मुंबई, 14 जनवरी (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के भीतर ग्राहकों की शिकायतों के समाधान व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बैंकों और एनबीएफसी में आंतरिक लोकपाल की नियुक्ति और कामकाज के लिए दिशानिर्देश जारी किए।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वाणिज्यिक बैंकों, लघु वित्त बैंकों, भुगतान बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी), गैर-बैंक प्रीपेड भुगतान उपकरण जारीकर्ताओं और क्रेडिट सूचना कंपनियों के लिए अलग-अलग निर्देश जारी किए हैं।
आरबीआई ने कहा कि ये निर्देश विनियमित संस्थाओं (बैंक, एनबीएफसी आदि) के भीतर आंतरिक शिकायत समाधान व्यवस्था को मजबूत करने और संस्थाओं के भीतर एक शीर्ष स्तर के प्राधिकरण द्वारा ग्राहकों की शिकायतों का तेजी से समाधान करने के लिए जारी किए गए हैं।
आंतरिक लोकपाल (आईओ) या तो सेवानिवृत्त या सेवारत अधिकारी होना चाहिए, जिसका पद विनियमित संस्था में महाप्रबंधक के समकक्ष हो। उसके पास बैंकिंग, गैर-बैंकिंग वित्त, विनियमन, पर्यवेक्षण, भुगतान और निपटान प्रणाली, ऋण सूचना या उपभोक्ता संरक्षण जैसे क्षेत्रों में काम करने का कम से कम सात वर्षों का अनुभव होना चाहिए।
आरबीआई ने कहा कि प्रत्येक विनियमित संस्था को कम से कम एक आंतरिक लोकपाल नियुक्त करना चाहिए।
इसमें कहा गया कि आंतरिक लोकपाल का कार्यालय सीधे शिकायतकर्ताओं या जनता के सदस्यों से प्राप्त शिकायतों को नहीं संभालेगा। उसे उन शिकायतों पर कार्रवाई करनी चाहिए, जिनकी विनियमित संस्था पहले ही जांच कर चुकी है।
भाषा पाण्डेय रमण
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