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Friday, 16 January, 2026
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सुक्खू ने पीएम ई-बस योजना में पहाड़ी राज्यों के लिए विशेष छूट की मांग की

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शिमला, 16 जनवरी (भाषा) हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने नयी दिल्ली में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल से शुक्रवार को मुलाकात की और प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत पहाड़ी राज्यों के लिए विशेष छूट देने का आग्रह किया।

मुख्यमंत्री ने आवासन और शहरी कार्य मंत्री को यह भी बताया कि इस योजना के मौजूदा मानदंडों के तहत पहाड़ी राज्यों को कोई विशेष छूट नहीं दी गई है, जिससे हिमाचल प्रदेश योजना का पूरा लाभ नहीं उठा पा रहा है, जबकि राज्य हरित और टिकाऊ परिवहन के प्रति प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान नियमों के अनुसार केवल शिमला ही योजना के दायरे में आता है, क्योंकि यह योजना 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों पर लागू होती है।

सुक्खू ने कहा कि धर्मशाला, मंडी, सोलन, पालमपुर, हमीरपुर, ऊना और बद्दी जैसे राज्य के कई शहरी स्थानीय निकाय तेजी से आर्थिक गतिविधियों और मानव संसाधन विकास के प्रमुख केंद्र बन रहे हैं।

उन्होंने अनुरोध किया कि जनसंख्या मानदंड में उपयुक्त छूट दी जाए, ताकि हिमाचल प्रदेश योजना का व्यापक लाभ ले सके।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार वायु और ध्वनि प्रदूषण को कम करने के लिए उपयुक्त मार्गों पर डीजल बसों को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक बसों से बदलने का लक्ष्य रखती है।

उन्होंने बताया कि सरकार 1,500 डीजल बसों को इलेक्ट्रिक बसों से बदलने का संकल्प ले चुकी है।

पहाड़ी क्षेत्रों में परिचालन चुनौतियों का हवाला देते हुए सुक्खू ने केंद्रीय मंत्री से अनुरोध किया कि हिमाचल प्रदेश में हर बस के लिए प्रतिदिन तय की जाने वाली दूरी को 150 किलोमीटर कर दिया जाए, ताकि लक्ष्य वास्तविक और पूरा करना संभव हो सके।

उन्होंने पहाड़ी राज्यों के लिए वर्तमान परिचालन सहायता राशि 22 रुपये प्रति किलोमीटर से बढ़ाकर 52 रुपये प्रति किलोमीटर करने का भी आग्रह किया, जिससे राज्य परिवहन उपक्रम इलेक्ट्रिक बसों का संचालन बिना घाटे के कर सकें।

इसके अलावा, उन्होंने हिमाचल प्रदेश विद्युत निगम लिमिटेड (एचपीपीसीएल) के ‘एकीकृत कार्यालय’ के लिए सुंदरनगर में 47 बीघा अतिरिक्त खाली भूमि के हस्तांतरण और आवंटन हेतु भाखड़ा ब्यास प्रबन्ध बोर्ड (बीबीएमबी) से अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने का आग्रह किया, ताकि एचपीपीसीएल का संचालन सुगमता से हो सके।

सुक्खू ने यह भी सुझाव दिया कि पूंजीगत सहायता को वास्तविक दूरी के आधार पर जोड़ा जाए, जिससे बेहतर प्रदर्शन को प्रोत्साहन मिले और समान प्रतिपूर्ति सुनिश्चित हो सके।

भाषा खारी पवनेश

पवनेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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