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Sunday, 11 January, 2026
होमदेश‘मुंबई बुलावा और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई’: GK-2 के कपल से 14.85 करोड़ की हाई-प्रोफाइल साइबर ठगी

‘मुंबई बुलावा और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई’: GK-2 के कपल से 14.85 करोड़ की हाई-प्रोफाइल साइबर ठगी

यह कपल, जो दोनों डॉक्टर हैं और पहले अमेरिका में रहते थे, उन्हें दिसंबर 2025 के आखिर से 9 जनवरी तक दो हफ़्ते के लिए "डिजिटल अरेस्ट" में रखा गया था.

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नई दिल्ली: 24 दिसंबर को दोपहर के करीब, डॉ. इंदिरा तनेजा को एक व्यक्ति का फोन आया, जिसने खुद को भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) से बताया.

“मुझसे कहा गया कि मेरे फोन नंबर से अश्लील सामग्री भेजी जा रही है और इस नंबर के खिलाफ 25 शिकायतें हैं. इसी वजह से दो दिन में मेरा फोन कनेक्शन काट दिया जाएगा.” डॉ. तनेजा ने बताया. वह अपने पति डॉ. ओम तनेजा के साथ एक ट्रस्ट चलाती हैं, जो ग्रामीण इलाकों में वंचित बच्चों और किशोरों को स्वास्थ्य सेवाएं, स्वास्थ्य शिक्षा और अतिरिक्त पोषण सहायता देता है.

डॉक्टर दंपति 2016 में अमेरिका से भारत लौटे थे और तब से यह ट्रस्ट चला रहे हैं.

जब डॉ. तनेजा ने कॉलर के दावे खारिज कर दिए और कहा कि वह नंबर उनका नहीं है, तो ठग ने एक और धमकी दी और अब उन पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगा दिया.

“उन्होंने कहा कि मेरे नंबर का इस्तेमाल रक्षा प्रतिष्ठानों से जुड़े एक धोखाधड़ी के मामले और जेट एयरवेज के नरेश गोयल से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में हुआ है. उन्होंने यह भी कहा कि यह नंबर मुंबई के कोलाबा पुलिस स्टेशन में दर्ज एक केस से जुड़ा है.” उन्होंने कहा.

नरेश गोयल को प्रवर्तन निदेशालय ने अब बंद हो चुकी जेट एयरवेज से कथित तौर पर धन की हेराफेरी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था.

इसके बाद कॉलर और डॉक्टर दंपति के बीच बातचीत वीडियो कॉल पर चली गई. स्क्रीन पर एक व्यक्ति दिखाई दिया, जिसने खुद को मुंबई के कोलाबा पुलिस स्टेशन से “IPS विक्रांत सिंह राजपूत” बताया और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगाए.

यहीं से दंपति की दो हफ्ते से ज्यादा चली यातना शुरू हुई. इस दौरान धमकियों के जरिए उन्हें अपने घर में ही बंधक बनाए रखा गया. उन्हें सिर्फ पैसे ट्रांसफर करने के लिए ही घर से बाहर जाने दिया गया. 24 दिसंबर से 9 जनवरी के बीच उनसे 14.85 करोड़ रुपये ठग लिए गए.

इसके बाद उन्होंने नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) की हेल्पलाइन 1930 पर कॉल किया. वहां से मामला दिल्ली पुलिस को भेजा गया. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस यूनिट ने केस दर्ज कर जांच शुरू की.

संयुक्त पुलिस आयुक्त रजनीश गुप्ता ने कहा कि शिकायतकर्ताओं से ठगे गए पैसों के लेन-देन की जांच की जा रही है और साजिश रचने वालों की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं.

‘किसी को मत बताना’

डॉ. इंदिरा तनेजा ने बताया कि ठग ने सबसे पहले उनसे गिरफ्तारी वारंट के जवाब में मुंबई आने को कहा. लेकिन उन्होंने मना कर दिया. उन्होंने बताया कि उनके पति की तबीयत खराब है और दिल्ली के ग्रेटर कैलाश स्थित उनके घर में वे दोनों के अलावा कोई और नहीं है.

