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Wednesday, 7 January, 2026
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हरियाणा को मिला नया DGP: 1992 बैच के IPS अजय सिंघल, विजिलेंस और एंटी-करप्शन ब्यूरो के प्रमुख

सिंघल ने अपने करियर का बड़ा हिस्सा हरियाणा में बिताया है और उन्होंने कई ऑपरेशनल और प्रशासनिक पदों पर काम किया है. उनकी नियुक्ति उसी दिन हुई, जिस दिन उनके पूर्ववर्ती ओ.पी. सिंह रिटायर हुए.

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गुरुग्राम: संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा तीन नामों का पैनल भेजे जाने के कुछ ही घंटों बाद, हरियाणा सरकार ने बुधवार को अजय सिंघल को नया पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) नियुक्त कर दिया. इसके साथ ही ओ.पी. सिंह के रिटायर होने के बाद डीजीपी को लेकर चल रही कई हफ्तों की अटकलें खत्म हो गईं.

अजय सिंघल, हरियाणा कैडर के 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, कार्यभार संभालने की तारीख से वे कम से कम दो साल तक इस पद पर रहेंगे.

इससे पहले बुधवार सुबह हुई बैठक के बाद, यूपीएससी ने डीजीपी पद के लिए तीन अधिकारियों को सूचीबद्ध किया था—शत्रुजीत सिंह कपूर (1990 बैच), अजय सिंघल (1992 बैच) और आलोक मित्तल (1993 बैच) और इनके नाम राज्य सरकार को भेजे गए थे.

ये नाम इसलिए भेजे गए क्योंकि 16 दिसंबर को राज्य सरकार ने यूपीएससी से डीजीपी पद के लिए योग्य अधिकारियों का पैनल भेजने को कहा था.

नए डीजीपी की नियुक्ति का सरकारी आदेश, गृह विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव सुमिता मिश्रा द्वारा जारी किया गया. यह आदेश उसी दिन जारी हुआ, जिस दिन ओ.पी. सिंह ने 33 साल की सेवा के बाद सेवानिवृत्ति ली. ओ.पी. सिंह भी 1992 बैच के अधिकारी थे. उन्होंने उसी दिन सोशल मीडिया पर अपना विदाई पत्र साझा किया था, जिसमें उन्होंने टेनीसन को उद्धृत करते हुए 2026 में अपराध बढ़ने की चेतावनी दी थी.

एफआईआर के साए में भी कपूर का नाम पैनल में

यूपीएससी पैनल में शत्रुजीत सिंह कपूर का नाम शामिल होना खास बात रही. कपूर, जो पैनल में सबसे वरिष्ठ अधिकारी हैं, उनके खिलाफ वाई. पुरन कुमार मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद उन्हें छुट्टी पर भेज दिया गया था. इसी महीने उन्हें डीजीपी पद से हटाया गया था, जब यूपीएससी ने कहा था कि डीजीपी पद के लिए पैनल तभी बनाया जा सकता है, जब पद खाली होने वाला हो.

कपूर का पैनल में शामिल होना दिखाता है कि यूपीएससी ने उन्हें योग्य माना, लेकिन राज्य सरकार ने स्पष्ट रूप से उन्हें नज़रअंदाज करना चुना.

यूपीएससी की प्रक्रिया

यह नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह केस में तय की गई अनिवार्य प्रक्रिया के अनुसार हुई है. इसके तहत यूपीएससी डीजीपी पद के लिए अधिकारियों का पैनल तैयार करता है और फिर राज्य सरकार उस पैनल में से एक नाम चुनती है.

हरियाणा सरकार ने 16 दिसंबर को योग्य डीजीपी अधिकारियों के नाम यूपीएससी को भेजे थे और आयोग ने 31 दिसंबर को बैठक कर पैनल को अंतिम रूप दिया.

अजय सिंघल कौन हैं?

57-वर्षीय अजय सिंघल, 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं. उन्होंने अपने करियर का अधिकांश समय हरियाणा में बिताया है और कई ऑपरेशनल व प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाई हैं.

उन्होंने बी.टेक किया है. फिलहाल वे हरियाणा में विजिलेंस और एंटी-करप्शन ब्यूरो के महानिदेशक के पद पर कार्यरत थे.

हरियाणा के रेवाड़ी जिले से आने वाले अजय सिंघल पुलिस विभाग में अपने सख्त और साफ-सुथरे कामकाज के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने राज्य के अलग-अलग हिस्सों में संवेदनशील पदों पर काम किया है.

तीन दशक से अधिक के अपने पुलिस करियर में, सिंघल ने उन जिलों में भी जिम्मेदारी संभाली है, जहां कानून-व्यवस्था की बड़ी चुनौतियां रही हैं, जहां अपराध ज्यादा रहे हैं और जहां सांप्रदायिक संवेदनशीलता रही है, साथ ही राज्य मुख्यालय में भी उन्होंने काम किया है.

अजय सिंघल का कार्यकाल अहम माना जा रहा है, क्योंकि वे ऐसे समय में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जब उनके पूर्ववर्ती ने 2026 में अपराध बढ़ने की आशंका जताई है. साथ ही, उन्हें पुलिस बल के आधुनिकीकरण और सामुदायिक पुलिसिंग को लागू करने की जिम्मेदारी भी मिलेगी, जिसकी वकालत ओ.पी. सिंह ने अपने कार्यकाल में की थी.

अपने पूर्ववर्ती ओ.पी. सिंह के विपरीत, जो सोशल मीडिया पर खुले पत्र लिखकर पुलिस बल और जनता से संवाद करते थे, अजय सिंघल को एक पारंपरिक अधिकारी माना जाता है, जो सुर्खियों से दूर रहकर काम करना पसंद करते हैं.

वे अनुशासन को लेकर सख्त माने जाते हैं और जूनियर अधिकारियों के लिए आसानी से उपलब्ध रहने की उनकी छवि है.

अजय सिंघल का करियर अब तक बड़े विवादों से लगभग मुक्त रहा है. उन्होंने खुफिया विभाग, अपराध जांच और जिला पुलिसिंग जैसे क्षेत्रों में काम किया है. चुनाव ड्यूटी और सांप्रदायिक तनाव जैसी संवेदनशील कानून-व्यवस्था स्थितियों को संभालने का उनका अनुभव काफी उपयोगी माना जाता है.

उन्होंने जिन प्रमुख पदों पर काम किया है, उनमें शामिल हैं: महानिदेशक, मानवाधिकार एवं वाद-विवाद (दिसंबर 2025 तक); अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP), रेलवे और कमांडो, नवंबर 2023 में नियुक्त, साथ ही ADGP, हरियाणा मानवाधिकार आयोग का अतिरिक्त प्रभार; ADGP, स्टेट क्राइम ब्रांच (मुख्यालय), पंचकूला; ADGP, एंटी-करप्शन ब्यूरो;
ADGP, महिलाओं के खिलाफ अपराध; और अतिरिक्त महानिदेशक, स्टेट विजिलेंस ब्यूरो.

उन्होंने कई मामलों में केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर भी काम किया है और उनकी समन्वय क्षमता अच्छी मानी जाती है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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