चंडीगढ़: चार महीने पहले विनायक अपने घर बिल्कुल नई काली टाटा सफारी लेकर आए. इसकी कीमत करीब 30 लाख रुपये थी, पिछले दो साल की उनकी पूरी बचत, लेकिन यह एसयूवी मुश्किल से ही घर के बाहर निकली. वजह न तो कागज़ी कार्रवाई थी और न ही कोई एक्सेसरी बाकी थी. विनायक बस सही नंबर प्लेट का इंतज़ार कर रहे थे. वह किसी आम नंबर से संतुष्ट नहीं हैं. उन्हें चाहिए सिर्फ और सिर्फ एक वीआईपी नंबर.
वह वीआईपी रजिस्ट्रेशन नंबरों की नीलामी का इंतज़ार कर रहे थे, जिसकी आवेदन प्रक्रिया अब पूरी हो चुकी है. विनायक आने वाली सीरीज़ पर लगातार नज़र बनाए हुए हैं. वे कम से कम चार एजेंटों के संपर्क में हैं, जो उन्हें भरोसा दिला रहे हैं कि उनकी पसंद का नंबर मिल जाएगा.
विनायक ने कहा, “गाड़ी लेने से पहले मैंने नंबर तय कर लिया था.” उनकी पसंद है 0700—एक ऐसा नंबर, जिसकी बेस रजिस्ट्रेशन कीमत 20,000 रुपये है.”
चंडीगढ़ में किसी रैंडम रजिस्ट्रेशन नंबर के लिए आमतौर पर 2,000 से 5,000 रुपये तक खर्च आता है.
विनायक ने कहा, “यह सीरीज़ महंगी रहने वाली है. मैं इसके लिए 4 से 5 लाख रुपये तक की बोली लगाने को तैयार हूं.” उन्होंने बताया कि उन्होंने पहले से ही पांच लाख रुपये अलग रखे हैं. उन्होंने कहा, “अगर ज़रूरत पड़ी तो पापा से और पैसे मांग लूंगा, लेकिन मुझे वही नंबर चाहिए.”
नई डीसी सीरीज़ के तहत चंडीगढ़ की ताज़ा नीलामी इस बात का संकेत है कि भारत में यूनिक और खास नंबर प्लेट्स को लेकर लोगों का जुनून किस हद तक बढ़ चुका है. लोग अपनी गाड़ी के ज़रिए एक स्टेटमेंट देना चाहते हैं, लोगों की जिज्ञासा पैदा करना चाहते हैं. हरियाणा से लेकर तेलंगाना और बिहार तक, खरीदार वीआईपी सीरीज़ से जुड़े रुतबे के पीछे भाग रहे हैं और परिवहन विभागों के लिए भी यह अब एक गंभीर और मुनाफे का काम बन चुका है.
दिसंबर में हरियाणा सरकार ने ऐसे बोली लगाने वालों पर सख्ती बढ़ा दी थी, जब एक कार मालिक एक करोड़ रुपये की नंबर प्लेट की बोली जीतने के बावजूद तय रकम जमा नहीं कर पाया. प्रशासन के लिए यह दीवानगी अब आसान कमाई का ज़रिया बन गई है. अकेले चंडीगढ़ के रजिस्ट्रिंग एंड लाइसेंसिंग अथॉरिटी ने पिछले पांच सालों में नंबर प्लेट की नीलामी से 1,200 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई की है.

आकर्षक और खास नंबर
आकर्षक और खास नंबर लेने की वजह हर व्यक्ति के लिए अलग होती है. किसी के लिए यह शौक है, तो किसी के लिए स्टेटस और प्रतीक का सवाल. कुछ लोग इन नंबर प्लेट्स के ज़रिए रौब और डर का एहसास पैदा करना चाहते हैं. कुछ लोग इन्हें किस्मत से भी जोड़कर देखते हैं. यही वजह है कि ऐसे नंबर प्लेट्स की नीलामी से होने वाली सालाना कमाई लगातार बढ़ती जा रही है.
अमीर खरीदार अक्सर अपनी कार की कीमत का 10 प्रतिशत से भी ज्यादा सिर्फ लग्ज़री नंबर प्लेट पर खर्च कर देते हैं. चंडीगढ़ की नीलामियों में खास तौर पर ऊंची बोलियां देखने को मिलती हैं. इसके पीछे जुनून, रुतबा और प्रतिस्पर्धा का अनोखा मेल है.
