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Saturday, 3 January, 2026
होमदेशइंदौर में दूषित पानी के मामले पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगी रिपोर्ट

इंदौर में दूषित पानी के मामले पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगी रिपोर्ट

यह आदेश इंदौर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रितेश इनानी द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान दिया गया. बुधवार को डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए सरकार को अगली सुनवाई में पूरा डेटा पेश करने का निर्देश दिया. मामले की अगली सुनवाई 2 जनवरी को होगी.

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इंदौर: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से बीमार पड़े लोगों और मौतों के मामले में राज्य सरकार से रिपोर्ट तलब की है. कोर्ट ने सरकार से इस घटना में संक्रमित लोगों और मृतकों की संख्या से जुड़ी पूरी जानकारी मांगी है.

यह आदेश इंदौर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रितेश इनानी द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान दिया गया. बुधवार को डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए सरकार को अगली सुनवाई में पूरा डेटा पेश करने का निर्देश दिया. मामले की अगली सुनवाई 2 जनवरी को होगी.

रितेश इनानी ने कहा कि हाल के दिनों में भागीरथपुरा इलाके में एक गंभीर घटना हुई, जहां नगर निगम द्वारा सप्लाई की जा रही नर्मदा जल लाइन में दूषित पानी मिल गया. इसके कारण कई लोग गंभीर रूप से बीमार हो गए और कुछ लोगों की मौत भी हो गई. उन्होंने बताया कि जनहित याचिका में इंदौरवासियों को साफ पेयजल उपलब्ध कराने और प्रभावित लोगों को मुफ्त व उचित इलाज देने की मांग की गई है.

इनानी ने कहा कि अगली सुनवाई में सरकार को यह बताना होगा कि कितने मरीज अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं, उन्हें किस तरह का इलाज दिया जा रहा है और इस घटना से जुड़ी कुल कितनी मौतें हुई हैं.

इस बीच बुधवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दूषित पानी पीने से बीमार हुए लोगों से मुलाकात की. उन्होंने अस्पतालों का दौरा कर मरीजों की हालत जानी और इलाज की व्यवस्थाओं की समीक्षा की. मुख्यमंत्री ने प्रभावित लोगों से बातचीत भी की और अधिकारियों को सभी मरीजों को समय पर और उचित इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए.

मरीजों से मिलने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा, “मैं चार-पांच अस्पतालों में गया और इलाज करा रहे सभी मरीजों से मिला. सभी की हालत स्थिर है और अस्पतालों में सही इलाज दिया जा रहा है. लापरवाही बरतने वाले संबंधित अधिकारी के खिलाफ पहले ही कार्रवाई की जा चुकी है. अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे, मंत्री और महापौर मौके पर हैं और हालात की फिर से समीक्षा कर रहे हैं. सरकार किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी, खासकर पानी सप्लाई से जुड़ी शिकायतों के मामलों में.”

मुख्यमंत्री ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए गहन जांच कराने की बात भी कही. उन्होंने मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने और सभी प्रभावित लोगों को मुफ्त इलाज देने की घोषणा की.

इससे पहले मुख्यमंत्री के निर्देश पर लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है. कार्रवाई के तहत दो अधिकारियों को निलंबित किया गया है, जबकि एक अधिकारी को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है.

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