प्रदर्शन का अध्ययन करने और उपयुक्त सुधारात्मक उपाय सुझाने के लिए समिति के गठन को मंजूरी दे दी है।’
समिति में नाबार्ड, नेफेड, एसएफएसी-तमिलनाडु, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद – राष्ट्रीय केला अनुसंधान केंद्र (एनआरसीबी), एफपीओ प्रतिनिधि, गैर सरकारी संगठन और कृषि और किसान कल्याण विभाग के अधिकारी शामिल हैं, जो एक व्यापक और क्षेत्र-उन्मुख मूल्यांकन सुनिश्चित करते हैं।
यह समिति एफपीओ को प्रभावित करने वाले मुख्य मुद्दों की समीक्षा करेगी, जिनमें संस्थानिक प्रबंधन और संचालन प्रणाली, व्यवसायिक कामकाज और स्थिरता, प्रौद्योगिकी सहायता और विस्तार सेवाएं, उत्पादों का संग्रहण, मूल्य संवर्धन और विपणन की चुनौतियां, साथ ही क्षमता निर्माण और मार्गदर्शन की आवश्यकताएं शामिल हैं।
समिति का विशेष ध्यान केला, हल्दी, नारियल, साबूदाना और प्राकृतिक व जैविक खेती जैसे तमिलनाडु की महत्वपूर्ण फसलों और कृषि प्रणालियों पर होगा।
समिति के सदस्य क्षेत्र का दौरा करेंगे और एफपीओ, सदस्य किसानों, बाजार चैनलों, प्रसंस्करणकर्ता और अन्य हितधारकों के साथ परामर्श करेंगे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इसकी सिफारिशें जमीनी हकीकत पर आधारित हों।
भाषा योगेश रमण
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