नई दिल्ली: भारतीय सेना चीन से लगी उत्तरी सीमा को ध्यान में रखते हुए अमेरिकी बख्तरबंद पैदल सेना लड़ाकू वाहन स्ट्राइकर को खरीद के एक विकल्प के रूप में देख रही है. यह बात सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मंगलवार को कही.
उन्होंने कहा कि अगर कोई भारतीय विकल्प उपलब्ध होगा तो सेना निश्चित तौर पर उसी को चुनेगी.
उन्होंने राजधानी में हुई अपनी वार्षिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “स्ट्राइकर उन विकल्पों में से एक है जिन पर हम विचार कर रहे हैं क्योंकि हमें एक ऐसा प्लेटफॉर्म चाहिए, जिसे हम उत्तरी मोर्चे पर बहुत अच्छी तरह इस्तेमाल कर सकें.”
उन्होंने आगे कहा, “और उसमें सुरक्षा, फायरपावर और गतिशीलता के सभी ज़रूरी गुण होने चाहिए. इसलिए अगर इसका कोई भारतीय विकल्प है, तो हम भारतीय विकल्प को ही प्राथमिकता देंगे. अगर नहीं, तो हम दूसरे विकल्पों को भी देख रहे हैं. स्ट्राइकर भी उन्हीं में से एक है.”
दिप्रिंट ने सबसे पहले 1 फरवरी 2023 को खबर दी थी कि भारत और अमेरिका, जनरल डायनेमिक्स लैंड सिस्टम्स द्वारा विकसित आठ-पहिया ड्राइव पैदल सेना लड़ाकू वाहन के संयुक्त उत्पादन को लेकर बातचीत कर रहे हैं.
सूत्रों ने बताया कि अगर यह सौदा फाइनल होता है, तो इसके तहत अमेरिका की फॉरेन मिलिट्री सेल्स (FMS) पहल के तहत सीमित संख्या में सीधे खरीद होगी, जिसके बाद भारत में एक जॉइंट वेंचर के जरिए को-प्रोडक्शन किया जाएगा.
सेना अपने जवानों को लैस करने के लिए 530 पैदल सेना लड़ाकू वाहन (ICV) खरीदने पर विचार कर रही है.
सूत्रों के मुताबिक, स्ट्राइकर पर विचार करने का एक कारण यह भी है कि भारतीय कंपनियां अभी गुणवत्ता संबंधी आवश्यकताओं (QR) को पूरा नहीं कर पा रही हैं.
सूत्रों ने बताया कि स्ट्राइकर के पक्ष में एक बड़ा कारण यह है कि इसे आसानी से चिनूक हेलीकॉप्टर के नीचे लटकाकर ले जाया जा सकता है. यही वजह थी कि भारत ने सीमित संख्या में एम777 तोपें खरीदी थीं, जिनका इस्तेमाल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के आतंकी और सैन्य ठिकानों पर हमला करने में किया गया था.
हालांकि, स्ट्राइकर की कुछ सीमाएं भी हैं. भारतीय सेना चाहती है कि उसका प्रस्तावित ICV (पानी और जमीन दोनों पर चलने वाला) हो, जबकि अमेरिकी वाहन ऐसा नहीं है.
कुछ परीक्षणों के बाद, सेना ने बेहतर पावर-टू-वेट रेशियो की भी मांग की है, ताकि यह वाहन लद्दाख जैसे पहाड़ी इलाकों में आसानी से चल सके.
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