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Thursday, 29 January, 2026
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तंबाकू उत्पादों पर कर वृद्धि से तस्करी का जोखिम, सरकार को राजस्व हानि की आशंका: विशेषज्ञ

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नयी दिल्ली, चार जनवरी (भाषा) विशेषज्ञों का कहना है कि तंबाकू पर उत्पाद शुल्क की नई संरचना के साथ करों में अभूतपूर्व वृद्धि से सिगरेट के अवैध व्यापार में उछाल आ सकता है। इसके चलते देश को महत्वपूर्ण कर राजस्व की हानि भी हो सकती है।

इस सप्ताह की शुरुआत में वित्त मंत्रालय ने केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम में संशोधनों को अधिसूचित किया। इसके तहत एक फरवरी से प्रभावी होने वाले प्रावधानों में सिगरेट की लंबाई के आधार पर प्रति 1,000 स्टिक 2,050 रुपये से 8,500 रुपये तक उत्पाद शुल्क लगाया गया है। यह शुल्क 40 प्रतिशत जीएसटी के अतिरिक्त होगा।

नतीजतन सिगरेट की विभिन्न श्रेणियों में कुल कर वृद्धि 60-70 प्रतिशत तक हो जाएगी। इस समय कुल कर भार लंबाई के आधार पर लगभग 50-55 प्रतिशत है।

थिंक चेंज फोरम के महासचिव रंगनाथ तन्नीरु ने कहा कि जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर के स्थान पर ‘अवगुण वाली वस्तुओं’ पर उत्पाद शुल्क लगाने के प्रस्तावित बदलाव से तंबाकू उत्पादों और सिगरेट की तस्करी बढ़ने की चिंता पैदा हो गई है।

उन्होंने कहा कि सिगरेट को अधिक महंगा बनाने से मांग कम नहीं होगी, बल्कि यह तस्करी और अवैध उत्पादों की ओर मुड़ जाएगी, जिससे राजस्व को नुकसान होगा।

उल्लेखनीय है कि भारत में अवैध तंबाकू की हिस्सेदारी कुल तंबाकू बाजार का लगभग 26 प्रतिशत है, जो इसे दुनिया भर में तस्करी वाले तंबाकू का चौथा सबसे बड़ा बाजार बनाती है।

एक अन्य ब्रोकरेज हाउस नोमुरा ने अपनी शोध रिपोर्ट में कहा कि सिगरेट पर उच्च करों का मकसद खपत कम करना है, लेकिन ऐसा करने से अवैध सिगरेट की बिक्री बढ़ जाती है।

टोबैको इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (टीआईआई) की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए जेफरीज ने कहा कि इस उद्योग निकाय ने सरकार से समीक्षा का अनुरोध किया है, क्योंकि कीमतों में बड़ा अंतर होने से अवैध सिगरेटों को बढ़ावा मिल सकता है।

भाषा पाण्डेय

पाण्डेय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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