नयी दिल्ली, 13 जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को जेल में बंद जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे आंगमो की ओर से दायर उस याचिका पर सुनवाई 29 जनवरी तक टाल दी, जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत अपने पति की हिरासत को चुनौती दी है।
न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पीबी वराले की पीठ ने कहा, “याचिका पर अगली सुनवाई के लिए 29 जनवरी 2026 की तारीख तय की जाए।”
गीतांजलि ने सोमवार को शीर्ष अदालत से कहा था कि उनके पति को हिरासत में लेने वाले अधिकारियों ने विवेक का इस्तेमाल नहीं किया और अप्रासंगिक सामग्री पर भरोसा जताया।
गीतांजलि ने दलील दी थी कि लेह में उनके पति की ओर से दिए गए भाषण का मकसद हिंसा को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि उसे शांत करना था। उन्होंने कहा कि वांगचुक को अपराधी के रूप में चित्रित करने के लिए तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है।
गीतांजलि ने शीर्ष अदालत को बताया कि वांगचुक को उनकी हिरासत के “संपूर्ण आधार” के बारे में जानकारी नहीं उपलब्ध कराई गई और उन्हें इस कार्रवाई के खिलाफ संबंधित प्राधिकरण के समक्ष अपना पक्ष रखने का उचित अवसर भी नहीं प्रदान किया गया।
गीतांजलि ने अपनी याचिका में दावा किया है कि वांगचुक की हिरासत अवैध और मनमानी कार्रवाई है, जो उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है।
वांगचुक को लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और इस केंद्र-शासित प्रदेश को छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर लेह में हुए हिंसक प्रदर्शनों के दो दिन बाद, 26 सितंबर 2025 को कड़े राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत हिरासत में लिया गया था। इन प्रदर्शनों में चार लोगों की मौत हो गई थी और 90 अन्य घायल हुए थे।
सरकार ने वांगचुक पर हिंसा को भड़काने का आरोप लगाया है।
लेह के जिलाधिकारी ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया था कि वांगचुक राज्य की सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और आवश्यक सेवाओं के रखरखाव के लिए हानिकारक गतिविधियों में शामिल थे, जिसके कारण उन्हें एनएसए के तहत हिरासत में लिया गया था।
शीर्ष अदालत में दायर हलफनामे में जिलाधिकारी ने इन आरोपों से इनकार किया था कि वांगचुक को अवैध रूप से हिरासत में लिया गया था या हिरासत में उनके साथ अनुचित व्यवहार किया जा रहा था। उन्होंने कहा था कि वांगचुक को उन्हें हिरासत में लिए जाने के कारणों से अवगत करा दिया गया है।
गीतांजलि ने अपनी याचिका में कहा है कि पिछले साल 24 सितंबर को लेह में हुई हिंसा की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं के लिए वांगचुक के कृत्यों या बयानों को किसी भी तरह से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है।
भाषा पारुल प्रशांत
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