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Tuesday, 20 January, 2026
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भारत में अपार संभावनाएं मौजूद, फिलहाल वैश्विक स्तर पर विस्तार की कोई योजना नहीं : स्विगी

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(बरुण झा)

दावोस, 20 जनवरी (भाषा) खाद्य व पेय पदार्थ की आपूर्ति करने वाले ऑनलाइन मंच स्विगी के ‘फूड मार्केटप्लेस’ के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) रोहित कपूर ने कहा कि कंपनी ने अभी तक भारत में 85-90 प्रतिशत बाजार का दोहन नहीं किया है और घरेलू बाजार में मौजूद अपार संभावनाओं को देखते हुए, अभी वैश्विक विस्तार की कोई योजना नहीं है।

विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की वार्षिक बैठक से इतर ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ बातचीत में कपूर ने कहा कि भारत में अब भी बदलाव की काफी संभावनाएं हैं और फिलहाल वैश्विक विस्तार की कोई योजना नहीं है।

उन्होंने कहा कि अवसर न केवल खाद्य क्षेत्र में हैं बल्कि देश भर के कई अन्य व्यवसायों में भी मौजूद हैं।

कपूर ने कहा, ‘‘ खास तौर पर खाद्य क्षेत्र में, हम सालाना 18-20 प्रतिशत की वृद्धि का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। मुझे लगता है कि पिछले तिमाही के आंकड़ों में भी ये रुझान दिखते हैं।’’

उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत में खाद्य पदार्थों की पहुंच का स्तर न केवल पश्चिमी देशों से बल्कि कुछ दक्षिण-पूर्वी एशियाई तथा एशियाई देशों से भी काफी कम है जिससे वृद्धि की अपार संभावनाएं उत्पन्न होती हैं।

कपूर ने कहा, ‘‘ मुझे लगता है कि यहां जो काम करना है, वह केवल खाद्य आपूर्ति को बढ़ाना नहीं है बल्कि पूरे खाद्य क्षेत्र में वृद्धि की काफी संभावना है जिसके लिए पूरे क्षेत्र और सरकार को मिलकर काम करना होगा।’’

भारत में ऐसे बाजार के आकार के बारे में पूछे जाने पर, जहां अभी तक पहुंच नहीं बनाई गई, उन्होंने कहा कि संभवतः भारत की लगभग 10-12 प्रतिशत आबादी ने कभी खाद्य आपूर्ति का उपयोग किया है जिसका मतलब है कि 85-90 प्रतिशत ने नहीं किया है।

उन्होंने कहा, ‘‘ फिर हमारे पास उभरता हुआ उपभोक्ता वर्ग है जो जल्द ही बाजार में शामिल होगा।’’

रोहित कपूर ने साथ ही कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) कंपनी शीर्ष प्रबंधन से लेकर ‘डिलीवरी पार्टनर’ और रेस्तरां तक ​​सभी हितधारकों को व्यवसाय के बारे में हर तरह की समझ मुहैया करा रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘ मिसाल के तौर पर कोई ग्राहक सेवा को ‘फोन’ करता है और मेरे पास जेन एआई के माध्यम से उस बातचीत की गुणवत्ता को समझने की क्षमता है और मैं तुरंत उस पर कार्रवाई कर सकता हूं। जेन एआई की यही शक्ति है।’’

कपूर ने कहा, ‘‘ सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह कई चीजों का सुलभ बना रहा है। यह रेस्तरां साझेदार को बता रहा है कि कल क्या हुआ, कौन से व्यंजन बिके, कौन से नहीं। यह हमारे ‘डिलीवरी पार्टनर’ को यह समझने में मदद करता है कि अधिकतम ऑर्डर प्राप्त करने के लिए कहां जाना है और इससे हमारे नेतृत्व को यह समझने में मदद मिलती है कि कल व्यवसाय में क्या हुआ।’’

स्विगी के सीईओ ने भारत में ‘डिलीवरी पार्टनर’ की बड़ी संख्या को रोजगार बाजार का ‘‘तीसरा स्तंभ’’ करार देते हुए कहा कि उनके काम को ‘गिग वर्क’ के बजाय ‘फ्लेक्सिबल एम्प्लॉयमेंट’ के रूप में देखा जाना चाहिए।

कपूर ने कहा, ‘‘ ‘गिग’ सुनने में थोड़ा ‘‘आकर्षक’’ शब्द लगता है, लेकिन असलियत में यह ‘फ्लेक्सिबल एम्प्लॉयमेंट’ (लचीला रोजगार) है। मैं इसे सचमुच रोजगार बाजार का तीसरा स्तंभ मानता हूं।’’

‘डिलीवरी पार्टनर’, ‘फ्रीलांसर’ आदि जैसे अस्थायी कामगार ‘गिग वर्कर’ की श्रेणी में आते हैं।

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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