प्रयागराज, 13 जनवरी (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश पुलिस के विशेष कार्यबल (एसटीएफ) द्वारा एक निजी शिकायत पर संज्ञान लेने को गंभीरता से लेते हुए अपर महानिदेशक (एसटीएफ) अमिताभ यश को 16 जनवरी को व्यक्तिगत रूप से या ऑनलाइन माध्यम से पेश होने का निर्देश दिया है।
मौजूदा मामले में एसटीएफ ने याचिकाकर्ता जयचंद मौर्य की नियुक्ति के खिलाफ तुलसी राम नामक व्यक्ति द्वारा की गई एक निजी शिकायत का संज्ञान लिया। मौर्य प्रयागराज स्थित एक इंटरमीडिएट कॉलेज में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में कार्यरत थे।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि याचिकाकर्ता ने अपनी जन्मतिथि में छेड़छाड़ की है और इस शिकायत को संज्ञान में लेकर एसटीएफ ने मामले की जांच शुरू की। एसटीएफ की रिपोर्ट के आधार पर जिला विद्यालय निरीक्षक ने याचिकाकर्ता के सेवानिवृत्तोपरांत लाभ रोकने का आदेश पारित किया, जिसे याचिकाकर्ता ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी है।
इस रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने अपर महानिदेशक (एसटीएफ) अमिताभ यश द्वारा ऑनलाइन माध्यम से दिए गए स्पष्टीकरण पर असंतोष व्यक्त किया।
अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता भी ऐसा कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि एसटीएफ किसी निजी शिकायत के आधार पर इस प्रकार का संज्ञान कैसे ले सकता है।
अदालत ने अपर महानिदेशक (एसटीएफ) अमिताभ यश को 16 जनवरी को व्यक्तिगत रूप से या ऑनलाइन माध्यम से पेश होने का निर्देश दिया है।
इस पर अदालत ने कहा, “यदि यह मामला इतना गंभीर है तो प्रबंधन समिति या संबंधित जिला विद्यालय निरीक्षक ने याचिकाकर्ता के खिलाफ आज की तिथि तक कोई कदम क्यों नहीं उठाया।”
अदालत ने संबंधित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) के माध्यम से प्रयागराज के सरायपीठा शाहीपुर स्थित आदर्श माध्यमिक विद्यालय की प्रबंधन समिति और विद्यालय के प्रधानाचार्य को नोटिस जारी करते हुए 16 जनवरी को याचिकाकर्ता की नियुक्ति से जुड़े सभी दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया।
हालांकि, 12 जनवरी को पारित आदेश में अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जांच में किसी प्रकार की संदिग्धता या धोखाधड़ी पाई जाती है तो याचिकाकर्ता को कानूनी परिणामों का सामना करना पड़ेगा।
भाषा सं राजेंद्र खारी
खारी
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
