धार (मप्र), 16 जनवरी (भाषा) मध्यप्रदेश के धार जिले में स्थित विवादित भोजशाला–कमाल मौला मस्जिद में 23 जनवरी को शुक्रवार और बसंत पंचमी एक ही दिन पड़ने के कारण हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच पूजा एवं नमाज को लेकर असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के आदेश के अनुसार भोजशाला में हिंदू समुदाय को हर मंगलवार को पूजा का अधिकार है, जबकि मुस्लिम समुदाय शुक्रवार को कमाल मौला मस्जिद में नमाज अदा करता है।
हिंदू पक्ष की ओर से भोज उत्सव समिति ने 23 जनवरी को बसंत पंचमी के अवसर पर पूरे दिन पूजा की अनुमति मांगी है। वहीं, मुस्लिम समुदाय ने उस दिन दोपहर एक बजे से तीन बजे तक शुक्रवार की नमाज अदा करने की अनुमति के लिए प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है।
इस बीच, प्रशासन ने इस विवादित स्थल पर किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए तैयारियों की समीक्षा की है।
कमाल मौला मस्जिद की नमाज इंतजामिया समिति के सदस्य जुल्फिकार पठान ने संवाददाताओं से कहा कि नमाज मुस्लिम समुदाय का संवैधानिक अधिकार है।
उन्होंने कहा, “आज यहां नमाज अदा की गई है और जिस तरह आज नमाज हुई है, उसी तरह आगे भी होती रहेगी।”
पठान ने दावा किया कि 1935 में इसे कमाल मौला मस्जिद घोषित किया गया था और यह भविष्य में भी कमाल मौला मस्जिद ही रहेगी।
उन्होंने कहा कि हाल में हुई शांति समिति की बैठक में जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार के आदेश का पालन किया जाएगा।
जब उनसे पूछा गया कि क्या बसंत पंचमी के कारण उस जगह पर शुक्रवार की नमाज़ की परंपरा को ‘त्यागा’ जा सकता है, तो पठान ने कहा, ‘मुस्लिम समुदाय शहर की शांति के लिए त्याग करने को तैयार है। आप देख सकते हैं कि अभी कितने मुसलमान नमाज़ पढ़ रहे हैं। हम शहर की शांति के लिए यह संख्या कम कर सकते हैं।’
यह पूछे जाने पर कि क्या समुदाय किसी दूसरी मस्जिद में नमाज़ पढ़ने को तैयार है, पठान ने कहा कि शुक्रवार की नमाज़ सिर्फ़ कमाल मौला मस्जिद में ही होती है।
पठान ने कहा, “यहां पिछले 800 वर्षों से लगातार नमाज होती रही है और कभी कोई व्यवधान नहीं आया है। हम भी चाहते हैं कि शहर में शांति बनी रहे।”
उधर, भोज उत्सव समिति के संरक्षक अशोक जैन ने कहा कि बसंत पंचमी पर सूर्योदय से ‘अखंड पूजा’ आयोजित करना है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इसकी अनुमति नहीं दी गई तो समिति विरोध करेगी।
भाषा सं दिमो राजकुमार
राजकुमार
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