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Thursday, 15 January, 2026
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भारत की कई परंपराओं की एकता का उत्सव है काशी तमिल संगमम: प्रधानमंत्री मोदी

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नयी दिल्ली, 15 जनवरी (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि काशी-तमिल संगमम सच में एक खास पहल है, जो भारत की कई परंपराओं की जीवंत एकता का उत्सव मनाती है और उनकी विशिष्ट पहचान का सम्मान करती है।

मोदी ने अपने हस्ताक्षर वाले एक आलेख में यह भी कहा कि काशी तमिल संगमम ने सांस्कृतिक समझ को मजबूत करने, अकादमिक और लोगों के बीच आदान-प्रदान को बढ़ावा देने तथा सभ्यतागत लोकाचार साझा करने वाले देश के हिस्सों के बीच दीर्घकालिक संबंध बनाने जैसे सार्थक परिणाम दिए हैं।

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में, राजग सरकार को पूरे भारत में तमिल संस्कृति को और लोकप्रिय बनाने और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को और गहरा करने के कई मौके मिले हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसे ही एक प्रयास का बड़ा उदाहरण काशी-तमिल संगमम है।

मोदी ने कहा कि भारतीय लोकाचार में संगम या मेलजोल की एक खास जगह है और इस नजरिए से, काशी-तमिल संगमम वाकई एक खास पहल है, जो भारत की कई परंपराओं की जीवंत एकता का जश्न मनाती है और उनकी खास पहचान का सम्मान करती है।

उन्होंने कहा, ‘‘और ऐसे संगमम के आयोजन के लिए काशी से बेहतर जगह और क्या हो सकती है। वही काशी, जो पुरातन काल से सभ्यता का आधार रही है, जहां हजारों सालों से, दुनिया भर से लोग ज्ञान, अर्थ और मोक्ष की तलाश में आते रहे हैं।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि काशी का तमिल लोगों और संस्कृति से बहुत गहरा जुड़ाव है और काशी में ही बाबा विश्वनाथ रहते हैं, जबकि तमिलनाडु में रामेश्वरम है।

उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में तेनकासी को दक्षिण की काशी के नाम से जाना जाता है और संत कुमारगुरुपरार स्वामीगल ने अपनी आध्यात्मिकता, विद्वता और संस्था निर्माण से काशी और तमिलनाडु के बीच एक स्थायी संबंध जोड़ा।

मोदी ने कहा कि तमिलनाडु के सबसे महान सपूतों में से एक, महाकवि सुब्रमण्यम भारती को काशी में बौद्धिक विकास और आध्यात्मिक जागृति की जगह मिली।

उन्होंने कहा, ‘‘यहीं पर उनका राष्ट्रवाद गहरा हुआ, उनकी कविता तीक्ष्ण हुई और एक आजाद, संगठित भारत का उनका नजरिया और साफ हुआ। ऐसे कई उदाहरण हैं जो इस करीबी रिश्ते को दर्शाते हैं।’’

काशी-तमिल संगमम का पहला संस्करण 2022 में वाराणसी (काशी) में आयोजित हुआ था। यह आयोजन मुख्य रूप से काशी में हुआ था और कुछ कार्यक्रम तमिलनाडु के रामेश्वरम में भी हुए थे।

प्रधानमंत्री ने काशी-तमिल संगमम के उद्घाटन कार्यक्रम को याद किया, जहां तमिलनाडु के विद्वान, कारीगर, छात्र, किसान, लेखक, विभिन्न पेशों से जुड़े लोग काशी, प्रयागराज और अयोध्या आए थे।

उन्होंने कहा कि इसके बाद के आयोजनों ने इस प्रयास के स्तर और गहराई का विस्तार किया और इसका मकसद नई थीम, नए प्रारूप और गहरा जुड़ाव लाना था, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि संगमम अपनी मूल भावना में बने रहते हुए लगातार विकसित होता रहे।

मोदी ने कहा, ‘‘आने वाले समय में, हम इस मंच को और भी जीवंत बनाना चाहते हैं। सबसे जरूरी बात यह है कि इसने ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को आगे बढ़ाया है। यह भावना सदियों से हमारे त्योहारों, साहित्य, संगीत, कला, खानपान, वास्तुशिल्प, ज्ञान प्रणाली और भी बहुत कुछ के जरिए फली-फूली है।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ दिन पहले, वह गुजरात के सोमनाथ मंदिर में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में शामिल होने गए थे। एक हजार साल पहले इस मंदिर पर हमला हुआ था।

