नयी दिल्ली, 16 जनवरी (भाषा) अमेरिका के ट्रंप प्रशासन द्वारा तेहरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी के मद्देनजर भारत, ईरान में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चाबहार बंदरगाह के विकास में अपनी भागीदारी के संबंध में विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रहा है।
ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में चाबहार बंदरगाह के विकास में भारत एक प्रमुख भागीदार है।
अमेरिका ने पिछले साल सितंबर में ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे, लेकिन चाबहार बंदरगाह परियोजना पर भारत को छह महीने की छूट दी थी। यह छूट 26 अप्रैल को समाप्त हो जाएगी।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को कहा कि भारत इस मुद्दे पर अमेरिका के साथ बातचीत कर रहा है।
ईरान के साथ व्यापारिक संबंध रखने वाले देशों पर अमेरिका द्वारा लगाए गए नये टैरिफ के मद्देनजर इस समझौते से भारत के हटने की अटकलों के बीच एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने यह टिप्पणी की।
जायसवाल ने कहा, ‘‘जैसा कि आप जानते हैं, 28 अक्टूबर को अमेरिकी वित्त विभाग ने एक पत्र जारी कर 26 अप्रैल, 2026 तक वैध सशर्त प्रतिबंध छूट के संबंध में दिशा-निर्देश दिए थे। हम इस व्यवस्था को अंतिम रूप देने के लिए अमेरिकी पक्ष के साथ बातचीत कर रहे हैं।’’
जायसवाल ने ईरान के साथ भारत के दीर्घकालिक संबंधों का भी जिक्र किया और कहा कि नई दिल्ली, तेहरान में चल रही स्थिति पर बारीकी से नजर रख रही है।
ईरान में सरकार-विरोधी व्यापक प्रदर्शन हो रहे हैं जिनमें 2,500 से अधिक लोग मारे गए हैं।
मामले के जानकार सूत्रों के अनुसार, भारत चाबहार बंदरगाह परियोजना में अपनी प्रत्यक्ष हिस्सेदारी समाप्त करने के उद्देश्य से लगभग 12 करोड़ अमेरिकी डॉलर हस्तांतरित करने की प्रक्रिया में है।
उन्होंने बताया कि चाबहार बंदरगाह के विकास को आगे बढ़ाने के लिए एक नई संस्था बनाने की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, इस विकल्प से परियोजना में भारतीय सरकार की हिस्सेदारी खत्म हो जाएगी, लेकिन एक तरह से इससे नई दिल्ली का समर्थन जारी रहेगा।
पिछले साल सितंबर में ट्रंप प्रशासन ने ईरान के चाबहार बंदरगाह के संबंध में 2018 में दी गई प्रतिबंध छूट को रद्द करने का फैसला सुनाया था।
जायसवाल ने यह भी कहा कि तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ईरान में रहने वाले भारतीयों के संपर्क में है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम वहां की स्थिति पर कड़ी नजर रख रहे हैं और जहां तक हमारे नागरिकों का सवाल है, हम उनकी भलाई के लिए हरसंभव प्रयास करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’’
उन्होंने आगे कहा, ‘‘हमारे लगभग 9,000 नागरिक वर्तमान में ईरान में रह रहे हैं। इनमें से अधिकतर छात्र हैं।’’
भाषा सुरेश माधव
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