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Saturday, 10 January, 2026
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असम चुनाव से पहले बोडोलैंड अहम चुनावी मैदान बना, BJP और कांग्रेस क्षेत्रीय दलों को साधने में जुटीं

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट और यूनाइटेड पीपल्स पार्टी लिबरल दोनों को NDA पार्टनर के तौर पर बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं. कांग्रेस को उम्मीद है कि वह बाद वाली पार्टी को अपने साथ मिला लेगी.

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नई दिल्ली: चार जिलों में फैला बोडोलैंड टेरिटोरियल रीजन यानी बीटीआर, जिसमें 15 विधानसभा सीटें हैं, असम विधानसभा चुनाव से पहले एक अहम चुनावी मैदान बनकर उभरा है. बीजेपी और कांग्रेस, दोनों ही बीटीआर में क्षेत्रीय दलों से संभावित गठबंधन के लिए कोशिश कर रहे हैं.

यह सब इलाके में चल रहे राजनीतिक फेरबदल के बीच हो रहा है. हाग्रामा मोहिलारी के नेतृत्व वाले बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट यानी बीपीएफ ने पिछले साल सितंबर में बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल यानी बीटीसी चुनाव में बड़ी जीत हासिल की थी. इस जीत के साथ उसने यूनाइटेड पीपल्स पार्टी लिबरल यानी यूपीपीएल और बीजेपी के गठबंधन को सत्ता से बाहर कर दिया. यह जीत मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के आक्रामक चुनाव प्रचार के बावजूद मिली थी.

अब सरमा की कोशिश है कि बीपीएफ और यूपीपीएल, दोनों को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए में बनाए रखा जाए. दूसरी ओर, कांग्रेस ने यूपीपीएल से संपर्क बढ़ाया है. कांग्रेस को लग रहा है कि प्रमोद बोरो के नेतृत्व वाली यूपीपीएल, मोहिलारी के साथ बीजेपी के गठजोड़ से नाराज है.

अक्टूबर में सरमा ने बीपीएफ विधायक चरण बोरो को अपने मंत्रिमंडल में मंत्री बनाया था.

बीटीआर की 15 सीटों के अलावा, बोडो समुदाय के मतदाता कम से कम 10 अन्य सीटों के नतीजों को भी प्रभावित करते हैं. इस बात को दोनों राष्ट्रीय पार्टियां समझती हैं. इसी वजह से क्षेत्रीय दलों को साथ लाने की कोशिशें तेज हो गई हैं.

बीटीसी एक स्वायत्त परिषद है, जिसे 2003 में संविधान की छठी अनुसूची के तहत बनाया गया था. कोकराझार, चिरांग, बक्सा और उदलगुड़ी जिलों में फैला बीटीआर इसी परिषद के दायरे में आता है.

बीटीसी का गठन हाग्रामा मोहिलारी के नेतृत्व वाले उग्रवादी संगठन बोडो लिबरेशन टाइगर्स फोर्स, केंद्र सरकार और असम सरकार के बीच हुए बोडो समझौते के बाद किया गया था.

बीजेपी की असम इकाई के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, इसमें कोई रहस्य नहीं है कि बीजेपी चाहती है कि बीपीएफ और यूपीपीएल दोनों ही एनडीए सहयोगी के तौर पर चुनाव लड़ें. चुनौती यह है कि हाग्रामा मोहिलारी और प्रमोद बोरो, आपस में किसी समझौते पर सहमत हों. फिलहाल, दोनों एनडीए में ही बने हुए हैं.

मोहिलारी ने कहा है कि उन्हें विधानसभा चुनाव में यूपीपीएल को एनडीए सहयोगी बनाए रखने पर कोई आपत्ति नहीं है. लेकिन उनकी शर्त है कि उनकी पार्टी को बीटीआर से बाहर की सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए टिकट दिए जाएं. पिछले साल सितंबर में बीटीसी चुनाव जीतने के बाद मोहिलारी ने कहा था कि वह एनडीए में लौटेंगे, लेकिन तभी जब बीजेपी यूपीपीएल को छोड़ दे.

हालांकि, सरमा द्वारा बीपीएफ को मंत्री पद दिए जाने के बाद मोहिलारी ने अपना रुख बदल लिया.

यूपीपीएल से जुड़े सूत्रों ने कहा कि पार्टी को बीटीआर से बाहर सीटें देने का सुझाव अव्यावहारिक है. इसके अलावा, सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस की पेशकश पर यूपीपीएल ने अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है.

असमिया, कोच-राजबोंगशी और बंगाली भाषी मुसलमानों समेत 19 गैर-बोडो समुदाय, परिषद की कुल आबादी का करीब 65 प्रतिशत हिस्सा हैं. बोडो समुदाय असम का सबसे बड़ा जनजातीय समूह है, जो राज्य की आबादी का कम से कम छह प्रतिशत है.

कांग्रेस की असम इकाई के एक नेता ने नाम न छापने की शर्त पर दिप्रिंट से कहा, आम धारणा के उलट, बीटीसी चुनाव में बीपीएफ की जीत बोडो समुदाय के एकजुट होकर वोट देने की वजह से नहीं हुई. यह जीत इसलिए मिली क्योंकि इलाके के मुसलमान मोहिलारी के इस वादे से प्रभावित हुए कि वह बीटीसी के दायरे में आने वाले इलाकों में बेदखली अभियान नहीं चलाएंगे. अगर वह अब बीजेपी से हाथ मिलाते हैं, तो हमें इस क्षेत्र में कुछ सीटें जीतने का मौका दिखता है, बशर्ते यूपीपीएल हमारे साथ आए.

2021 के असम विधानसभा चुनाव में बीजेपी और यूपीपीएल के गठबंधन ने बीटीआर की तत्कालीन 11 में से आठ सीटें जीती थीं. परिसीमन के बाद, बीटीआर में चार नई विधानसभा सीटें जुड़ीं और कुल सीटों की संख्या 15 हो गई. 2021 में बीजेपी ने असम की 126 विधानसभा सीटों में से 60 सीटें जीती थीं. बीटीसी में बीपीएफ को सत्ता से बाहर करने के लिए बीजेपी और यूपीपीएल के बीच समझौता कराने में सरमा की अहम भूमिका थी.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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