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Sunday, 11 January, 2026
होमदेशI-PAC पर ED का आरोप—कोयला घोटाले में 20 करोड़ रुपये हवाला के जरिए बंगाल से गोवा भेजे गए

I-PAC पर ED का आरोप—कोयला घोटाले में 20 करोड़ रुपये हवाला के जरिए बंगाल से गोवा भेजे गए

एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट ने कलकत्ता हाई कोर्ट में बताया कि 2022 के गोवा विधानसभा चुनावों से पहले पश्चिम बंगाल के 'कोयला घोटाले' का पैसा हवाला के ज़रिए I-PAC को भेजा गया था.

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नई दिल्ली: ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सहित कई राजनीतिक दलों के लिए काम करने वाली कंसल्टेंसी फर्म इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आई-पैक) ने 2021 से 2022 के बीच गोवा में “20 करोड़ रुपये की अपराध से कमाई गई रकम” का इस्तेमाल किया, यह आरोप प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को कलकत्ता हाई कोर्ट में दायर एक रिट याचिका में लगाया है.

ईडी के अनुसार, यह “अपराध की कमाई” पश्चिम बंगाल में संगठित सिंडिकेट द्वारा की गई अवैध कोयला खुदाई से हुई थी, जिसका कथित नेतृत्व अनुप माजी कर रहा था.

एजेंसी ने कहा कि यह पैसा कोलकाता की फर्म आर. कांतीलाल और कई अन्य हवाला ऑपरेटरों के जरिए घुमाया गया और फिर आई-पैक और उसके निदेशक प्रतीक जैन तक पहुंचा, ताकि 2022 में चुनाव वाले तटीय राज्य गोवा में इसका इस्तेमाल किया जा सके. गुरुवार को ईडी ने प्रतीक जैन के आवास और 2019 से पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ टीएमसी को कंसल्टेंसी सेवाएं देने वाली फर्म के कार्यालय की तलाशी ली.

छापेमारी की खबर सामने आने के तुरंत बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कोलकाता में जैन के आवास और आई-पैक के कार्यालय पहुंचीं. उन्होंने आरोप लगाया कि ईडी इस साल होने वाले राज्य चुनावों से पहले उनकी पार्टी की गतिविधियों और योजनाओं की जानकारी जुटाने की कोशिश कर रही है. ईडी ने एक बयान जारी कर इस आरोप से इनकार किया.

हाई कोर्ट में दायर याचिका में ईडी ने आरोप लगाया कि जब अधिकारी तलाशी की प्रक्रिया के बारे में कोलकाता पुलिस आयुक्त मनोज कुमार वर्मा को जानकारी दे रहे थे, तब बनर्जी “स्पष्ट अनुरोध” के बावजूद जैन के परिसर में दाखिल हुईं और तलाशी का नेतृत्व कर रहे ईडी के सहायक निदेशक स्तर के अधिकारी से डिजिटल उपकरण और दस्तावेज ले गईं. एजेंसी ने इस घटना की जांच के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को आदेश देने की मांग की है.

ईडी और टीएमसी दोनों की याचिकाएं शुक्रवार को हाई कोर्ट में सूचीबद्ध थीं, लेकिन हंगामे के कारण सुनवाई नहीं हो सकी. अब सुनवाई 14 जनवरी को तय की गई है.

ईडी के खास आरोपों पर आई-पैक के प्रवक्ता ने दिप्रिंट से टिप्पणी करने से इनकार किया और कहा कि उचित समय पर आधिकारिक माध्यम से जवाब दिया जाएगा.

आई-पैक पर ईडी के आरोप

ईडी की जांच की शुरुआत सीबीआई के उस मामले से हुई है, जो कारोबारी अनुप माजी और ईस्टर्न कोलफील्ड्स (कोल इंडिया की सहायक कंपनी) के कई अधिकारियों के खिलाफ दर्ज है. इस मामले में पश्चिम बंगाल में लीज पर लिए गए इलाकों में कथित तौर पर अवैध कोयला खुदाई और चोरी का आरोप है. ईडी के अनुसार, इसके बाद यह कोयला बैंकुरा, बर्धमान, पुरुलिया और राज्य के अन्य जिलों की विभिन्न फैक्ट्रियों और प्लांट्स में बेचा गया.

ईडी ने कहा कि जांच में पता चला कि कोयला तस्करी सिंडिकेट ने करीब 25.51 लाख मीट्रिक टन कोयले की अवैध खुदाई की, जिसकी कीमत लगभग 1,114.35 करोड़ रुपये है.

