नयी दिल्ली, 23 जनवरी (भाषा) यूरोपीय संघ (ईयू) की तरफ से एक प्रोत्साहन योजना के तहत शुल्क रियायतें निलंबित किए जाने से भारत से ईयू को होने वाले कुल निर्यात का केवल 2.66 प्रतिशत ही प्रभावित होगा। वाणिज्य मंत्रालय ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
यूरोपीय संघ ‘सामान्यीकृत तरजीही व्यवस्था’ (जीएसपी) के तहत निर्यात प्रोत्साहन के लिए विकासशील और अल्प-विकसित देशों से होने वाले आयात पर कम या शून्य सीमा-शुल्क की सुविधा देता रहा है।
हालांकि यूरोपीय आयोग ने एक विनियमन अपनाया है जिसमें भारत एवं कुछ अन्य लाभार्थी देशों के लिए विशिष्ट शुल्क छूट को 2026-28 की अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया है।
यह विनियम औपचारिक रूप से एक जनवरी, 2026 से 31 दिसंबर, 2028 तक के लिए लागू हो गया है।
इस संदर्भ में वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि नए जीएसपी प्रावधानों के तहत कृषि उत्पादों को श्रेणी से नहीं हटाया (ग्रेजुएट) गया है, इसलिए उन्हें इस योजना के तहत शुल्क लाभ मिलते रहेंगे। वहीं गैर-कृषि क्षेत्र में केवल चमड़ा क्षेत्र को इस दायरे में फिर से शामिल किया गया है।
‘ग्रेजुएशन’ का मतलब है कि कोई उत्पाद इतना प्रतिस्पर्धी मान लिया जाए कि अब उसे शुल्क में छूट की जरूरत नहीं रह गई है। इसके बाद उसे रियायती सूची से हटा दिया जाता है।
ग्रेजुएशन की प्रक्रिया किसी देश के निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता पर आधारित होती है, जिसकी ईयू समय-समय पर समीक्षा करता है।
भारत के मामले में समय के साथ उत्पादों का रियायती दायरे से बाहर आना उसके निर्यात की बढ़ती प्रतिस्पर्धात्मकता के कारण हुआ है। भारत 12 प्रमुख उत्पाद श्रेणियों में जीएसपी की रियायती शुल्क व्यवस्था से बाहर हो चुका है।
मंत्रालय ने बताया कि शुल्क रियायत का निलंबन 13 विशिष्ट जीएसपी खंडों में किया गया है। इनमें खनिज उत्पाद, रसायन, प्लास्टिक, वस्त्र, सिरेमिक उत्पाद, कांच एवं कांच से बने उत्पाद, मोती एवं कीमती धातु, लोहा एवं इस्पात जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
वर्ष 2023 में ईयू ने भारत से कुल 62.2 अरब यूरो का आयात किया था। इसमें से केवल 12.9 अरब यूरो का आयात ईयू के मानक जीएसपी ढांचे के तहत पात्र था।
मंत्रालय ने कहा कि नए विनियमन के तहत करीब 1.66 अरब यूरो का व्यापार जीएसपी व्यवस्था से बाहर हो जाएगा, जिससे 2023 के आंकड़ों के आधार पर जीएसपी के तहत पात्र व्यापार घटकर 11.24 अरब यूरो रह जाएगा।
मंत्रालय ने कहा, ‘इस तरह नया विनियम यूरोपीय संघ को भारत के कुल निर्यात का केवल 2.66 प्रतिशत ही प्रभावित करता है।’
यूरोपीय संघ की तरफ से उठाया गया यह कदम इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि भारत और यूरोपीय संघ 27 जनवरी को मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) पर बातचीत पूरी होने की घोषणा कर सकते हैं।
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