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Saturday, 10 January, 2026
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I-PAC और दिल्ली शराब नीति केस में ED के आरोपों की कड़ी गोवा तक, हवाला फर्म बनी कॉमन लिंक

I-PAC के खिलाफ मामले में नामित कोलकाता की फर्म और गोवा में उसके कर्मचारी पर इससे पहले 2022 गोवा चुनावों से पहले AAP के लिए 45 करोड़ रुपये के ट्रांसफर में मदद करने का आरोप CBI और ED दोनों लगा चुके हैं.

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नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) और उसके निदेशक प्रतीक जैन के खिलाफ दर्ज मामले में जिन हवाला फर्म और उसके गोवा-स्थित कर्मचारी का नाम लिया गया है, उन पर इससे पहले भी 2022 के विधानसभा चुनावों से पहले गोवा में आम आदमी पार्टी (आप) को नकद राशि पहुंचाने में मदद करने का आरोप लग चुका है.

शुक्रवार को कलकत्ता हाई कोर्ट में दायर रिट याचिका में एजेंसी ने बताया कि I-PAC को पश्चिम बंगाल के अवैध कोयला सिंडिकेट से अपराध की आय के रूप में 20 करोड़ रुपये मिले. यह रकम कोलकाता की फर्म आर. कांती लाल और उसके गोवा स्थित कर्मचारी सागर पटेल के जरिए भेजी गई. सागर पटेल ने स्वीकार किया है कि उसने 2021-22 के आसपास गोवा में I-PAC के लिए इवेंट मैनेज करने वाली कंपनियों तक यह फंड ट्रांसफर कराने में भूमिका निभाई थी. I-PAC साल 2019 से तृणमूल कांग्रेस को राजनीतिक सलाह की सेवाएं दे रहा है.

कोलकाता में गुरुवार को ईडी द्वारा जिन ठिकानों पर छापे मारे गए, उनमें आर. कांती लाल के परिसर भी शामिल थे.

इसी फर्म और सागर पटेल पर इससे पहले केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और ईडी दोनों ने आरोप लगाया था कि उन्होंने गोवा विधानसभा चुनावों से पहले आप और उससे जुड़ी कंपनियों को 45 करोड़ रुपये ट्रांसफर कराने में मदद की. उस मामले में भी, एजेंसियों के मुताबिक, दिल्ली आबकारी नीति मामले की जांच के दौरान यह सामने आया कि फंड सागर पटेल के जरिए ही भेजा गया था.

एजेंसियों का दावा था कि यह रकम शराब माफिया के “साउथ ग्रुप” द्वारा दी गई रिश्वत का हिस्सा थी, जो कथित तौर पर आम आदमी पार्टी नेतृत्व, जिसमें पार्टी संयोजक और पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी शामिल हैं—द्वारा रची गई साजिश का हिस्सा थी.

एजेंसियों के अनुसार, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के कुछ नेताओं और कारोबारियों के एक समूह, जिसमें तेलुगु देशम पार्टी के सांसद मगुंटा श्रीनिवासुलु रेड्डी और उनके बेटे राघव रेड्डी, तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव की बेटी के. कविता और ऑरोबिंदो फार्मा के एमडी पी. शरत रेड्डी शामिल थे, उसने रिश्वत के बदले अनुकूल नीति परिवर्तन की मांग की थी.

आप और टीएमसी दोनों ही 2022 के गोवा चुनावों में नए खिलाड़ी थे. आप ने 39 और टीएमसी ने 26 सीटों पर चुनाव लड़ा था. AAP को दो सीटें मिलीं, जबकि 40 सदस्यीय विधानसभा में टीएमसी एक भी सीट नहीं जीत पाई.

ईडी के सूत्रों ने पुष्टि की है कि आर. कांती लाल और उसका कर्मचारी सागर, दोनों ही मामलों से जुड़े हुए हैं.