चंडीगढ़ के रजिस्ट्रिंग एंड लाइसेंसिंग ऑफिसर संजीव कोहली ने बताया, “फैंसी नंबर प्लेटफॉर्म पर अब तक की सबसे ज्यादा भागीदारी देखने को मिली है, क्योंकि डिजिटल बोली सिस्टम में किसी भी तरह की मनमानी की गुंजाइश नहीं रहती. साल 2013 में ऑफलाइन नीलामी हुई थी, तब सेटिंग की संभावना रहती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है. लोग इस प्रक्रिया पर भरोसा करते हैं और यही भरोसा आज दिख रहे बड़े रेवेन्यू की वजह है. यह हमारे लिए भी अच्छा है. प्रक्रिया आसान हो गई है और ज्यादा से ज्यादा लोग अपनी पसंद का नंबर लेने आ रहे हैं.”
विनायक के परिवार में वीआईपी नंबरों का शौक पुराना है. उनके कारोबारी पिता कभी एक ही गाड़ी से सफर नहीं करते थे. बीएमडब्ल्यू, मर्सिडीज और ऑडी—तीनों गाड़ियों पर एक ही नंबर होता था: 0001, लेकिन विनायक का लकी नंबर 7 है. उनकी वजहें उनके पिता से अलग हैं, जिनके लिए यह नंबर सिर्फ रुतबे का प्रतीक था.
विनायक ने कहा, “मेरी बर्थडेट 7 अगस्त है, यही सबसे बड़ी वजह है. इसके अलावा मेरी गर्लफ्रेंड से भी मेरी मुलाकात अगस्त में हुई थी और मेरे पसंदीदा क्रिकेटर धोनी की जर्सी नंबर भी 7 है. इसलिए मैं 0700 चाहता था. मुझे पता है कि 0007 सबसे सही नंबर होता, लेकिन मैं कुछ अलग और यूनिक चाहता था.”
बचपन से ही विनायक के मन में इन वीआईपी नंबरों की गहरी यादें हैं. स्कूल के बाहर उन्हें लेने आने वाली गाड़ियां, स्विमिंग क्लास और ट्यूशन छोड़ने वाली कारें—सब पर खास नंबर प्लेट होती थीं.
विनायक ने याद किया, “मुझे याद है मेरे दोस्त मुझसे पूछते थे कि क्या वे मेरी गाड़ी में बैठ सकते हैं. उन्हें यह बात बहुत प्रभावित करती थी कि हमारी सारी गाड़ियों पर एक ही नंबर होता था.”
हालांकि, विनायक के दोस्तों के बीच वीआईपी नंबर कोई खास या असाधारण चीज़ नहीं है.
विनायक ने कहा, “मेरे सबसे अच्छे दोस्त के पास दो फॉर्च्यूनर हैं—एक काली और एक सफेद और दोनों पर वीआईपी नंबर 0003 है. हम पांच दोस्त हैं और सभी के पास ट्रिपल-जीरो वाले नंबर हैं, बस एक-एक बदलाव के साथ: 0004, 0800, 0100. अब इस कलेक्शन में 0700 भी जुड़ जाएगा.”

अमन ने कहा, “यह क्रेज़ यूट्यूबर्स की वजह से बढ़ा है, जो अपने वीडियो में वीआईपी नंबर दिखाते हैं. यही वजह है. यह कूल लगता है. हमारे बिजनेस में लोग अपनी पसंद का नंबर लेने के लिए आसानी से 50,000 से एक लाख रुपये तक दे देते हैं.” अमन के पास एक थार भी है, जिस पर वीआईपी नंबर 0004 लगा है.
अमन बताते हैं कि दक्षिण भारत के कई खरीदार उनसे लग्ज़री कार खरीदते हैं, अपने राज्य से एनओसी लेते हैं और फिर पसंदीदा रजिस्ट्रेशन नंबर का इंतज़ार करते हैं.
अमन ने कहा, “कई मामलों में नंबर गाड़ी के साथ ही मिल जाता है, लेकिन सेकेंड हैंड लग्ज़री कार खरीदते वक्त लोग नया नंबर चाहते हैं, ताकि वे दिखा सकें.”