एजेंसी ने आरोप लगाया कि माजी के नेतृत्व वाले इस सिंडिकेट ने दिसंबर 2017 से अक्टूबर 2020 के बीच 2,742.32 करोड़ रुपये की अपराध से कमाई की.

हाई कोर्ट में दायर याचिका में ईडी ने कहा कि 26 अगस्त 2020 की एक व्हाट्सएप बातचीत, जो माजी के अकाउंटेंट नीरज सिंह और उनके करीबी सहयोगी तथा बैंकुरा पुलिस स्टेशन के पूर्व प्रभारी अशोक कुमार मिश्रा के बीच हुई थी, से पता चलता है कि कोलकाता की फर्म आर. कांतीलाल का इस्तेमाल अवैध चैनलों के जरिए अपराध की कमाई को ट्रांसफर करने के लिए किया गया. मिश्रा को एजेंसी ने 2021 में गिरफ्तार किया था और वह फिलहाल जमानत पर बाहर हैं.

एजेंसी ने याचिका में दावा किया, “खुफिया जानकारी मिली थी कि कोलकाता से गोवा तक करीब 20 करोड़ रुपये की अपराध से कमाई आर. कांतीलाल फर्म के जरिए ट्रांसफर की गई. गोवा में हवाला ट्रांसफर संभालने वाला कर्मचारी सागर कुमार पटेल है.”

कोलकाता में गुरुवार को जिन ठिकानों पर ईडी ने छापेमारी की, उनमें आर. कांतीलाल का परिसर भी शामिल था.

एजेंसी ने आगे कहा कि पूछताछ के दौरान पटेल ने जांचकर्ताओं को अक्षय कुमार तक पहुंचाया, जिसने कबूल किया कि उसे गोवा में पंकज मलिक द्वारा कराए गए हवाला चैनल के जरिए नकद पैसा मिला. पंकज मलिक एएसएम इवेंट टेक्नोलॉजी का मालिक है.

ईडी ने अक्षय की पहचान इवेंट मैनेजमेंट कंपनियों हर्ट्ज और पिक्सल्ज और एएसएम इवेंट टेक्नोलॉजी के कर्मचारी के रूप में की है.

याचिका में ईडी ने आगे बताया कि अक्षय से दो बार पूछताछ की गई, पहली बार 26 अक्टूबर 2023 को और दूसरी बार 10 जनवरी 2024 को. इस दौरान उसने कहा कि ये दोनों फर्म 2021 से 2022 के बीच आई-पैक के लिए काम कर रही थीं और इवेंट्स मैनेज कर रही थीं.

कथित फंड के प्रवाह की और जानकारी देते हुए एजेंसी ने कहा कि आर. कांतीलाल के कर्मचारी अल्पेश पटेल ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उसने कोलकाता से गोवा में 20 करोड़ रुपये नकद की व्यवस्था की थी, जो अक्षय कुमार को दी जानी थी. ईडी के अनुसार, पटेल ने जांचकर्ताओं को मुकेश पटेल तक भी पहुंचाया, जिसके अनुरोध पर उसने यह रकम जुटाई थी.

मुकेश पटेल को राजेश मगनलाल फर्म का मालिक बताया गया है. ईडी के अनुसार, मुकेश पटेल ने जांचकर्ताओं को मुकेश ठक्कर उर्फ मुन्ना तक पहुंचाया, जिसके अनुरोध पर उसने यह रकम जुटाई थी.

इसके बाद मुन्ना ने जांचकर्ताओं को कोलकाता के एक कारोबारी जितेंद्र मेहता तक पहुंचाया, जो एक नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (एनबीएफसी) चलाता है. एजेंसी का आरोप है कि उसने अपराध की कमाई को ट्रांसफर करने में मदद की.

ईडी ने याचिका में कहा, “जितेंद्र मेहता ने कोलकाता से गोवा तक हवाला के जरिए अपराध की कमाई ट्रांसफर करने में मदद की है. उसने आई-पैक द्वारा गोवा में इस्तेमाल के लिए 20 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने में सहायता की.”

याचिका में यह भी कहा गया, “जानकारी के अनुसार, आई-पैक के सह-संस्थापक और निदेशक प्रतीक जैन ने गोवा में आई-पैक के संचालन को संभाला है. यह रकम अक्षय कुमार को दी गई, जो हर्ट्ज और पिक्सल और एएसएम इवेंट टेक्नोलॉजी का कर्मचारी है, और इन कंपनियों ने गोवा में आई-पैक के लिए काम किया है.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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