scorecardresearch
Tuesday, 27 January, 2026
होमराजनीतिसवाल नंबर 12 से केंद्र की ‘असल मंशा’ और ‘निष्पक्ष जाति जनगणना’ पर शक होता है: कांग्रेस

सवाल नंबर 12 से केंद्र की ‘असल मंशा’ और ‘निष्पक्ष जाति जनगणना’ पर शक होता है: कांग्रेस

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी सरकार की प्रतिबद्धता पर सवाल उठाया है, इसी तरह की चिंता जताते हुए इस प्रक्रिया को ‘बीजेपी का एक और दिखावा’ बताया है.

Text Size:

नई दिल्ली: कांग्रेस ने सोमवार को कहा कि जनगणना के पहले चरण में पूछे जाने वाले एक सवाल के तरीके से केंद्र सरकार के इस ऐलान पर शक पैदा होता है कि 1 अप्रैल से शुरू हो रही दो चरणों वाली जनगणना में जाति की गिनती भी की जाएगी.

एक बयान में कांग्रेस के महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने मांग की कि सरकार राजनीतिक दलों और नागरिक समाज से बातचीत शुरू करे, ताकि जनगणना के दूसरे चरण में होने वाली जाति गणना की रूपरेखा तय की जा सके.

रमेश ने कहा कि घर सूचीकरण और आवास जनगणना यानी फेज-I में शामिल 33 विषयों में दर्ज सवाल नंबर 12, “जिस तरह से बनाया गया है, वह मोदी सरकार की असली मंशा और व्यापक, निष्पक्ष, देशव्यापी जाति जनगणना के प्रति उसकी प्रतिबद्धता पर गंभीर सवाल खड़े करता है.”

उन्होंने बताया कि इस सवाल में यह जानकारी मांगी गई है कि परिवार का मुखिया “अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य” श्रेणी से है या नहीं, जबकि इसमें साफ तौर पर “ओबीसी और सामान्य वर्ग” के बारे में नहीं पूछा गया है.

रमेश ने कहा, “भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अब मोदी सरकार से मांग करती है कि जाति गणना से जुड़ी जानकारियों को अंतिम रूप देने से पहले राजनीतिक दलों, राज्य सरकारों और नागरिक समाज संगठनों से तुरंत बातचीत शुरू की जाए.”

उन्होंने मूल रूप से यह सुझाव दिया कि अगर पहले चरण में परिवार के मुखिया की जाति स्थिति जानी जानी है, तो एससी और एसटी के साथ-साथ ओबीसी और अगड़ी जातियों को भी श्रेणियों के रूप में गिना जा सकता था.

जनगणना के पहले चरण में पूछे जाने वाले 33 सवालों को सरकार ने 22 जनवरी को अधिसूचित किया था. समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी सरकार की प्रतिबद्धता पर सवाल उठाया है और इसी तरह की चिंता जताई है.

यादव ने 24 जनवरी को एक्स पर पोस्ट किया, “जनगणना की अधिसूचना में जाति के लिए एक कॉलम तक नहीं है. वे क्या गिनेंगे? जाति आधारित जनगणना सिर्फ बीजेपी का एक और दिखावा है. बीजेपी का सीधा फॉर्मूला है: न गिनती, न अनुपातिक आरक्षण या अधिकारों के लिए जनसांख्यिकीय आधार.”

सरकार ने पहले ऐलान किया था कि अगली दशकीय जनगणना, जो छह साल की देरी के बाद कराई जा रही है, उसमें जनसंख्या गणना यानी दूसरे चरण के दौरान इलेक्ट्रॉनिक तरीके से जाति से जुड़ा डेटा भी दर्ज किया जाएगा.

यह फैसला पिछले साल 30 अप्रैल को कैबिनेट कमेटी ऑन पॉलिटिकल अफेयर्स ने लिया था. हालांकि, सरकार ने अभी तक दूसरे चरण को करने के लिए अपनाई जाने वाली पद्धति की घोषणा नहीं की है.

कांग्रेस ने यह मांग भी दोहराई कि केंद्र को तेलंगाना में अपनी ही सरकार के अनुभव से सीख लेनी चाहिए, जिसने 2025 में सामाजिक, शैक्षिक, आर्थिक, रोजगार, राजनीतिक और जाति (SEEEPC) सर्वे कराया था, और उसी आधार पर दशकीय जनगणना का ढांचा तैयार करना चाहिए.

रमेश ने कहा, “2025 में तेलंगाना सरकार द्वारा कराए गए SEEEPC सर्वे में इस तरह की परामर्श प्रक्रिया एक अहम हिस्सा थी, जो शिक्षा, रोजगार, आय और राजनीतिक भागीदारी से जुड़ी जातिवार जरूरी जानकारी जुटाने का सबसे व्यापक और सार्थक तरीका है, और जो अधिक आर्थिक और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए बेहद जरूरी है.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

share & View comments