नोएडा: भैरव नाम का कुत्ता, जिसे उत्तर प्रदेश के बिजनौर में हनुमान की मूर्ति के चारों ओर घूमते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कुछ लोगों ने “दिव्य” बताया था, असल में गंभीर रूप से बीमार था. दिल्ली-एनसीआर में उसका इलाज कर रहे वेटरिनेरियन ने यह जानकारी दी है.
वेटरिनेरियन ने कहा कि मूर्ति के चारों ओर उसका “पवित्र” घूमना आस्था की वजह से नहीं, बल्कि टिक से फैलने वाले एक बैक्टीरियल संक्रमण की वजह से था, जिसने संभवतः उसके दिमाग को प्रभावित किया था.
नोएडा में अपने शेल्टर होम में भैरव की देखभाल कर रहे हाउस ऑफ स्ट्रे एनिमल्स के संस्थापक संजय मोहापात्रा ने कहा, “अगर उसे बचाया नहीं जाता तो यह जानवर मर जाता”.
एक स्थानीय डॉग रेस्क्यू समूह ने प्रशासन की मदद से आठ महीने के भैरव को 17 जनवरी को इलाज के लिए दिल्ली लाया, जब वीडियो वायरल हो गया और यह बात फैल गई कि यह कुत्ता हिंदू देवता शिव का रूप है.
करीब चार घंटे की यात्रा के बाद भैरव को पहले दिल्ली के ईस्ट ऑफ कैलाश स्थित मैक्स वेट्स ले जाया गया और फिर मोहापात्रा के शेल्टर में भेजा गया.
इलाज के दौरान डॉक्टरों ने कुत्ते की बीमारी और व्यवहार को समझने के लिए कई जांच कीं.
वेटरिनेरियन शुभम कटियार ने दिप्रिंट को बताया कि उसके पेट के अल्ट्रासाउंड में उसकी आंतें सूजी हुई पाई गईं. उन्होंने कहा कि मंदिर में भक्तों द्वारा दिया गया खाना, जिसमें गाजर का हलवा, पूरी और अन्य चीजें शामिल थीं, ने उसके पाचन तंत्र में सूजन पैदा कर दी थी, जिससे उसे पेट से जुड़ी समस्याएं हो गईं.
स्थानीय लोगों ने दिप्रिंट को बताया कि 11 जनवरी को बिजनौर में हनुमान की मूर्ति के चारों ओर लगातार घूमते हुए दिखने के बाद स्थानीय लोगों और भक्तों ने कुत्ते का नाम भैरव, यानी शिव का एक नाम, रखा. इसके बाद उसे पास के एक मंदिर में ले जाया गया, जहां वह शिव और दुर्गा की मूर्तियों के चारों ओर घूमता हुआ दिखा.
वीडियो में कुत्ता कमजोर नजर आता है और उसकी पूंछ नीचे की ओर होती है. इस क्लिप ने डॉग प्रेमियों और वेटरिनेरियन का ध्यान खींचा. वेटरिनेरियन के अनुसार भैरव का मौजूदा वजन 14 किलो से थोड़ा ज्यादा है, जो उसकी उम्र के हिसाब से कम है.
मोहापात्रा ने दिप्रिंट से कहा, “भक्तों द्वारा दिया गया खाना उसकी सेहत को और ज्यादा खराब कर रहा था. अगर उसे नहीं बचाया जाता, तो वह मंदिर में ही सोते-सोते मर जाता”.
दिल्ली लाते समय भी भैरव की हालत स्थिर नहीं थी. कुत्ते के साथ मौजूद देखभाल करने वाले के अनुसार, यात्रा के दौरान उसे उल्टियां हो रही थीं.
खून की जांच में पता चला कि भैरव के खून में एनेप्लाज्मा नाम का संक्रमण था, जो टिक से फैलने वाला बैक्टीरियल संक्रमण है और सफेद रक्त कोशिकाओं पर हमला करता है. इसे आमतौर पर टिक फीवर कहा जाता है. इसके लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं, जैसे बुखार, सुस्ती, जोड़ों में दर्द और भूख न लगना. यह खून बहने की समस्या या दिमाग से जुड़ी बीमारियां भी पैदा कर सकता है.
कटियार ने कहा कि इस बात की काफी संभावना है कि दिमाग पर असर डालने वाले संक्रमण की वजह से ही भैरव मूर्तियों के चारों ओर घूम रहा था. उन्होंने कहा, “यह बैक्टीरिया दिमाग को प्रभावित कर सकता है और यह कुत्तों में बहुत आम है”.
भैरव शेल्टर होम में अच्छी तरह से ठीक हो रहा है. उसे अब बुखार नहीं है और वह ठीक से खाना खा रहा है. आने वाले दिनों में उसे वापस बिजनौर ले जाने की योजना है.
मोहापात्रा ने कहा, “कुत्ते को दूसरी जगह बसाना ठीक नहीं है, इसलिए हमें उसे वापस मंदिर ले जाना होगा. लेकिन हम यह सुनिश्चित करेंगे कि वहां उसकी ठीक से देखभाल हो”.
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