नई दिल्ली: एनसीआर स्थित इस गैर-लाभकारी संस्था और इसके निदेशकों के परिसरों पर सोमवार को छापे मारे गए. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों ने कहा कि कथित तौर पर कंसल्टेंसी फीस के नाम पर मिले विदेशी फंड को पर्यावरण से जुड़े नैरेटिव को प्रभावित करने के लिए दान के रूप में इस्तेमाल किया गया.
ईडी ने नोएडा में सतत संपदा प्राइवेट लिमिटेड (SSPL) के कार्यालय और इस एनजीओ को चलाने वाले कार्यकर्ता दंपती हरजीत सिंह और ज्योति अवस्थी के गाजियाबाद स्थित घर की तलाशी ली. यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA), 1999 के तहत की गई, जो एजेंसी को संदिग्ध विदेशी रेमिटेंस की जांच की अनुमति देता है.
ईडी अधिकारियों के अनुसार, एसएसपीएल के वित्तीय रिकॉर्ड में 2021 के बाद अचानक बड़ा बदलाव दिखा, जब एनजीओ को विदेशी एनजीओ से भुगतान मिलने लगे. इन भुगतानों को कंसल्टेंसी से होने वाली आय के रूप में दिखाया गया.
एक ईडी अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया, “एसएसपीएल की बैलेंस शीट में 2021 से 2024 के बीच आय के दो स्रोत दिखाए गए हैं—एग्रो उत्पादों की बिक्री और कंसल्टेंसी सेवाएं—जिनकी कुल राशि लगभग 9.22 करोड़ रुपये है. इसमें से लगभग बराबर हिस्से में 4.57 करोड़ रुपये एग्रो उत्पादों की बिक्री से और 4.65 करोड़ रुपये कंसल्टेंसी सेवाओं से दिखाए गए हैं.”
अधिकारी ने कहा कि कंसल्टेंसी से होने वाली आय 2021 के बाद ही वित्तीय विवरणों में दिखाई देने लगी, इससे पहले एनजीओ घाटे में चल रही थी.
ईडी अधिकारी ने कहा, “कंपनी मुनाफे में आई, संभवतः 2021 से 2025 के बीच विदेशी संस्थाओं से मिले 6.52 करोड़ रुपये के फंड को आय के रूप में दिखाकर.”
दिप्रिंट ने ईडी के आरोपों पर हरजीत सिंह से फोन और व्हाट्सऐप के जरिए संपर्क किया है. उनके जवाब मिलने पर उसे जोड़ा जाएगा.
2016 में शुरू हुई इस एनजीओ ने खुद को जैविक कृषि उत्पाद बनाने वाली एग्रो आधारित संस्था बताया था, लेकिन ईडी सूत्रों के अनुसार, जैविक खेती को बढ़ावा देने के अपने घोषित उद्देश्य के बजाय एनजीओ ने कथित तौर पर भारत में पर्यावरण एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए विदेशी फंड का इस्तेमाल किया.
ईडी अधिकारियों का आरोप है कि विदेशी दानदाताओं द्वारा किए गए खुलासों की जांच से पता चला कि ये भुगतान फॉसिल फ्यूल-नॉन प्रोलिफरेशन ट्रीटी (FF-NPT) को आगे बढ़ाने और उसके समर्थन में नैरेटिव बनाने के लिए किए गए थे.
अधिकारियों के अनुसार, 2021 से जनवरी 2025 के बीच सिंह ने FF-NPT पहल में रणनीतिक सलाहकार और निदेशक के रूप में काम किया.
उन्होंने 2016 में एसएसपीएल की स्थापना की और पिछले साल जनवरी की शुरुआत में सतत संपदा क्लाइमेट फाउंडेशन बनाई. उनकी पत्नी और सह-संस्थापक ज्योति अवस्थी को जैविक खेती की पैरोकार के रूप में पहचान मिली है और वह टिकाऊ, जलवायु-लचीली कृषि को बढ़ावा देती रही हैं.
फॉसिल फ्यूल नॉन-प्रोलिफरेशन ट्रीटी एक प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय समझौता है, जिसका उद्देश्य जीवाश्म ईंधन की आपूर्ति को सीधे निशाना बनाकर जलवायु संकट को रोकना है. यह बाध्यकारी नहीं है, लेकिन यह नए जीवाश्म ईंधन प्रोजेक्ट्स की मंजूरी रोकने और मौजूदा उत्पादन को चरणबद्ध तरीके से खत्म करने की बात करता है. साथ ही, देशों को स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ने में वित्तीय और तकनीकी मदद देने पर जोर देता है.
हाल के वर्षों में इस संधि को राजनीतिक समर्थन मिला है. वानुअतु, तुवालु, फिजी, कोलंबिया, एंटीगुआ और बारबुडा, तिमोर-लेस्ते और अन्य कई छोटे द्वीपीय और जलवायु से प्रभावित देशों ने इस पहल का औपचारिक समर्थन किया है.
एसएसपीएल के खाते में आए कुल 6.52 करोड़ रुपये के विदेशी फंड में से 2.4 करोड़ रुपये बॉन (जर्मनी) स्थित एनजीओ क्लाइमेट एक्शन नेटवर्क से आए, जहां सिंह जुलाई 2022 से जनवरी 2024 तक बोर्ड सदस्य और ग्लोबल पॉलिटिकल स्ट्रैटेजी के प्रमुख रहे.
सूत्रों के मुताबिक, कनाडा स्थित NGO STAND.Earth ने कथित तौर पर SSPL के खाते में 2.04 करोड़ रुपये डाले, जबकि अमेरिकी मानव संसाधन कंपनी DEEL ने पिछले कुछ वर्षों में 1.35 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए.
सूत्रों ने यह भी बताया कि सिंह ने पिछले साल पाकिस्तान में हुए एक जलवायु सम्मेलन में हिस्सा लिया था. उन्होंने FF-NPT पहल के ग्लोबल एंगेजमेंट डायरेक्टर के रूप में ‘ब्रीद पाकिस्तान’ सम्मेलन में भाग लिया.
सोमवार की तलाशी के दौरान एजेंसी ने करीब 45 लीटर आयातित शराब भी बरामद की, जिसे स्थानीय आबकारी विभाग ने जब्त कर लिया. विभाग ने आबकारी नियमों के उल्लंघन को लेकर एफआईआर दर्ज करने सहित कार्रवाई शुरू कर दी है.
(नई दिल्ली से सौम्या पिल्लई के इनपुट के साथ)
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