नयी दिल्ली, चार जनवरी (भाषा) विश्लेषकों और उद्योग सूत्रों के अनुसार, वेनेजुएला के तेल क्षेत्र पर अमेरिकी नियंत्रण अथवा उसके पुनर्गठन से भारत को प्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है।
विश्लेषकों ने बताया कि इस घटनाक्रम के चलते काफी समय से लंबित भारत के लगभग एक अरब अमेरिकी डॉलर के बकाये की वसूली हो सकती है और प्रतिबंधों से प्रभावित वेनेजुएला में भारतीय संस्थाओं द्वारा संचालित तेल क्षेत्रों से कच्चे तेल का उत्पादन भी बढ़ सकता है।
उल्लेखनीय है कि भारत एक समय वेनेजुएला के भारी कच्चे तेल का प्रमुख आयातक था और अपने चरम काल में प्रतिदिन चार लाख बैरल से अधिक का आयात करता था। हालांकि, 2020 में अमेरिकी प्रतिबंधों और अनुपालन जोखिमों के कारण यह आयात बाधित हो गया था।
भारत की प्रमुख विदेश तेल अन्वेषण एवं उत्पादन कंपनी ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (ओवीएल) पूर्वी वेनेजुएला के ‘सैन क्रिस्टोबल’ तेल क्षेत्र का संयुक्त संचालन करती है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण आवश्यक तकनीक, उपकरण और सेवाओं तक पहुंच बाधित होने से वहां उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा और व्यावसायिक रूप से उपयोगी भंडार लगभग फंस गए।
वेनेजुएला सरकार ने इस परियोजना में ओवीएल की 40 प्रतिशत हिस्सेदारी पर 2014 तक देय 53.6 करोड़ अमेरिकी डॉलर का लाभांश अभी तक नहीं चुकाया है। इसके बाद की अवधि के लिए भी लगभग समान राशि बकाया है, किंतु ऑडिट की अनुमति न मिलने के कारण इन दावों का निपटान लंबित है।
विश्लेषकों के अनुसार, यदि अमेरिका वहां के तेल भंडार को अपनी निगरानी में लेता है, तो प्रतिबंधों में ढील दी जा सकती है। इसके बाद ओवीएल गुजरात और अन्य क्षेत्रों से रिग एवं अन्य उपकरण भेजकर उत्पादन में वृद्धि कर सकती है। इस समय यह उत्पादन घटकर मात्र 5,000 से 10,000 बैरल प्रतिदिन रह गया है।
अधिकारियों का अनुमान है कि यदि उन्नत उपकरण और अतिरिक्त तेल कुओं का उपयोग किया जाए, तो उत्पादन बढ़कर 80,000 से 1,00,000 बैरल प्रतिदिन हो सकता है। इसके लिए आवश्यक रिग ओएनजीसी के पास पहले से उपलब्ध हैं। अमेरिकी नियंत्रण का अर्थ यह भी है कि वैश्विक बाजार में वेनेजुएला से निर्यात शीघ्र बहाल हो सकता है, जिससे ओवीएल को अपने पुराने बकाये की वसूली में सहायता मिलेगी।
ओवीएल ने पूर्व में अमेरिकी वित्त मंत्रालय के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (ओएफएसी) से विशेष लाइसेंस के तहत प्रतिबंधों में छूट की मांग की थी, जैसा कि शेवरॉन को प्रदान किया गया था।
केप्लर के वरिष्ठ शोध विश्लेषक निखिल दुबे ने कहा कि प्रतिबंधों में ढील से व्यापार प्रवाह तेजी से बहाल हो सकता है और वेनेजुएला का कच्चा तेल फिर से भारतीय रिफाइनरियों तक पहुंच सकता है। रिलायंस इंडस्ट्रीज, नयारा एनर्जी, इंडियन ऑयल और एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी जैसी भारतीय रिफाइनरियों के पास भारी कच्चे तेल को संसाधित करने की उन्नत क्षमता मौजूद है।
विश्लेषकों के अनुसार वेनेजुएला के तेल की वापसी से वैश्विक बाजार में कीमतों में स्थिरता आएगी और भारत जैसे आयातक देशों को रणनीतिक लाभ मिलेगा।
भाषा योगेश पाण्डेय
पाण्डेय
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