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Tuesday, 13 January, 2026
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भगवंत मान की अकाल तख्त पेशी से पहले विवाद, बीजेपी ने ‘सिख भावनाएं आहत’ करने वाला वीडियो उठाया

बीजेपी ने उस वीडियो की जांच की मांग की है, जिसके बारे में उसका दावा है कि उसमें मान ने सिख भावनाओं को ठेस पहुंचाई है. वहीं सीएम के सहयोगियों ने इसे एआई से बना क्लिप बताया है.

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चंडीगढ़: सिखों की सर्वोच्च सांसारिक संस्था अकाल तख्त के सामने अपनी कथित “एंटी-सिख” हरकतों को लेकर पेश होने से तीन दिन पहले, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने एक वीडियो को सामने रखा है, जिसमें कथित तौर पर पंजाब के मुख्यमंत्री सिख गुरुओं का अपमान करते नज़र आ रहे हैं.

पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गौरव यादव को लिखे दो पन्नों के पत्र में जाखड़ ने इस क्लिप की “तत्काल फॉरेंसिक जांच” की मांग की है. उन्होंने कहा कि अगर वीडियो असली पाया जाता है, तो मान को मुख्यमंत्री बने रहने का कोई हक नहीं है. वहीं, अगर वीडियो फर्जी है, तो इसे बनाने और फैलाने वाले सभी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए.

हालांकि, मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन मान के करीबी सूत्रों ने इस वीडियो को “एआई से बना” बताया है. उन्होंने कहा कि यह उसी तरह के वीडियो की सीरीज़ का हिस्सा है, जिन्हें पिछले साल अक्टूबर में जगमन समरा नाम के एक एनआरआई ने “जारी” किया था.

यह वीडियो, जिसमें एक व्यक्ति सिख गुरुओं की तस्वीर के सामने और मारे गए सिख उग्रवादी जरनैल सिंह भिंडरांवाले की प्रतिमा के सामने बेहद आपत्तिजनक हरकत करते दिख रहा है, एक हफ्ते से ज्यादा समय से सोशल मीडिया पर घूम रहा है.

जाखड़ ने डीजीपी को लिखे पत्र में कहा, “यह वीडियो कथित तौर पर पंजाब के माननीय मुख्यमंत्री श्री भगवंत मान को बेहद आपत्तिजनक आचरण करते हुए और श्री गुरु नानक देव जी की पवित्र तस्वीर के प्रति घोर अनादर दिखाते हुए दर्शाता है.”

उन्होंने लिखा, “इस वीडियो के प्रसार से धार्मिक भावनाएं गहराई से आहत हुई हैं, सार्वजनिक सौहार्द बिगड़ा है और लोगों को दुख हुआ है, जिससे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पंजाब और पंजाबियों की गरिमा और छवि को नुकसान पहुंचा है.”

अक्टूबर में समरा द्वारा जारी किए गए वीडियो में, कथित तौर पर “मुख्यमंत्री” को कुछ महिलाओं के साथ एक कमरे में दिखाया गया था. समरा ने दावा किया था कि ये वीडियो असली हैं और वह इनकी फॉरेंसिक जांच कराने के लिए तैयार है.

पंजाब पुलिस ने समरा के खिलाफ मामला दर्ज किया था और इन वीडियो को अलग-अलग सोशल मीडिया अकाउंट्स से हटा दिया गया था, जहां सरकार की ओर से जारी प्रेस नोट में कहा गया था कि ये वीडियो “एआई से बनाए गए” हैं, वहीं एफआईआर में कहा गया है कि ये वीडियो “हो सकते हैं” एआई से बनाए गए.

अकाल तख्त में पेशी

मान 15 जनवरी को अकाल तख्त के सामने पेश होने वाले हैं. अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज ने पिछले हफ्ते एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि मान को उनकी कथित “एंटी-सिख” हरकतों को “समझाने” के लिए अकाल तख्त सचिवालय बुलाया गया है. इसमें ताज़ा वीडियो का भी ज़िक्र किया गया है.

