पिथौरागढ़, 18 जनवरी (भाषा) उत्तराखंड सरकार ने आवारा पशुओं को सड़कों और खेतों से हटाने के लिए दो योजनाएं शुरू की हैं जिनके तहत इन मवेशियों को आश्रय देने वाले लोग हर माह 12 हजार रुपये तक कमा सकते हैं। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों के मुताबिक, पशुपालन विभाग की ये योजनाएं केवल ग्रामीण क्षेत्रों के लिए हैं।
पिथौरागढ़ के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (सीवीओ) डॉ. योगेश शर्मा ने बताया कि इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य निराश्रित घूम रहे मवेशियों को आश्रय, भोजन और स्वास्थ्य देखभाल उपलब्ध कराने के साथ ही उनसे फसलों को बचाना भी है।
उन्होंने बताया कि ग्राम गौर सेवक योजना के अंतर्गत अधिकतम पांच नर आवारा पशुओं को पालने वाले को 80 रु प्रति पशु के हिसाब से पैसे दिए जाएंगे जबकि उन पशुओं को निशुल्क स्वास्थ्य देखभाल भी उपलब्ध करायी जाएगी।
इस प्रकार, पांच नर आवारा पशुओं को रखने वालों को पशुपालन विभाग 12 हजार रुपये प्रतिमाह देगा। उन्होंने बताया कि जिले में अभी इस योजना का लाभ छह व्यक्ति उठा रहे हैं।
शर्मा ने बताया कि दूसरी योजना ‘गौशाला योजना’ के नाम से शुरू की गयी है जिसमें कोई व्यक्ति अपने गौसदन में किसी भी संख्या में निराश्रित पशुओं को रख सकता है जिसके लिए उसे 80 रु प्रति पशु के हिसाब से भुगतान किया जाएगा।
उन्होंने बताया, “जिले के मुनस्यारी और बारावे में दो गौशालाएं चल रही हैं जिनमें कुल 225 निराश्रित पशुओं को आश्रय और भोजन मिल रहा है।”
भाषा सं दीप्ति नोमान
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