गुरुग्राम के एक उद्योगपति ने भी इस चलन की पुष्टि की. उनके पास चार गाड़ियां हैं—बीएमडब्ल्यू, फॉर्च्यूनर, थार और मर्सिडीज और चारों पर एक ही नंबर है: 0001. इसके पीछे न तो कोई अंक ज्योतिष है और न ही जन्मतिथि या सालगिरह का तर्क. वह इसे सिर्फ अपनी अहमियत दिखाने के लिए रखते हैं.
उद्योगपति ने कहा, “मैं अपनी गाड़ी पर लाल बत्ती नहीं लगा सकता और न ही हूटर का इस्तेमाल कर सकता हूं. इसलिए मैं चार गाड़ियों के साथ चलता हूं और सब पर एक ही वीआईपी नंबर होता है, ताकि लोगों को पता चले कि सड़क पर कोई खास व्यक्ति जा रहा है. इसके कई फायदे हैं—लोग बहस नहीं करते, सुरक्षा कर्मी ठीक से पेश आते हैं. यही मेरी वजह है. अगर मैं एक और गाड़ी खरीदूंगा, तो उसी नंबर के साथ खरीदूंगा.” उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर यह बात कही.
किस्मत और अंक ज्योतिष भी इस जुनून में बड़ी भूमिका निभाते हैं.
लुधियाना के रहने वाले 50 साल के मनोज जेठिया कार एक्सेसरीज़ का कारोबार करते हैं. उनके पास चार गाड़ियां हैं और चारों पर एक ही नंबर है—3400. वह नंबर प्लेट का दिखावा नहीं करते, लेकिन यह सुनिश्चित करते हैं कि हर गाड़ी पर वही नंबर हो.
मनोज जेठिया ने कहा, “मेरे बेटे का जन्मदिन 3 अप्रैल है, यानी 3-4. और अगर 3 और 4 को जोड़ें, तो 7 बनता है, जो गुरुजी का जन्मदिन है—7 जुलाई. इसी वजह से मैं यह नंबर लेता हूं. यह कोई सुपर वीआईपी नंबर नहीं है, इसलिए न तो ज्यादा परेशानी होती है और न ही बहुत बड़ी रकम चुकानी पड़ती है.”
उन्होंने हाल ही में इस नंबर के लिए करीब 50,000 रुपये चुकाए.
डीसी सीरीज़ का क्रेज़
30 साल के पुनीत गुप्ता चंडीगढ़ में दो लग्ज़री कार ब्रांड डीलरों के साथ काम करते हैं. उनका काम ग्राहकों को आरसी दिलवाना और उनकी पसंद का नंबर दिलाने में मदद करना है.
इसके अलावा वे एक नीलामी एजेंट के तौर पर भी काम करते हैं. वह पर्सनल ग्राहकों के लिए पूरा काम संभालते हैं—रजिस्ट्रेशन से लेकर रजिस्ट्रिंग एंड लाइसेंसिंग अथॉरिटी के दफ्तर में डिमांड ड्राफ्ट जमा कराने तक और नीलामी से जुड़ी हर अपडेट देने तक. फिलहाल उनके पास तीन क्लाइंट हैं.
पुनीत गुप्ता ने कहा, “सबसे पहले 500 रुपये की रजिस्ट्रेशन फीस जमा करनी होती है, जो नॉन-रिफंडेबल होती है. इसके बाद रिज़र्वेशन प्राइस आता है. अगर आप 0001 से 0009 जैसे नंबर चाहते हैं, तो इसकी कीमत 50,000 रुपये होती है. 3100 जैसे डबल-डिजिट स्टाइल नंबर के लिए रिज़र्वेशन प्राइस 20,000 रुपये है. हम यह सारी जानकारी क्लाइंट को देते हैं और पूरी प्रक्रिया समझाते हैं. हर नंबर प्लेट पर हमें करीब 6,000 से 7,000 रुपये का कमीशन मिलता है.” यह बताते हुए गुप्ता ने कहा कि वह चंडीगढ़ से दिल्ली अपने कुछ क्लाइंट्स को आरसी देने आए थे.