जत्थेदार ने कहा कि मुख्यमंत्री सिख रैहत मर्यादा (आचार संहिता) का उल्लंघन करते हुए बार-बार आपत्तिजनक टिप्पणियां कर रहे हैं और अकाल तख्त की सर्वोच्च सत्ता को चुनौती दे रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री बार-बार ‘गुरु की गोलक’ (गुरु को चढ़ाया जाने वाला धन) के सिद्धांत पर सवाल उठा रहे हैं, जिसे सिख गुरुओं का आशीर्वाद प्राप्त है और इससे सिख भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है.

वायरल वीडियो का ज़िक्र करते हुए जत्थेदार ने कहा कि अकाल तख्त इस वीडियो की सच्चाई की जांच कराएगा. उन्होंने वीडियो की सामग्री का विस्तार से ज़िक्र किया और कहा कि अगर यह सही पाया गया, तो “सबसे सख्त संभव” कार्रवाई की जाएगी.

इस बीच, डीजीपी को लिखे अपने पत्र में जाखड़ ने दिल्ली विधानसभा में आम आदमी पार्टी की नेता और पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री आतिशी के बयान से जुड़े हालिया विवाद का भी ज़िक्र किया.

जालंधर पुलिस ने बीजेपी नेता और दिल्ली के कैबिनेट मंत्री कपिल मिश्रा के खिलाफ “छेड़छाड़ किए गए” वीडियो को साझा करने के आरोप में मामला दर्ज किया है. मिश्रा ने सबसे पहले आतिशी का वीडियो पोस्ट किया था और दावा किया था कि उन्होंने सदन में सिख गुरुओं को सम्मान देते समय “बहुत अश्लील और शर्मनाक भाषा” का इस्तेमाल किया.

इस बीच, कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि पंजाब पुलिस ने उनके, उनकी पार्टी के साथी और जालंधर कैंट के विधायक परगट सिंह, अकाली दल प्रमुख सुखबीर सिंह बादल और अन्य के खिलाफ भी कपिल मिश्रा का वीडियो साझा करने के मामले में केस दर्ज किया है.

शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिल्ली विधानसभा के स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि सदन के अंदर रिकॉर्ड किए गए वीडियो को “छेड़छाड़ किया हुआ” कहना सदन की गरिमा के खिलाफ है.

उन्होंने पंजाब के डीजीपी, डीजी स्टेट साइबर सेल और जालंधर पुलिस कमिश्नर को विशेषाधिकार हनन के नोटिस जारी किए और 48 घंटे में जवाब मांगा. स्पीकर ने कहा, “हमने उन फॉरेंसिक लैब रिपोर्ट्स की भी मांग की है, जिनमें 24 घंटे से भी कम समय में वीडियो को फर्जी बताया गया.”

विश्वसनीय सूत्रों से पता चला है कि इन तीनों अधिकारियों ने जवाब देने के लिए अतिरिक्त समय मांगा है.

जाखड़ ने लिखा, “पंजाब पुलिस के पास डिजिटल सामग्री की सच्चाई को वैज्ञानिक, पारदर्शी और तेजी से जांचने के लिए पर्याप्त फॉरेंसिक और साइबर विशेषज्ञता है. हाल ही में एक पूर्व मुख्यमंत्री से जुड़े वायरल वीडियो की एक दिन में फॉरेंसिक जांच की गई थी. इसलिए मौजूदा वीडियो (जिसमें कथित तौर पर मान दिख रहे हैं) की सच्चाई भी बिना देरी के तय की जा सकती है.”

उन्होंने यह बात राज्य सरकार द्वारा आतिशी के वीडियो को “छेड़छाड़ किया हुआ” बताए जाने के संदर्भ में कही.

उन्होंने कहा कि पंजाब के लोग सिख धर्म या उसके पवित्र प्रतीकों के अपमान से जुड़ी किसी भी हरकत को बर्दाश्त नहीं कर सकते. “इसलिए न्याय, साम्प्रदायिक सौहार्द और कानून के शासन के व्यापक हित में सच्चाई को जल्द से जल्द सामने लाया जाना चाहिए.”

