नयी दिल्ली, 27 जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने भारतीय विधिज्ञ परिषद (बीसीआई) और तेलंगाना विधिज्ञ परिषद (बीसीटी) से मंगलवार को उस याचिका पर जवाब मांगा, जिसमें 2023 के उस नियम को चुनौती दी गई है, जिसके तहत यदि किसी वकील के खिलाफ दो या दो से अधिक गंभीर आपराधिक मामले लंबित हैं तो वह परिषद का चुनाव लड़ने के अयोग्य हो जाता है।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने भारतीय विधिज्ञ परिषद नियमावली, 2023 के नियम-चार की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर बीसीआई और बीसीटी को नोटिस जारी किये।
शीर्ष अदालत अधिवक्ता जी. श्रीनिवास की याचिका की सुनवाई कर रही थी, जिनका राज्य विधिज्ञ परिषद चुनाव के लिए नामांकन निवार्चन अधिकारी ने इस आधार पर खारिज कर दिया था कि उनके खिलाफ दो गंभीर आपराधिक मामले लंबित थे और उनका खुलासा नहीं किया गया था।
बाद में उच्चाधिकार प्राप्त चुनाव समिति ने नामांकन खारिज किये जाने के फैसले को बरकरार रखा था।
आक्षेपित नियम के तहत एक वकील विधिज्ञ परिषद का चुनाव लड़ने के अयोग्य है यदि चुनाव से नौ महीने पहले की तारीख तक सात साल या उससे अधिक कारावास की सजा वाले अपराधों से जुड़े दो या अधिक आपराधिक मामले उसके खिलाफ लंबित हों।
इस नियम में यह स्पष्ट किया गया है कि ऐसा केवल एक मामले के लंबित होने से यह नियम लागू नहीं होगा।
इस नियम में यह भी प्रावधान है कि चुनाव लड़ने वाले वकील को किसी भी अनुशासनात्मक समिति द्वारा दंडित नहीं किया गया हो, वह दोषी न हो और चुनाव से नौ महीने पहले तक उसके खिलाफ कोई भी अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबित न हो।
न्यायालय ने याचिका पर बीसीआई और बीसीटी को नोटिस जारी किये तथा मामले की अगली सुनवाई के लिए 20 फरवरी की तारीख तय की।
भाषा प्रशांत सुरेश
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