नई दिल्ली: केंद्र सरकार द्वारा रविवार को घोषित पद्म पुरस्कार चुनावी राज्यों—केरल, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और असम, में मतदाताओं तक पहुंच बनाने और राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर संदेश देने की एक सोची-समझी कोशिश दिखते हैं.
भारत का दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान पद्म विभूषण मरणोपरांत भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के संस्थापक सदस्य और केरल के पूर्व मुख्यमंत्री वी. एस. अच्युतानंदन को दिया गया, जबकि तीसरा सबसे बड़ा सम्मान पद्म भूषण मरणोपरांत झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के संस्थापक शिबू सोरेन को मिला.
ये पुरस्कार मोदी सरकार के उस पैटर्न को दिखाते हैं, जिसमें अलग-अलग राजनीतिक और क्षेत्रीय पृष्ठभूमि के लोगों को सम्मान देकर दलगत राजनीति से ऊपर उठने का संदेश दिया जाता है और साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से जुड़े लोगों को भी पहचान दी जाती है.
संयोग से, 2022 में मोदी सरकार ने पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य को पद्म भूषण देने की घोषणा की थी. हालांकि, उस समय जीवित रहे वामपंथी नेता ने यह पुरस्कार लेने से इनकार कर दिया था.
1990 के दशक में भी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी सीपीआई(एम) के नेता और केरल के पहले मुख्यमंत्री ई. एम. एस. नंबूदरीपाद ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली पी. वी. नरसिम्हा राव सरकार द्वारा दिए गए पद्म विभूषण को ठुकरा दिया था. 2022 में सीपीआई(एम) के पूर्व महासचिव प्रकाश करात ने दोहराया था कि पार्टी की नीति राज्य द्वारा दिए जाने वाले पुरस्कारों को स्वीकार न करने की है.
सीपीआई(एम) ने तब एक बयान में कहा था, “कॉमरेड बुद्धदेव भट्टाचार्य, जिन्हें पद्म भूषण के लिए नामित किया गया था, ने इसे स्वीकार करने से मना कर दिया. सीपीआई(एम) की नीति हमेशा से राज्य के ऐसे पुरस्कारों को ठुकराने की रही है. हमारा काम लोगों के लिए है, पुरस्कारों के लिए नहीं. कॉमरेड ईएमएस, जिन्हें पहले एक पुरस्कार की पेशकश की गई थी, उन्होंने भी उसे ठुकरा दिया था.”
हालांकि, रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सीपीआई(एम) केरल के आधिकारिक हैंडल से जारी एक शुरुआती बयान ने पार्टी के रुख में बदलाव का संकेत दिया.
Com. Buddhadeb Bhattacharya who was nominated for the Padma Bhushan award has declined to accept it. The CPI(M) policy has been consistent in declining such awards from the State. Our work is for the people not for awards. Com EMS who was earlier offered an award had declined it. pic.twitter.com/fTmkkzeABl
— CPI (M) (@cpimspeak) January 25, 2022
बयान में कहा गया, “कॉमरेड वी. एस. अच्युतानंदन को मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया. संघर्ष, ईमानदारी और मजदूर वर्ग की सेवा से भरा जीवन हमेशा याद रखा जाएगा.” हालांकि, बाद में यह पोस्ट हटा दी गई.
केरल में, 2025 में 101 वर्ष की उम्र में स्वर्ग सिधार चुके अच्युतानंदन, जिन्हें लोकप्रिय रूप से वीएस कहा जाता था, के परिवार ने यह पुरस्कार स्वीकार कर लिया. उनके बेटे वीए अरुण कुमार ने पत्रकारों से कहा, “मेरे पिता को दिया गया यह सम्मान बहुत मूल्यवान है और हम इसे स्वीकार करते हुए खुश हैं.”
2026 के कुल पांच पद्म विभूषण पुरस्कारों में से तीन केरल के सार्वजनिक व्यक्तित्वों को दिए गए. अच्युतानंदन के अलावा, जो 2006 से 2011 तक केरल के मुख्यमंत्री रहे, पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज केटी थॉमस और आरएसएस विचारक पी नारायणन को भी पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया.
राज्य से अन्य पुरस्कार पाने वालों में एसएनडीपी योगम (श्री नारायण धर्म परिपालन योगम) के महासचिव वेल्लापल्ली नटेसन शामिल हैं, जो एजावा समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाला एक प्रमुख सामाजिक-धार्मिक संगठन है और अभिनेता ममूटी भी शामिल हैं. दोनों को पद्म भूषण दिया गया.
बीजेपी केरल के एजावा समुदाय में अपना समर्थन बढ़ाने की कोशिश कर रही है, जो ऐतिहासिक रूप से वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) का समर्थक रहा है. अच्युतानंदन और केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, दोनों इसी समुदाय से हैं.
2006 से 2019 के बीच केरल में सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज (सीएसडीएस) द्वारा किए गए चुनावी सर्वेक्षण दिखाते हैं कि पिछले एक दशक में बीजेपी का नायर और एजावा समुदाय में समर्थन लगातार बढ़ा है.
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को दिया गया पद्म भूषण भी चर्चा में रहा, क्योंकि उनके बेटे और वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को 2024 में कथित भ्रष्टाचार के एक मामले में केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गिरफ्तार किया था. झामुमो ने इसे मोदी सरकार की राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया था.
बिहार से झारखंड के गठन (2000) में अहम भूमिका निभाने वाले शिबू सोरेन के लिए पद्म भूषण की घोषणा के बाद झामुमो ने उनके लिए भारत रत्न—भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान, दिए जाने की मांग फिर दोहराई.
वास्तव में, सर्वोच्च नागरिक सम्मान का इस्तेमाल भी बीजेपी ने राजनीतिक लाभ के लिए किया है. 2019 में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को यह सम्मान मिला, जबकि 2024 में यह पूर्व प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिम्हा राव को समाजवादी आइकन कर्पूरी ठाकुर और चौधरी चरण सिंह के साथ दिया गया.
कुल मिलाकर, सभी राज्यों में सबसे ज्यादा 13 पद्म पुरस्कार तमिलनाडु को मिले. इसके बाद पश्चिम बंगाल को 11 पुरस्कार मिले, जिनमें लोकप्रिय अभिनेता प्रोसेनजीत चटर्जी को मिला पद्म श्री भी शामिल है. केरल को आठ, असम को पांच और पुडुचेरी को एक पुरस्कार मिला. गौरतलब है कि इस साल पुडुचेरी में भी चुनाव होने हैं.
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