इस बीच, सबकी नज़रें मान पर टिकी हैं. मान ने कहा है कि वह अपने आरोपों के “सबूतों” के साथ जत्थेदार के सामने पेश होंगे. उन्होंने यह भी कहा कि जत्थेदार के साथ उनकी पूरी बैठक को सबके देखने के लिए लाइव दिखाया जाना चाहिए.

मान को अकाल तख्त द्वारा तलब किया जाना ऐसे समय में हुआ है, जब उनकी सरकार ने गुरु ग्रंथ साहिब के 328 सरूपों (प्रतियों) की छपाई और वितरण में कथित गड़बड़ियों को लेकर एक पुलिस मामला दर्ज किया है. इस मामले में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के कर्मचारियों को नामजद किया गया है, जो सिखों के ऐतिहासिक गुरुद्वारों का संचालन और प्रबंधन करती है.

एसजीपीसी ने इस कदम को मान सरकार द्वारा पांच साल पुराने धार्मिक मुद्दे को “नाटकीय ढंग से” फिर से उठाना बताया, ताकि शिरोमणि अकाली दल पर हमला किया जा सके और उसकी बढ़ती लोकप्रियता को नुकसान पहुंचाया जा सके. मान ने एसजीपीसी के इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी सरकार को मामले की जांच करने और उसे उसके तार्किक अंत तक ले जाने का अधिकार है.

सोमवार को अकाल तख्त के जत्थेदार ने एसजीपीसी से सहयोग करने को कहा और ज़रूरत पड़ने पर जांच अधिकारियों को एसजीपीसी के अध्यक्ष की मौजूदगी में कमेटी के रिकॉर्ड देखने की अनुमति देने को कहा.

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जत्थेदार ने कहा कि “कुछ लोगों द्वारा संगत के बीच भ्रम फैलाए जाने” को देखते हुए और बड़े पंथक हितों को ध्यान में रखते हुए, एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी को सरकार के साथ सहयोग करने का अधिकार दिया गया है.

जत्थेदार ने कहा, “अगर जांच के लिए सरकार को एसजीपीसी से कोई जानकारी चाहिए, तो वह जानकारी एसजीपीसी के चंडीगढ़ सब-ऑफिस में, एसजीपीसी अध्यक्ष की मौजूदगी में देखी जा सकती है.”

उन्होंने कहा, “श्री अकाल तख्त साहिब पहले ही आदेश जारी कर चुका है कि कोई भी राजनीतिक दल, संगठन या व्यक्ति इस संवेदनशील मुद्दे से राजनीतिक फायदा लेने की कोशिश न करे. इस पर की जा रही राजनीति बंद की जाए, नहीं तो सख्त कार्रवाई की जाएगी.”

जत्थेदार गरगज ने कहा कि हाल के दिनों में मीडिया, सोशल मीडिया और वेब चैनलों पर यह देखा गया है कि अलग-अलग दलों के प्रवक्ता, बुद्धिजीवी और टिप्पणीकार “श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी” के बारे में बात करते समय बेहद निम्न स्तर की उपमाएं और भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि ऐसी अशोभनीय भाषा, चाहे जानबूझकर हो या अनजाने में, गुरसिखों, धार्मिक लोगों और श्रद्धालुओं के लिए असहनीय और अस्वीकार्य है.

जत्थेदार ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब ने सभी सिख विद्वानों, व्यक्तियों और बुद्धिजीवियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि इस मामले का नतीजा सामने आने तक किसी भी दल, व्यक्ति या संगठन के खिलाफ कोई आरोप या बयान न दें.

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ऐसा आचरण जारी रहा, तो गंभीर नोटिस लिया जाएगा.

अकाल तख्त द्वारा जारी आदेशों पर प्रतिक्रिया देते हुए, एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि एसआईटी द्वारा संपर्क किए जाने पर आदेशों की भावना के अनुसार कार्रवाई की जाएगी.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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