मुंबई, 15 जनवरी (भाषा) बाजार नियामक सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने बृहस्पतिवार को कहा कि सेबा ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) की तरफ से दायर निपटान अर्जी पर ‘सैद्धांतिक रूप से’ सहमति दे दी है।
यह कदम देश के सबसे बड़े शेयर बाजार एनएसई के विलंबित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) का रास्ता साफ कर सकता है।
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के प्रमुख ने बताया कि सरकार ने बड़े मूल्यांकन वाली कंपनियों को आईपीओ में 2.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की अनुमति देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
हालांकि, उन्होंने गैर-सूचीबद्ध बाजार में एनएसई के शेयरों को लेकर बढ़ती दिलचस्पी पर टिप्पणी करने से परहेज करते हुए कहा कि यह मामला कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के दायरे में आता है।
सेबी प्रमुख ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि एनएसई की तरफ से दायर निपटान अर्जी सेबी की विभिन्न समितियों के समक्ष प्रक्रिया से गुजर रही है लेकिन नियामक सैद्धांतिक रूप से इससे सहमत है।
को-लोकेशन मामले में चुनिंदा ब्रोकरों को कथित तौर पर अनुचित बाजार पहुंच दिए जाने के आरोपों के कारण एनएसई का आईपीओ प्रस्ताव 2016 से ही अटका हुआ है।
लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद एनएसई ने पिछले साल 1,388 करोड़ रुपये का भुगतान कर यह मामला निपटाने का प्रस्ताव सेबी के समक्ष रखा था।
सेबी से मामले में अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) मिलने के बाद एनएसई आईपीओ की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकेगा।
एनएसई के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी आशीष कुमार चौहान ने कहा कि निपटान पर सेबी की सैद्धांतिक सहमति एक ‘अच्छी खबर’ है, लेकिन आधिकारिक सूचना मिलने के बाद ही निर्गम का मसौदा दस्तावेज दाखिल करने की तैयारी शुरू की जाएगी।
चौहान ने अनुमान जताया कि एनओसी मिलने के सात-आठ महीने बाद एनएसई का आईपीओ बाजार में आ सकता है।
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