पटना, 26 जनवरी (भाषा) बिहार के प्रख्यात लोक नर्तक विश्वबंधु के परिजनों और शिष्यों ने उन्हें पद्मश्री (मरणोपरांत) पुरस्कार के लिए चुने जाने पर सोमवार को खुशी जताई।
विश्वबंधु उन तीन लोगों में शामिल हैं, जिनके नाम केंद्र सरकार ने पद्म पुरस्कारों के लिए बिहार से घोषित किए हैं।
विश्वबंधु की सबसे छोटी बेटी अर्पणा कुमारी ने पीटीआई-भाषा से कहा, “हमें बेहद खुशी है कि उन्हें मरणोपरांत पद्मश्री पुरस्कार दिया जाएगा। अगर यह उनके जीवनकाल में हुआ होता तो यह और भी शानदार होता।”
उन्होंने कहा, “उन्होंने अपना पूरा जीवन कला को समर्पित कर दिया था, उन्हें इस सम्मान की उम्मीद थी।”
कुमारी ने बताया कि उन्होंने “बहुत कम उम्र” में लोक नृत्य की दुनिया में कदम रखा था, जब लड़कों के लिए नृत्य को करियर के रूप में अपनाना मुश्किल माना जाता था।
विश्वबंधु के शिष्य जितेंद्र कुमार चौरसिया ने कहा, “इस सम्मान के साथ मेरा सपना पूरा हो गया है। यह मेरी दिली इच्छा थी कि उन्हें यह पुरस्कार मिले। यह हमारी अपनी उपलब्धि जैसा महसूस हो रहा है, यह बिहार की कला जगत की उपलब्धि है।”
चौरसिया ने कहा कि विश्वबंधु ने बिहार के पारंपरिक लोक नृत्यों को आधुनिक स्पर्श दिया।
उन्होंने कहा, “बिहार के पारंपरिक नृत्य रूपों में रचनात्मकता और नवाचार जोड़कर उन्होंने उन्हें एक नया आयाम दिया, जो आम लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय हुआ।”
बिहार की लोक नृत्य परंपरा के अग्रदूत माने जाने वाले विश्वबंधु ने 6,000 से अधिक प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया और नि:शुल्क प्रशिक्षण देकर ग्रामीण समुदायों को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाई।
कृषि वैज्ञानिक गोपालजी त्रिवेदी और भोजपुरी लोक गायक भरत सिंह भारती राज्य से अन्य दो व्यक्ति हैं, जिनके नाम देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान के लिए घोषित किए गए हैं।
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