लखनऊ: सरकार के “ब्राह्मण विरोधी” रवैये के खिलाफ विरोध जताते हुए प्रांतीय सिविल सेवा (पीसीएस) अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफा दे दिया है. बताया जा रहा है कि यह फैसला सरकार की नीतियों और नए यूजीसी नियमों के विरोध में लिया गया है. इस फैसले से नौकरशाही हलकों में हलचल मच गई है, क्योंकि किसी कार्यरत पीसीएस अधिकारी का खुले तौर पर सरकारी फैसलों पर सवाल उठाना आम बात नहीं है.
अपने इस्तीफे के पत्र में उन्होंने प्रयागराज के माघ मेले के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के खिलाफ की गई कार्रवाई की आलोचना की है.
बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट के रूप में तैनात 43-वर्षीय अलंकार अग्निहोत्री ने सोमवार को अपना इस्तीफा सौंपा.
इस्तीफा देने से पहले अग्निहोत्री ने फेसबुक पर कई पोस्ट डालीं, जिनमें वह “काला कानून वापस लो” और “बीजेपी का बहिष्कार करो” जैसे नारे लिखी तख्तियां पकड़े हुए नज़र आए.
उत्तर प्रदेश के राज्यपाल, चुनाव आयोग और राज्य निर्वाचन आयुक्त को भेजा गया उनका इस्तीफा पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है. पत्र में उन्होंने कहा कि वह यूजीसी रेगुलेशंस 2026 और प्रयागराज के माघ मेले के दौरान शंकराचार्य श्री अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों पर स्थानीय प्रशासन द्वारा किए गए कथित हमले के कारण उत्तर प्रदेश प्रांतीय सिविल सेवा (यूपीपीसीएस) से इस्तीफा दे रहे हैं.
बरेली में मीडिया से बात करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट अग्निहोत्री ने कहा कि नए यूजीसी नियम ब्राह्मणों का “उत्पीड़न बढ़ाएंगे”. उन्होंने दावा किया कि यूजीसी रेगुलेशंस 2026 में सामान्य वर्ग को “खुद को अपराधी बताने वाला” दिखाया गया है और समानता के नाम पर किसी एक खास वर्ग के लिए किए गए प्रावधानों को उन्होंने अनुचित और भेदभावपूर्ण बताया.
उन्होंने आगे कहा, “नए यूजीसी नियम सामान्य वर्ग के खिलाफ हैं. जो लोग खुद को ब्राह्मणों का नेता मानते हैं, वे भी कॉरपोरेट कर्मचारियों की तरह चुप बैठे हैं. मैं उनसे अपील करता हूं कि अगर उनका ज़मीर अभी ज़िंदा है, तो वे लोगों के साथ खड़े हों. जब सामान्य वर्ग विरोध कर रहा है, तो उनके साथ न खड़े होने में आपको शर्म नहीं आती?”
यूजीसी के मुताबिक, नए नियमों का मकसद परिसरों में जाति आधारित भेदभाव को रोकना है. इसमें एक बड़ा बदलाव यह है कि जाति आधारित भेदभाव के ढांचे में औपचारिक रूप से अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को भी शामिल किया गया है. पहले संस्थान मुख्य रूप से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से जुड़ी शिकायतों पर ही ध्यान देते थे. नए नियमों के तहत अब ओबीसी छात्र और कर्मचारी भी उत्पीड़न या भेदभाव की शिकायत दर्ज करा सकते हैं. यूजीसी का कहना है कि यह कदम ज़मीनी हकीकत को दर्शाता है. इस ऐलान के बाद कई सामान्य वर्ग के समूहों ने नए नियमों का विरोध किया है.
अपने इस्तीफे में अग्निहोत्री ने यह भी आरोप लगाया कि प्रयागराज माघ मेले के दौरान ज्योतिष पीठ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों को मौनी अमावस्या के दिन स्नान करते समय बाल पकड़कर घसीटा गया और पीटा गया. उन्होंने इसे सनातन परंपरा पर हमला बताया.
दिप्रिंट ने अग्निहोत्री से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनका फोन बंद था.
राज्यपाल को संबोधित एक पत्र में उन्होंने लिखा, “मैं, अलंकार अग्निहोत्री, उत्तर प्रदेश प्रांतीय सेवा का 2019 बैच का गजेटेड अधिकारी हूं और वर्तमान में बरेली जिले में सिटी मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात हूं. मैं यह भी बताना चाहता हूं कि मेरे पास आईआईटी (बीएचयू) से बी.टेक की डिग्री है, जो ऑल इंडिया हिंदू यूनिवर्सिटी के अंतर्गत आता है. इसके लिए मैं जीवन भर भारत रत्न महामना मदन मोहन मालवीय का आभारी रहूंगा, जिनकी कल्पना से बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना हुई. काशी और हनुमान जी की वीर भूमि को ध्यान में रखते हुए मैं अपने विचार खुलकर व्यक्त कर रहा हूं.”
बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट के रूप में तैनाती से पहले 2019 बैच के पीसीएस अधिकारी अग्निहोत्री उन्नाव, बलरामपुर और एटा समेत कई जिलों में डिप्टी कलेक्टर के रूप में सेवा दे चुके हैं. वे लखनऊ में सहायक नगर आयुक्त के रूप में भी काम कर चुके हैं.
उनके करीबी एक सूत्र के अनुसार, प्रयागराज में अविमुक्तेश्वरानंद के एक करीबी सहयोगी पर हुए लाठीचार्ज से अधिकारी को गहरा आघात पहुंचा था. सूत्र ने दिप्रिंट से कहा, “उन्होंने इस घटना के खिलाफ आवाज उठाने का फैसला किया. बाद में यूजीसी नियमों का मुद्दा सामने आया, जिससे वह और नाराज हो गए और अंततः उन्होंने इस्तीफा देने का फैसला किया. फिलहाल उन्होंने भविष्य को लेकर कोई योजना नहीं बनाई है.”
अधिकारी के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता फक्रुल हसन चांद ने कहा, “प्रयागराज में शंकराचार्य के साथ जो हुआ, उसके लिए सरकार ने माफी नहीं मांगी, इसी वजह से अधिकारी आहत हुए. इस घटना से करोड़ों हिंदुओं की भावनाएं आहत हुई हैं. उत्तर प्रदेश में आम तौर पर कहा जाता है कि यह सरकार ब्राह्मण विरोधी है. सरकार पहले ही अपनी सबसे बड़ी गलती कर चुकी है.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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