चंडीगढ़ में साल 2020 में 3,308 नंबरों की नीलामी हुई थी. यह आंकड़ा 2021 में बढ़कर 6,167, 2022 में 9,055, 2023 में 9,599 और 2024 में 8,752 तक पहुंच गया. इस साल 30 अक्टूबर तक 4,088 नंबरों की नीलामी हो चुकी है, जो एक बार फिर भारी भागीदारी का संकेत है. सालाना रेवेन्यू 2020 में 106.16 करोड़ रुपये था, जो 2024 में बढ़कर 319.05 करोड़ रुपये हो गया. 2025 में अब तक 145.11 करोड़ रुपये जुटाए जा चुके हैं और आखिरी नीलामी अब तक की सबसे बड़ी मानी जा रही है.
पिछले कुछ सालों में पुनीत गुप्ता के दिल्ली के चक्कर बढ़ गए हैं, क्योंकि अब दिल्ली, उत्तराखंड, हरियाणा और पंजाब से लोग नंबर खरीदने के लिए चंडीगढ़ आ रहे हैं. इसके पीछे दो बड़ी वजहें हैं.
संजीव कोहली ने कहा, “चंडीगढ़ में सिर्फ एक ही सीरीज़ है और लोग CH01 नंबरों पर गर्व करते हैं. यहां प्राइवेट वाहनों के लिए कोई दूसरी सीरीज़ नहीं है. दूसरी वजह यह है कि यहां की सुरक्षा और पेपरवर्क इतना मजबूत है कि चंडीगढ़ में रजिस्टर्ड गाड़ियों को सड़कों पर सिक्योरिटी ज्यादा नहीं रोकती.”
अब नई डीसी सीरीज़ की मांग तेजी से बढ़ी है.
विनायक ने बताया, “मेरे दोस्त को अगले महीने थार खरीदनी थी, लेकिन चूंकि डीसी सीरीज़ की नीलामी इसी हफ्ते हो रही है, इसलिए उसने गाड़ी की खरीद और डिलीवरी पहले करवा ली, ताकि वह इस सीरीज़ के लिए एलिजिबल हो सके.”
इस डीसी सीरीज़ को लेकर लोगों में जबरदस्त उत्साह है.
संजीव कोहली ने कहा, “यह सीरीज़ सुपरहिट होने वाली है. लोग डीसी सीरीज़ को लेकर बहुत पैशनेट हैं. अब 1322 जैसे आम दिखने वाले नंबर भी डिमांड में आ जाएंगे. अकेले देखें तो यह एक साधारण नंबर है, लेकिन जब यह डीसी के साथ आता है और डीसी 1322 बनता है, तो लोग इसे ‘डीसी तेरा भाई’ की तरह पढ़ते हैं. लोगों को यह भी कूल लगता है.”
आरएलए विभाग को इस नीलामी के लिए करीब 485 आवेदन मिले थे. पिछली नीलामी अगस्त में हुई थी, यानी पांच महीने से भी कम समय पहले. एक सीरीज़ में कुल 1,000 नंबर होते हैं.
आरएलए चंडीगढ़ के एक अधिकारी ने बताया, “रजिस्ट्रिंग एंड लाइसेंसिंग अथॉरिटी, चंडीगढ़ ने 20 से 22 दिसंबर 2025 के बीच नई CH01-DC सीरीज़ के फैंसी और चॉइस वाहन रजिस्ट्रेशन नंबरों की ई-नीलामी की. कुल 485 नंबरों की नीलामी हुई, जिससे 2.96 करोड़ रुपये का राजस्व मिला. CH01-DC-0001 सबसे महंगा नंबर रहा, जो 31.35 लाख रुपये में बिका. इसके बाद CH01-DC-0009 20.42 लाख रुपये में बिका.”
आरएलए दफ्तर में इस नीलामी की खुशी में मिठाइयां बांटी गईं. पुनीत गुप्ता कागज़ी कार्रवाई के लिए कई बार दफ्तर गए और उनकी आखिरी विज़िट मिठाई खाने के लिए थी.
पुनीत गुप्ता ने कहा, “मेरे एक क्लाइंट को उसका मनपसंद नंबर 0009 मिल गया. उसने इसके लिए 20.42 लाख रुपये दिए. रकम थोड़ी ज्यादा थी, लेकिन वह बेहद खुश था.”
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