“जब मैंने मुंबई जाकर पेश होने से इनकार किया और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों का विरोध किया, तो मुझसे कहा गया कि धोखाधड़ी में इस्तेमाल हुआ मेरा अंगूठे का निशान और अन्य बायोमेट्रिक डेटा मुंबई शाखा के पास है.” डॉ. तनेजा ने द प्रिंट से बात करते हुए आगे बताया.

उन्होंने कहा कि इसके बाद ठग ने एक और कहानी गढ़ते हुए फिर से धमकाया.

अब उन्होंने दावा किया कि यह “धोखाधड़ी” रक्षा प्रतिष्ठानों से जुड़ी है. “मैंने जवाब दिया कि हम तो भारत से प्यार करते हैं, इसलिए ही वापस आए हैं. क्या हम ऐसा कोई फ्रॉड करेंगे.” उन्होंने कहा.

जब उन्होंने आरोप मानने से इनकार किया, तो ठग ने पहले उनसे सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया को एक पत्र लिखने को कहा, जिसमें मुंबई न जा पाने की वजह बताई जाए. साथ ही, परेशानी से बचने के लिए “अकाउंट वेरिफिकेशन” का एक “आसान विकल्प” दिया गया.

उन्होंने बताया कि एक बार जब कॉल के दौरान उनका ड्राइवर कमरे में आ गया, तो ठगों ने साफ कहा कि इस कॉल के बारे में किसी को कुछ न बताया जाए. “किसी को मत बताना. यह बहुत बड़ा केस है. अगर तुम घर से बाहर गए तो नरेश गोयल को सब पता चल जाएगा.” उन्होंने आगे बताया.

‘8 लेन-देन, सुप्रीम कोर्ट में पेशी’

पहली मांग करीब 2 करोड़ रुपये की थी. ठगों ने कहा कि यह पैसा एक बैंक खाते में ट्रांसफर करना होगा. अगर बैंक पूछे तो कहना होगा कि किसी दोस्त को कर्ज दिया जा रहा है.

इसके बाद 26 दिसंबर से 9 जनवरी के बीच दबाव और धमकियों के तहत उन्होंने कई बार पैसे ट्रांसफर किए. कुल रकम 14.85 करोड़ रुपये हो गई.

डॉ. इंदिरा तनेजा ने बताया कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट में वर्चुअली पेश होने को भी कहा गया. वहां एक व्यक्ति, जो खुद को जज बता रहा था, वीडियो कॉल पर पुलिस को दंपति से “नरमी” बरतने के लिए डांटता नजर आया.

शुक्रवार को तब उन्हें एहसास हुआ कि उनके साथ ठगी हो चुकी है, जब ठगों ने डॉ. ओम तनेजा का नाम पूरी तरह साफ करने के लिए 50 लाख रुपये और मांगे.

“हमसे कहा गया कि केस से पूरी तरह मुक्त होने के लिए 50 लाख रुपये और देने होंगे. असहमति के बावजूद मैंने रकम दे दी और 8 जनवरी की शाम उस नंबर पर दोबारा कॉल करने की कोशिश की.” उन्होंने कहा.

डॉ. तनेजा ने बताया कि इसके बाद ठगों ने कहा कि सारा पैसा प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 के तहत भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा वापस कर दिया जाएगा और उन्हें पुलिस स्टेशन जाने को कहा गया.

जब दंपति रिफंड की मांग को लेकर जीके पुलिस स्टेशन पहुंचे, तो वहां मौजूद पुलिसकर्मी मामला समझ नहीं पाए और उन्हें एसएचओ के पास भेज दिया.

“जैसे ही एसएचओ ने हमारा फोन लिया, पहले बात करने वाला व्यक्ति गायब हो गया. कॉल पर कोई और व्यक्ति आया और हमें गालियां देने लगा. उसने एसएचओ को भी अपशब्द कहे. इसके बाद एफआईआर दर्ज की गई.” उन्होंने आगे कहा.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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