नयी दिल्ली, 26 जनवरी (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी में गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान निकाली गई आयुष मंत्रालय की झांकी में भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को मजबूत करने और उन्हें सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा ढांचे में एकीकृत करने में राष्ट्रीय आयुष मिशन (एनएएम) की भूमिका को प्रदर्शित किया गया।
यह अवधारणा वंदे मातरम्, आत्मनिर्भर भारत और प्रधानमंत्री के अमृत काल के लिए पंच प्राण अभियान से प्रेरित है, जो भारत की सभ्यतागत विरासत और स्वास्थ्य संबंधी भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण को दर्शाती है।
सोमवार को परेड के दौरान जब झांकी कर्तव्य पथ से होकर गुजरी, तो इसके अग्र भाग में औषधीय पौधों से आच्छादित हरित टीले के आसपास बैठे आचार्य चरक, ऋषि पतंजलि और महर्षि अगस्त्य की घूमती हुई त्रि-आकृति वाली प्रतिमा दिखाई गई। इस शक्तिशाली चित्रण का उद्देश्य मानव जीवन और प्राकृतिक दुनिया के बीच सद्भाव से उभरते आयुष के मूलभूत दर्शन को प्रतिबिंबित करना है।
साथ चल रही टुकड़ी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के आयुष के साथ एकीकरण को दर्शाया गया जो परंपरा में निहित नवोन्मेष-आधारित स्वास्थ्य सेवा को रेखांकित करता है।
झांकी के मुख्य हिस्से में एनएएम के तहत तीन प्रमुख पहलों को दर्शाया गया- महिलाओं और बाल कल्याण पर केंद्रित सुप्राजा, बुजुर्गों के स्वास्थ्य के लिए समर्पित वायोमित्र और स्कूली बच्चों में आयुष शिक्षा एवं जागरूकता को बढ़ावा देने वाली पहल आयुर्विद्या।
भावपूर्ण कठपुतली कला के माध्यम से अरिषद्वर्ग यानी छह आंतरिक शत्रुओं काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद और मत्सर का कलात्मक चित्रण किया गया जो दर्शाता है कि आयुष पद्धतियां आंतरिक संतुलन, मानसिक स्पष्टता और समग्र कल्याण को कैसे बढ़ावा देती हैं।
झांकी के पिछले हिस्से में आयुष्मान आरोग्य मंदिर (आयुष) को दर्शाया गया जो समुदाय-आधारित स्वास्थ्य सेवा वितरण को दर्शाता है। झांकी में इसके ऊपर योग के दृश्य, आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली आयुष दवाएं और शरीर-मन-आत्मा के सामंजस्य का प्रतीक ध्यान मुद्रा को दर्शाया गया।
इस झांकी में भारत की विविध चिकित्सीय परंपराओं का भी महत्व बताया गया और इसके जरिए मर्मा, शिरोधारा और कपिंग के त्रि-आयामी भित्तिचित्रों के साथ-साथ दुनिया भर की प्रमुख आयुष पद्धतियों के अग्रदूतों को धन्यवाद दिया गया।
झांकी के अंतिम हिस्से में एनएएम के तहत स्थापित एक आयुष शैक्षणिक संस्थान को दर्शाया गया, जो भविष्य की पीढ़ियों के लिए शिक्षा, अनुसंधान और क्षमता निर्माण का प्रतीक है।
झांकी में आयुष को ऐसी समग्र स्वास्थ्य प्रणाली के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसमें प्राचीन ज्ञान और आधुनिक नवोन्मेष मिलकर एक स्वस्थ, आत्मनिर्भर और लचीले भारत के निर्माण में योगदान देते हैं।
भाषा सिम्मी मनीषा
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