रावलपिंडी: पाकिस्तान भर के शिक्षक संगठनों और निजी स्कूल संघों ने अंतरराष्ट्रीय शिक्षा दिवस पर सरकार की शिक्षा नीति की कड़ी आलोचना की. उन्होंने इसे दूरदर्शिता से रहित और पढ़ाई के लिए नुकसानदायक बताया. द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, संगठनों ने कहा कि घटता नामांकन और सरकारी स्कूलों के ढांचे का सिमटना दिखाता है कि मौजूदा नीतियां छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने में नाकाम रही हैं.
अंतरराष्ट्रीय शिक्षा दिवस हर साल 24 जनवरी को मनाया जाता है.
द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार, प्रतिनिधियों ने बताया कि पिछले दो वर्षों में सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या में तेज गिरावट आई है, जो रिकॉर्ड की सबसे बड़ी गिरावटों में से एक है. अकेले पंजाब में स्कूल से बाहर और सड़क पर रहने वाले बच्चों की संख्या बढ़कर लगभग 3 करोड़ तक पहुंच गई है और यह लगातार बढ़ रही है.
उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी स्कूलों की संख्या में भारी कमी आई है. तीन साल पहले जहां करीब 53,000 सरकारी स्कूल थे, वहीं अब यह संख्या घटकर लगभग 38,000 रह गई है. शिक्षा नेताओं ने लंबे समय से नए शिक्षकों की भर्ती न होने की ओर भी ध्यान दिलाया. उनका कहना है कि एक दशक से कोई नियमित शिक्षक भर्ती नहीं किया गया है. उन्होंने अत्यधिक छुट्टियों वाले कैलेंडर की भी आलोचना की और अनुमान लगाया कि स्कूल साल में लगभग 220 दिन बंद रहते हैं. बार-बार नीतियों में बदलाव से भ्रम की स्थिति बनी हुई है, खासकर प्राथमिक स्तर पर, जिसे बार-बार उर्दू और अंग्रेजी माध्यम के बीच बदला गया है और अब निजीकरण की ओर धकेला जा रहा है.
ऑल पाकिस्तान प्राइवेट स्कूल्स मैनेजमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष अबरार अहमद खान ने कहा कि जब देश में स्थिर शिक्षा ढांचा सुनिश्चित नहीं है, तब पाकिस्तान के पास अंतरराष्ट्रीय शिक्षा दिवस मनाने का नैतिक अधिकार नहीं है. उन्होंने बिजली, गैस और पानी जैसे व्यावसायिक करों के साथ-साथ निजी स्कूलों पर ऊंचा किराया लगाए जाने को ऐसी नीतियां बताया, जो शिक्षा को कमजोर कर रही हैं.
इस बीच, ऑल पाकिस्तान प्राइवेट स्कूल्स एंड कॉलेजेज एसोसिएशन के प्रमुख इरफान मुजफ्फर कियानी ने कहा कि पंजाब में करीब 1 लाख निजी स्कूल हैं, जबकि सरकारी संस्थानों की संख्या लगभग 38,000 से 40,000 के बीच है. इसके बावजूद निजी स्कूलों को कोई संरचनात्मक समर्थन नहीं मिलता. उन्होंने कहा कि अगर निजी स्कूलों की भूमिका न हो, तो सड़क पर रहने वाले बच्चों की संख्या बढ़कर 5 करोड़ तक पहुंच सकती है, जैसा कि द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने बताया.
उन्होंने राज्य से निजी स्कूलों को करों से छूट देने और जबरन बंद किए जाने की घटनाएं कम करने की अपील की, ताकि ज्यादा बच्चे फिर से कक्षाओं में लौट सकें.
ऑल पाकिस्तान प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मलिक नसीम अहमद ने निजी क्षेत्र की भागीदारी के साथ 20 साल की दीर्घकालिक शिक्षा योजना की मांग की. उन्होंने खास तौर पर लड़कियों के नामांकन पर ध्यान देने की बात कही. पंजाब टीचर्स यूनियन के राना लियाकत ने कहा कि सरकारी स्कूलों की बिक्री और निजीकरण के कारण महंगी फीस के चलते कई छात्र बाहर हो गए हैं. यह जानकारी द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट में दी गई है.
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