नयी दिल्ली, 13 जनवरी (भाषा) प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने मंगलवार को कहा कि देश ‘‘सही दिशा और गति’’ के साथ विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करेगा और उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ये चीजें राष्ट्रों और व्यक्तियों, दोनों को समान रूप से प्रेरित करती हैं।
दिल्ली छावनी में राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के गणतंत्र दिवस शिविर में कैडेट को संबोधित करते हुए, सीडीएस ने सशस्त्र बलों को ‘‘सबसे उत्तम पेशों में से एक’’ बताया और युवाओं से राष्ट्र की सेवा करने की अपील की।
जनरल चौहान ने कहा, ‘‘जब मैं कहता हूं कि आपका मार्ग और गंतव्य एक ही दिशा में होने चाहिए, तो इसका चयन हमें आज ही करना होगा ताकि आप सही मंजिल तक पहुंचें और अपने उद्देश्य को प्राप्त करें। अपने उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए आप जो भी चयन करें, उसमें राष्ट्रवाद का तत्व भी होना चाहिए।’’
उन्होंने कहा कि देश के युवा विकसित भारत की राह में अग्रणी भूमिका निभाएंगे।
सीडीएस ने कहा, ‘‘यह सिर्फ आपका ही नहीं, बल्कि मेरा भी मानना है कि पूरा देश एक बेहद महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। हम भी अपने भविष्य की तलाश में हैं। हम 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनना चाहते हैं, एक समृद्ध राष्ट्र जो सशक्त और सुरक्षित हो।’’
उन्होंने कहा, ‘‘2047 में एक विकसित भारत। और मेरा मानना है कि यह हमारा अमृत काल है, और हम एक राष्ट्र के रूप में अपने लक्ष्य को प्राप्त करेंगे। और, यह हम उन युवाओं की मदद से हासिल करेंगे जो प्रेरित हैं और देश के लिए कुछ करने को तैयार हैं।’’
अपने संबोधन में उन्होंने गति के महत्व पर जोर दिया।
जनरल चौहान ने कहा, ‘‘मैं इसमें गति का एक और पहलू जोड़ना चाहता हूं। मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूं क्योंकि एक कहावत है… आप कल का इंतजार नहीं कर सकते। एक राष्ट्र के रूप में हमारे पास 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने के लिए बहुत कम समय है।’’
अपने करियर का उल्लेख करते हुए जनरल ने कहा, ‘‘बहुत समय पहले, लगभग पांच दशक पहले, मैंने यह राह चुनी थी। मैं सशस्त्र बलों में शामिल हुआ। और मैं यहां आप सभी से यही आग्रह करने आया हूं। यह एक ऐसा पेशा है जो इस देश के नागरिकों का सम्मान अर्जित करता है।’’
उन्होंने कहा कि यह पेशा युवाओं को एक ‘‘कुलीन’’ वर्ग में शामिल होने का अवसर देता है।
उन्होंने कहा, ‘‘और जब मैं कुलीन कहता हूं, तो इसका मतलब वेतन और भत्तों से नहीं है, बल्कि उन कौशल से है जिनमें आपको दक्ष किया जाता है। यही आपको दूसरों से अलग बनाता है। सैन्य सेवा का पेशा बहुत ही सम्मानजनक है।’’
जनरल चौहान ने आगाह किया कि आगे का रास्ता हमेशा सुगम नहीं होगा।
उन्होंने एनसीसी कैडेट से कहा, ‘‘उतार-चढ़ाव तो आएंगे ही। लेकिन सच्चा सिपाही वही होता है जो इससे हतोत्साहित नहीं होता। हमेशा याद रखना कि रास्ते का मोड़ अंत नहीं होता। आपको आगे बढ़ते रहना है और कभी उम्मीद नहीं छोड़नी है।’’
भाषा सुभाष पवनेश
पवनेश
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