जैन और I-PAC के परिसरों पर ईडी की छापेमारी का पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कड़ा विरोध किया था. उन्होंने ईडी अधिकारियों पर उनकी पार्टी से जुड़े डेटा और फाइलें चुराने का आरोप लगाया है.

वहीं, ईडी ने आरोप लगाया है कि बनर्जी ने जांच में हस्तक्षेप किया और जांच अधिकारी से महत्वपूर्ण डिजिटल डिवाइस और आपत्तिजनक फाइलें अपने साथ ले गईं. ईडी ने कलकत्ता हाई कोर्ट में लंबित रिट याचिका में इस घटना की सीबीआई जांच की मांग की है.

एक समान कड़ी

रिट याचिका में एजेंसी ने आरोप लगाया है कि पूछताछ के दौरान सागर पटेल ने जांचकर्ताओं को अक्षय कुमार तक पहुंचाया, जिसने गोवा में एएसएम इवेंट टेक्नोलॉजी के मालिक पंकज मलिक द्वारा कराए गए हवाला चैनल के जरिए नकद राशि मिलने की बात कबूल की.

अक्षय की पहचान उन इवेंट मैनेजमेंट कंपनियों—हर्ट्ज़, पिक्सल्ज़ और एएसएम इवेंट टेक्नोलॉजी, के कर्मचारी के रूप में हुई, जिन्होंने 2021 से 2022 के बीच गोवा में I-PAC के लिए कार्यक्रमों का प्रबंधन किया था.

ईडी का दावा है कि कोलकाता के एक कारोबारी जितेंद्र मेहता ने I-PAC के इस्तेमाल के लिए कोलकाता से गोवा तक 20 करोड़ रुपये की अपराध की आय हवाला के जरिए ट्रांसफर कराने में मदद की.

यह रकम आर. कांती लाल और उसके कर्मचारियों—सागर पटेल और अल्पेश पटेल, के जरिए भेजी गई. सागर को गोवा में फर्म का कर्मचारी बताया गया है, जबकि अल्पेश कोलकाता कार्यालय में इसी तरह की भूमिका निभाता है.

सीबीआई और ईडी दोनों के अनुसार, जून 2021 से जनवरी 2022 के बीच आप ने दिल्ली से गोवा तक 44.54 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने के लिए इसी फर्म का इस्तेमाल किया था.

आबकारी नीति मामले में अदालतों के समक्ष दी गई दलीलों और अपनी-अपनी चार्जशीट में, एजेंसियों ने सागर का नाम प्रिंस कुमार, चनप्रीत सिंह और राजीव मोंडकर को फंड उपलब्ध कराने वाले के रूप में लिया है.

प्रिंस और चनप्रीत सिंह, चैरियट प्रोडक्शंस मीडिया प्राइवेट लिमिटेड में कार्यरत थे, जो 2022 के गोवा चुनावों में पार्टी के अभियान का प्रबंधन कर रही थी. आरोप है कि चनप्रीत सिंह ने ही अशोक मोंडकर को इस अभियान से जोड़ा था. चनप्रीत को पहले सीबीआई और ईडी दोनों ने गिरफ्तार किया था और वह फिलहाल जमानत पर बाहर है.

सीबीआई और ईडी दोनों ने आर. कांती लाल के गोवा कार्यालय में आयकर विभाग की छापेमारी के दौरान मिले आपत्तिजनक साक्ष्यों पर भरोसा किया है.

ईडी के अनुसार, सागर ने प्रिंस को 16 लाख रुपये नकद ट्रांसफर किए थे, जबकि चनप्रीत ने जून 2021 से जनवरी 2022 के बीच 18 से अधिक बार में सागर से 17.38 करोड़ रुपये नकद लिए. वहीं, मोंडकर ने जून 2021 से दिसंबर 2021 के बीच करीब 16 मौकों पर सागर से 27 करोड़ रुपये की रकम जुटाई थी.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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