नयी दिल्ली, 16 जनवरी (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक असामान्य कदम उठाते हुए उच्चतम न्यायालय में अर्जी दाखिल कर अपनी उस याचिका में केंद्रीय गृह मंत्रालय और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) को भी पक्षकार बनाने का अनुरोध किया है, जिसमें पश्चिम बंगाल सरकार एवं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर कोयला ‘घोटाले’ की जांच के सिलसिले में राजनीतिक परामर्श फर्म ‘आई-पैक’ के खिलाफ एजेंसी की छापेमारी में दखल देने व बाधा डालने का आरोप लगाया गया है।
ईडी ने अपनी अर्जी में “प्रस्तावित प्रतिवादियों सात, आठ और नौ” को वर्तमान आपराधिक रिट याचिका में प्रतिवादी के रूप में शामिल करने का अनुरोध किया है। उसने दलील दी है कि ऐसा न करने पर एजेंसी को “अपूरणीय हानि और नुकसान” का सामना करना पड़ेगा।
ईडी यह अर्जी इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि एजेंसी उन रिपोर्ट की प्रामाणिकता की जांच कर रही है, जिनमें कहा गया है कि आई-पैक के कार्यालय पर छापेमारी के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती भी ममता के साथ वहां पहुंची थीं।
अर्जी के मुताबिक, डीओपीटी और गृह मंत्रालय अपने-अपने सचिव के माध्यम से प्रतिवादी संख्या सात और आठ हैं, जबिक पश्चिम बंगाल राज्य अपने मुख्य सचिव के माध्यम से प्रतिवादी संख्या नौ है।
ईडी ने अर्जी में कहा है, “याचिकाकर्ता ने एक आवेदन दायर कर प्रस्तावित प्रतिवादियों को निर्देश जारी करने का अनुरोध किया है कि प्रतिवादी संख्या 3-5 और अन्य पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच/गंभीर दंड की कार्यवाही शुरू की जाए तथा उन्हें निलंबित किया जाए।”
याचिका में पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कुमार प्रतिवादी संख्या तीन, कोलकाता के पुलिस आयुक्त मनोज वर्मा को प्रतिवादी संख्या चार और दक्षिण कोलकाता के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) प्रियब्रत रॉय को प्रतिवादी संख्या पांच बनाया गया है।
ईडी ने अपनी अर्जी में कहा कि प्रतिवादी सात, आठ और नौ मौजूदा मामले में दोषी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने के लिए आवश्यक पक्षकार हैं, जो आठ जनवरी को ईडी की तलाशी में कथित तौर पर बाधा डालने में शामिल थे।
शीर्ष अदालत ने बृहस्पतिवार को कहा था कि ईडी की जांच में मुख्यमंत्री का कथित तौर पर “बाधा डालना बहुत गंभीर” है।
न्यायालय ने इस बात पर विचार करने की सहमति जताई थी कि क्या किसी राज्य की कानून प्रवर्तन एजेंसियां किसी गंभीर अपराध के मामले में केंद्रीय एजेंसी की जांच में हस्तक्षेप कर सकती हैं।
शीर्ष अदालत ने पश्चिम बंगाल में उन ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी पर भी रोक लगा दी थी, जिन्होंने कथित कोयला घोटाले की जांच के सिलसिले में आठ जनवरी को ‘इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी’ (आई-पैक) के कार्यालय और इसके निदेशक प्रतीक जैन के आवास पर तलाशी ली थी।
न्यायालय ने राज्य पुलिस को छापेमारी की कार्रवाई से जुड़े सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया था।
न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ ने ईडी की उन याचिकाओं पर ममता, पश्चिम बंगाल सरकार, डीजीपी कुमार और राज्य के अन्य शीर्ष पुलिस अधिकारियों को नोटिस जारी किया था, जिनमें आई-पैक से जुड़े परिसरों में छापेमारी में बाधा डालने के आरोप में उनके खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने का अनुरोध किया गया है।
शीर्ष अदालत में ईडी की यह याचिका आठ जनवरी की उन घटनाओं के बाद दायर की गई है, जब कोयला तस्करी मामले से जुड़ी जांच के सिलसिले में साल्टलेक स्थित आई-पैक कार्यालय और कोलकाता में इसके प्रमुख प्रतीक जैन के आवास पर ईडी के छापों के दौरान जांच एजेंसी के अधिकारियों को बाधाओं का सामना करना पड़ा था।
जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि ममता परिसर में दाखिल हुईं और जांच से जुड़े “अहम” साक्ष्य अपने साथ ले गईं।
वहीं, ममता ने केंद्रीय एजेंसी पर अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने का आरोप लगाया है, जबकि उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने ईडी की जांच में “बाधा डालने” के आरोप से इनकार किया है। राज्य पुलिस ने ईडी अधिकारियों के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की है।
भाषा पारुल पवनेश
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