तिरूवनंतपुरम/नयी दिल्ली, 27 जनवरी (भाषा) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) महासचिव एम. ए. बेबी ने मंगलवार को कहा कि अगर वी. एस. अच्युतानंदन जीवित होते, तो वह पद्म विभूषण स्वीकार नहीं करते।
बेबी ने कहा कि इससे पहले भी माकपा के कई राष्ट्रीय नेताओं को इस तरह के सम्मान की पेशकश की गई थी, जिनमें ई. एम. एस. नंबूदिरिपाद, ज्योति बसु, हरकिशन सिंह सुरजीत और बुद्धदेव भट्टाचार्य शामिल हैं, जिन्होंने सरकार को धन्यवाद तो दिया लेकिन विनम्रतापूर्वक उन पुरस्कारों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
उन्होंने नयी दिल्ली में संवाददाताओं से कहा, ‘‘अगर कॉमरेड अच्युतानंदन आज जीवित होते, तो वह भी सरकार को धन्यवाद देते और पुरस्कार स्वीकार करने से मना कर देते। अब यह उनके परिवार को तय करना है कि वे इसे स्वीकार करें या नहीं।’’
माकपा के संस्थापक सदस्यों में से एक अच्युतानंदन का पिछले साल जुलाई में निधन हो गया। वह 101 वर्ष के थे।
हालांकि, उनके परिवार ने उन्हें मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किए जाने की घोषणा पर खुशी व्यक्त की।
अच्युतानंदन के बेटे वी. ए. अरूण कुमार ने कहा, ‘‘वह एक ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया और उसका नेतृत्व किया। ऐसे सम्मान अवश्य दिए जाने चाहिए और हम हमेशा उनके लिए ऐसी आशा करते हैं।’’ उन्होंने कहा कि परिवार के लिए यह खुशी का क्षण है।
भाषा सुभाष माधव
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