नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रविवार को कहा कि गोवा में ‘बर्च बाय रोमियो लेन’ नाइट क्लब का संचालन करने वाली संस्था ने पिछले दो वित्तीय वर्षों में लगभग 22 करोड़ रुपये की कमाई की और इस रकम के धन शोधन रोधी कानून के तहत “अपराध की आय” होने का संदेह है.
अरपोरा गांव स्थित ‘बर्च बाय रोमियो लेन’ में पिछले साल छह दिसंबर को एक डांस पार्टी के दौरान लगी भीषण आग में 25 लोगों की मौत हो गई थी और 50 अन्य घायल हुए थे.
ईडी के मुताबिक, नाइट क्लब से हुई कमाई के अपराध की आय होने का संदेह है, क्योंकि इसका कथित तौर पर बिना लाइसेंस के संचालन किया जा रहा था.
केंद्रीय जांच एजेंसी ने 23 जनवरी को गोवा, दिल्ली और हरियाणा में ‘बर्च बाय रोमियो लेन’ क्लब तथा गौरव और सौरभ लूथरा सहित उसके प्रवर्तकों से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की थी.
ईडी ने एक बयान में कहा, “छापेमारी के दौरान वैधानिक अनुपालन में गंभीर अनियमितताओं की बात सामने आई, जिसमें जाली दस्तावेजों के आधार पर लाइसेंस हासिल किया जाना और सक्षम प्राधिकारों की अनिवार्य मंजूरी के बिना वाणिज्यिक गतिविधियों का लगातार संचालन किया जाना शामिल है.”
बयान के अनुसार, छापेमारी के दौरान यह भी पाया गया कि नाइट क्लब का संचालन करने वाली संस्था ने वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दौरान लगभग 22 करोड़ रुपये की कमाई की थी.
इसमें आरोप लगाया गया है, “प्रथम दृष्टया इस कमाई के अपराध की आय होने का संदेह है, क्योंकि नाइट क्लब जरूरी वैधानिक लाइसेंस के बिना और विभिन्न विभागों के जाली अनापत्ति प्रमाणपत्रों (एनओसी) या लाइसेंस के आधार पर संचालित किया जा रहा था.”
बयान में कहा गया है कि नाइट क्लब के अवैध संचालन से अर्जित करोड़ों रुपये की धनराशि विभिन्न लोगों के निजी बैंक खातों के साथ-साथ समूह की अन्य संस्थाओं के खातों में अंतरित की गई थी.
इसमें कहा गया है कि अपराध की आय को जमा करने में शामिल होने के संदेह वाले व्यक्तियों और संस्थाओं के कुछ बैंक खातों से लेन-देन पर धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत रोक लगा दी गई है.
बयान के मुताबिक, “छापेमारी के दौरान समूह की संस्थाओं के माध्यम से विदेश भेजे गए धन से जुड़े सबूत भी मिले हैं और इस सिलसिले में संबंधित कानूनों के संभावित उल्लंघनों की जांच की जा रही है.”
इसमें कहा गया है कि ईडी की जांच भ्रष्टाचार के किसी भी संभावित पहलू का पता लगाने और यह जानने की कोशिश करने पर भी केंद्रित है कि इसमें संलिप्त अन्य व्यक्ति अपराध से अर्जित धन के शोधन में तो शामिल नहीं थे.
धन शोधन का यह मामला गोवा पुलिस की ओर से आरोपियों के खिलाफ दर्ज दो प्राथमिकी से उपजा है. राज्य पुलिस इस मामले में अब तक लूथरा बंधुओं सहित आठ लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है.
लूथरा बंधु नाइट क्लब अग्निकांड के कुछ घंटों बाद देश छोड़कर थाईलैंड चले गए थे. उन्हें पिछले साल 17 दिसंबर को भारत वापस भेज दिया गया और वे फिलहाल गोवा पुलिस की हिरासत में हैं.
गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने जनवरी की शुरुआत में राज्य विधानसभा को सूचित किया था कि इस नाइट क्लब का पिछले कई वर्षों से अलग-अलग नामों से संचालन किया जा रहा था और उनकी सरकार 1999 से किए जा रहे कथित उल्लंघनों की जांच करेगी.
शुक्रवार को ईडी ने राष्ट्रीय राजधानी के किंग्सवे कैंप और गुरुग्राम (हरियाणा) स्थित तत्वम विलास में लूथरा परिवार और नाइट क्लब के सह-मालिक अजय गुप्ता से जुड़े परिसरों के अलावा गोवा में अरपोरा-नागोवा के पूर्व सरपंच रोशन रेडकर तथा पूर्व पंचायत सचिव रघुवीर बागकर के ठिकानों पर तलाशी ली थी.
ईडी अधिकारियों के अनुसार, रेडकर और बागकर पर नाइट क्लब के संचालन के लिए अवैध व्यापार लाइसेंस हासिल करने में मदद देने तथा एनओसी जारी करने का आरोप है. दोनों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है.
ईडी अधिकारियों ने सुरिंदर कुमार खोसला के परिसर की भी तलाशी ली, ताकि धन शोधन के उस पहलू की जांच की जा सके, जो ‘खजान’ भूमि के अवैध रूपांतरण से जुड़ा है. ‘खजान’ भूमि एक विशिष्ट पारंपरिक कृषि भूमि होती है, जिसे आर्द्र दलदली भूमि को सुखाकर बनाया जाता है. इसी भूमि पर ‘बर्च बाय रोमियो लेन’ क्लब स्थित है. खोसला एक ब्रिटिश नागरिक है और माना जाता है कि वह क्लब के मालिकों में से एक है.
गोवा पुलिस ने खोसला के खिलाफ इंटरपोल से रेड नोटिस जारी करवाया है, क्योंकि वह भारत में मौजूद नहीं है.
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