उन्होंने कहा कि पूरे भारत से लोग इस यादगार पल का हिस्सा बनने आए थे और इतिहास, संस्कृति तथा भारत के लोगों की चिरस्थायी भावना के लिए एक समान श्रद्धा के साथ एकजुट थे।

मोदी ने कहा कि उस कार्यक्रम में वह कुछ ऐसे लोगों से मिले जो पूर्व में सौराष्ट्र-तमिल संगमम के दौरान सोमनाथ आए थे और काशी-तमिल संगमम के दौरान काशी भी पहुंचे थे।

उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे मंचों के लिए उनकी प्रशंसा के शब्दों ने मुझे भाव विभोर कर दिया और इसलिए, मैंने इस विषय पर कुछ विचार साझा करने के बारे में सोचा।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके एक ‘मन की बात’ कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि तमिल न सीख पाना उनके जीवन का एक बड़ा अफसोस है।

उन्होंने कहा कि 2023 में संगमम के दूसरे संस्करण में प्रौद्योगिकी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया ताकि भाषा लोगों के लिए अवरोध नहीं बने। तीसरे संस्करण में, भारतीय ज्ञान प्रणाली पर ध्यान केंद्रित किया गया।

मोदी ने कहा कि साथ ही, अकादमिक परिचर्चा, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, प्रदर्शनियों और संवाद में भी बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि इन आयोजनों में हजारों लोगों ने हिस्सा लिया है।

प्रधानमंत्री ने लिखा कि काशी तमिल संगमम का चौथा संस्करण 2 दिसंबर, 2025 को शुरू हुआ। इसके लिए चुनी गई थीम बहुत दिलचस्प थी- ‘तमिल करकलम’ यानी तमिल सीखें। इसने काशी और दूसरे हिस्सों के लोगों को खूबसूरत तमिल भाषा सीखने का एक अनोखा मौका दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि शिक्षक तमिलनाडु से आए थे और काशी के विद्यार्थियों का अनुभव बहुत यादगार रहा।

उन्होंने कहा, ‘‘इस बार कई और खास आयोजन भी हुए। पुरानी तमिल साहित्यिक कृति थोलकाप्पियम का चार भारतीय भाषाओं और छह विदेशी भाषाओं में अनुवाद किया गया।’’

मोदी ने कहा कि काशी-तमिल संगमम के बारे में उन्हें सबसे ज़्यादा खुशी इस बात से हुई कि इसमें हज़ारों युवाओं ने हिस्सा लिया।

उन्होंने कहा कि संगमम के अलावा, प्रतिभागियों के लिए काशी की यात्रा को यादगार बनाने की कोशिश की गई है। मोदी ने कहा कि भारतीय रेलवे ने तमिलनाडु से लोगों को उत्तर प्रदेश पहुंचाने के लिए विशेष ट्रेनें चलाईं और कई रेलवे स्टेशनों पर, खासकर तमिलनाडु में, उनका उत्साहवर्धन किया गया, और ट्रेन का सफर मधुर गानों और बातचीत से भरा रहा।

उन्होंने कहा, ‘‘यहां, मैं काशी और उत्तर प्रदेश के अपने बहनों और भाइयों की भी तारीफ करना चाहूंगा कि उन्होंने अलग-अलग काशी-तमिल संगमम के प्रतिनिधियों का गर्मजोशी से स्वागत किया और उनकी मेहमाननवाज़ी की।’’

प्रधानमंत्री के अनुसार, ‘‘कई लोगों ने तमिलनाडु के मेहमानों के लिए अपने घरों के दरवाजे खोल दिए। स्थानीय प्रशासन ने मेहमानों की सुगमता के लिए चौबीसों घंटे काम किया। वाराणसी से सांसद होने के नाते, मेरे लिए इससे ज़्यादा गर्व की बात और नहीं हो सकती!’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि साल का यह समय पूरे भारत में लोगों के लिए बहुत शुभ होता है क्योंकि वे उत्साह से संक्रांति, उत्तरायण, पोंगल, माघ बिहू जैसे कई त्योहार मना रहे हैं, जो सूर्य, प्रकृति और खेती से जुड़े हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘ये त्योहार लोगों को एक साथ लाते हैं और हमारे समाज में मेलजोल की भावना को गहरा करते हैं। मैं इन त्योहारों के लिए अपनी शुभकामनाएं देता हूं और उम्मीद करता हूं कि ये हमें हमारी साझी विरासत और सामूहिक भागीदारी के ज़रिए राष्ट्रीय एकता को गहरा करने के लिए प्रेरित करते रहेंगे।’’

भाषा वैभव मनीषा

मनीषा

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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