कटक (ओडिशा), 21 जनवरी (भाषा) ओडिशा उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह सीआरपीएफ के उस कांस्टेबल की पत्नी को अनुकंपा के आधार पर हेड कांस्टेबल के पद पर नियुक्ति दे, जो 2007 में श्रीनगर में हुए एक बम विस्फोट में स्थायी रूप से विकलांग हो गये थे और बाद में उन्हें सेवा से हटा दिया गया था।
लेखक जॉर्ज ऑरवेल का हवाला देते हुए, न्यायमूर्ति दीक्षित कृष्ण श्रीपद और न्यायमूर्ति चितरंजन दास की खंडपीठ ने टिप्पणी की, ‘‘लोग रात में अपने बिस्तरों पर सुकून से इसलिए सो पाते हैं क्योंकि कुछ साहसी लोग उनके लिए लड़ने को तैयार खड़े रहते हैं।’’
पीठ ने कहा कि सैनिक इस विश्वास के साथ देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं कि यदि उनके जीवन या शरीर को कुछ भी होता है, तो राज्य और नागरिक समाज उनके परिवारों को सहायता प्रदान करने के लिए आगे आएंगे, और यह विश्वास ‘‘डगमगाना नहीं चाहिए।’’
यह मामला सीआरपीएफ के एक कांस्टेबल से संबंधित है, जो 23 जनवरी, 2007 को श्रीनगर में ड्यूटी के दौरान आतंकवादियों द्वारा किए गए बम विस्फोट में स्थायी रूप से विकलांग हो गए थे। उन्हें सात मार्च, 2014 को चिकित्सा कारणों से घर भेज दिया गया था और बाद में 2024 में सेवा से हटा दिया गया। तब से, दंपति अनुकंपा नियुक्ति की मांग करते हुए लंबे समय से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।
यह मामला इससे पहले तीन बार – 2014, 2015 और 2020 में – उच्च न्यायालय के समक्ष आ चुका है, जिसके बाद वर्तमान अपील दायर की गई है।
आवेदकों के पक्ष में अनुकंपा नियुक्ति योजनाओं की उदारतापूर्वक व्याख्या किए जाने पर विचार करते हुए, उच्च न्यायालय ने कहा कि हेड कांस्टेबल के बजाय केवल कांस्टेबल का पद प्रस्तावित करना इस तरह के उदार दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित नहीं करता है।
उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि सीआरपीएफ जवान की पत्नी को निर्धारित समय के भीतर हेड कांस्टेबल के रूप में अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की जाए।
भाषा शफीक माधव
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