नई दिल्ली: हरियाणा में ‘दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना’ लागू होने के तीन महीने बाद, जिसमें पात्रता घटाई गई और संभावित लाभार्थियों की संख्या 80 लाख से घटकर 10 लाख रह गई, नायब सैनी कैबिनेट ने गुरुवार को योजना में एक और कटौती को मंजूरी दी. पात्र महिलाओं को मिलने वाली 2,100 रुपये की मासिक राशि को दो हिस्सों में बांट दिया गया, जिसमें आधी रकम राज्य द्वारा संचालित जमा खाते में लॉक कर दी गई.
‘लाडो लक्ष्मी योजना’ के लाभार्थियों की संख्या पहले ही कम हो चुकी थी. इसकी वजह सितंबर 2025 की आधिकारिक अधिसूचना में उम्र, पारिवारिक आय और निवास से जुड़ी सख्त शर्तें, साथ ही सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का दोहरा लाभ रोकने के लिए किए गए अपवाद थे.
इसके बावजूद, नायब सैनी सरकार के मुताबिक, पिछले दो महीनों में कम से कम 10 लाख महिलाओं ने इस योजना के लिए पंजीकरण कराया है.
गुरुवार के संशोधनों में योजना को सामाजिक विकास के परिणामों से भी जोड़ा गया, जिससे इसका दायरा बढ़ा. अब वे माताएं भी पात्र होंगी जिनके बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं और कक्षा 10 या 12 की बोर्ड परीक्षाओं में 80 प्रतिशत से ज्यादा अंक लाते हैं, या कक्षा 1 से 4 में निपुण भारत मिशन के तहत कक्षा-स्तर की दक्षता हासिल करते हैं, या वे माताएं जो महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा सत्यापित तरीके से अपने बच्चों को गंभीर या मध्यम तीव्र कुपोषण से सफलतापूर्वक उबारती हैं. इस अतिरिक्त पात्रता के लिए सरकार ने वार्षिक आय सीमा 1.8 लाख रुपये तय की है, जबकि अन्य लाभार्थियों के लिए आय सीमा 1 लाख रुपये है. डोमिसाइल और निवास से जुड़ी शर्तें सभी पर लागू रहेंगी.
राशि को दो हिस्सों में बांटने के फैसले पर विपक्ष ने कड़ी आलोचना की है. कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने इसे “वादाखिलाफी” कहा.
दिप्रिंट से बात करते हुए हुड्डा ने गुरुवार को कहा कि चुनाव से पहले बड़े वादे करना और सत्ता में आने के बाद उन्हें कम करना भाजपा की “पुरानी आदत” है.
उन्होंने कहा, “भाजपा चुनाव जीतने के लिए कोई भी वादा करने को तैयार रहती है, लेकिन सत्ता में आते ही पार्टी अपने वादे भूल जाती है. भाजपा ने 2024 के विधानसभा चुनाव से पहले ‘लाडो लक्ष्मी योजना’ के तहत 2,100 रुपये प्रति माह देने का वादा किया था. पार्टी ने इसे लागू करने में एक साल लगा दिया और जब लागू किया तो ऐसी शर्तें लगा दीं कि एक करोड़ महिलाओं में से सिर्फ पांच लाख ही पात्र हो सकीं.”
उन्होंने आगे कहा, “अब भी, गुरुवार को सरकार द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार, हरियाणा की कुल महिलाओं में से केवल 10 प्रतिशत यानी 10 लाख ने योजना के लिए पंजीकरण कराया है और जैसे यह कम था, सरकार ने अब लाभ की राशि आधी कर दी है और बाकी रकम 2029 के चुनाव के बाद आने वाली सरकार पर छोड़ दी है.”
महिला अधिकार कार्यकर्ता जागमती सांगवान ने गुरुवार के संशोधनों को सत्तारूढ़ भाजपा की “सोची-समझी रणनीति” बताया, जिसका मकसद चुनाव से पहले माहौल बनाना है. पांच साल की परिपक्वता सीमा का मतलब है कि यह राशि 2029 के चुनाव से ठीक पहले या उसी दौरान मिलेगी.
अखिल भारतीय जनवादी महिला संघ (AIDWA) की उपाध्यक्ष सांगवान के अनुसार, वक्त ऐसा है कि यह चुनाव से पहले बड़ा फायदा दे सकता है. उन्होंने दिप्रिंट से कहा, “संशोधन से लगता है कि सरकार 2029 के विधानसभा चुनाव से पहले सरकारी आरडी योजनाओं में जमा राशि लाभार्थियों को देना चाहती है. भाजपा सरकार ने शायद बिहार से सीख ली है, जहां विधानसभा चुनाव से पहले सरकार द्वारा हर महिला को 10,000 रुपये देने के बाद बड़ी संख्या में महिलाओं ने सत्तारूढ़ गठबंधन को वोट दिया.”
मुख्यमंत्री नायब सैनी ने गुरुवार के संशोधनों को पहले घोषित लाडो लक्ष्मी योजना का विस्तार बताया. कैबिनेट बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में सैनी ने कहा कि सरकार ने सामाजिक विकास से जुड़ी नई श्रेणियां जोड़ी हैं.
सैनी ने कुल 2,100 रुपये में से 1,000 रुपये को सरकारी आरडी योजना में जमा करने को सही ठहराते हुए कहा कि इससे महिलाओं को नया काम शुरू करने में मदद मिलेगी.
सैनी ने यह भी कहा कि अगर किसी लाभार्थी की मृत्यु हो जाती है, तो राशि तुरंत उसके नामित व्यक्ति को दे दी जाएगी.
जब भाजपा ने 2024 के विधानसभा चुनाव से पहले अपना संकल्प पत्र जारी किया था, तब उसने “हरियाणा की सभी महिलाओं” को 2,100 रुपये प्रति माह देने का वादा किया था—यानी लगभग 95.77 लाख महिला मतदाता, जिनमें से करीब 80 लाख की उम्र 18 से 60 साल के बीच थी.
लेकिन 15 सितंबर को जब योजना की अधिसूचना जारी हुई, तो इसका दायरा काफी सिमट चुका था. अधिसूचना में न्यूनतम उम्र 23 साल, परिवार सूचना डाटाबेस रिपॉजिटरी (FIDR) के अनुसार वार्षिक आय सीमा 1 लाख रुपये और 15 साल की निवास शर्त तय की गई. साथ ही, वृद्धावस्था पेंशन, विधवा सहायता, दिव्यांग भत्ता और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ लेने वाली महिलाओं को बाहर कर दिया गया.
इसका असर तुरंत दिखा. 80 लाख महिलाओं की जगह, योजना केवल 20 लाख महिलाओं तक सीमित रह गई. नवंबर में जब मुख्यमंत्री सैनी ने पहली किस्त जारी की, तब केवल 5.22 लाख महिलाओं को ही पैसा मिला था. गुरुवार तक 10 लाख महिलाओं ने पंजीकरण कराया—जो अब भी राज्य की वयस्क महिला आबादी का सिर्फ 10 प्रतिशत है.
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