हाल ही में एपस्टीन फाइलों का जारी होना—हालांकि, यह पूरी नहीं है, इस बात का एक और उदाहरण है कि आज अमेरिका की राजनीति में एलीट-विरोधी पॉपुलिज़्म किस तरह आकार ले रहा है. इस साल बहुत कम मुद्दों ने इतनी दिलचस्पी और भावनाएं पैदा की हैं. एपस्टीन फाइल्स की राजनीति आखिर है क्या? यह कितनी दूर तक जा सकती है?
जेफरी एपस्टीन, न्यूयॉर्क का एक मृत फाइनेंसर, जिसे जुलाई 2019 में नाबालिगों की सेक्स तस्करी के संघीय आरोपों में गिरफ्तार किया गया था. दोषी ठहराए जाने से पहले ही अगस्त 2019 में उसकी जेल की कोठरी में मौत हो गई. उसकी मौत को आधिकारिक तौर पर फांसी लगाकर आत्महत्या बताया गया.
इससे पहले भी उस पर आपराधिक आरोप लगे थे. 2008 में, एक अभिभावक ने शिकायत की थी कि एपस्टीन ने उनकी 14 साल की बेटी का यौन शोषण किया है. इसके बाद उसे यौन अपराधों का दोषी ठहराया गया, लेकिन “प्ली बार्गेन” के जरिए, जिसमें आरोपी लंबे और महंगे मुकदमे की बजाय कम आरोप कबूल करने पर हल्की सज़ा पाता है—वह सिर्फ 13 महीने जेल में रहा. रिहा होने के बाद, वह फिर से सेक्स तस्करी में लौट आया, जब तक कि जुलाई 2019 में संघीय आरोपों में उसकी गिरफ्तारी नहीं हुई और करीब एक महीने बाद उसकी मौत हो गई.
एपस्टीन राजनीति का इतना बड़ा मुद्दा क्यों बन गया? उसके आचरण और अपराधों को पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया पर ही क्यों नहीं छोड़ा गया?
एप्स्टीन सर्कल
मुख्य राजनीतिक मुद्दा उन एलीट लोगों का घेरा है, जो एप्स्टीन से जुड़े थे. पॉपुलिस्ट “मेक अमेरिका ग्रेट अगेन” (MAGA) आंदोलन के लिए जिसने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता में आने का पूरी मजबूती से समर्थन किया था—एप्स्टीन उस दंडमुक्ति की संस्कृति का प्रतीक था, जिसका फायदा तटीय एलीट वर्ग राजनीति और समाज में उठाता रहा, भले ही उनके नैतिक पतन और कानूनी अपराध मौजूद थे.
2024 के राष्ट्रपति चुनाव प्रचार के दौरान ट्रंप ने वादा किया था कि अमेरिका की शीर्ष कानून प्रवर्तन एजेंसियों—अमेरिकी न्याय विभाग (डीओजे) और फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (एफबीआई) के पास मौजूद एप्स्टीन फाइल्स सार्वजनिक की जाएंगी. हालांकि, पद संभालने के कुछ महीने बाद ट्रंप की अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी का रुख डगमगा गया. मई 2025 में उन्होंने कहा कि इन फाइलों में एप्स्टीन की क्लाइंट लिस्ट है, लेकिन जुलाई में डीओजे ने कहा कि फाइलों में कोई क्लाइंट लिस्ट नहीं है.
यह तर्क दिया गया कि अमेरिका को फिर से महान बनाने के लिए एप्स्टीन फाइलों के बजाय कई ज़रूरी कामों पर पूरा ध्यान देने की ज़रूरत है. इनमें तथाकथित डीप स्टेट पर हमला और सरकार का पुनर्गठन; अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करना, खासकर टैरिफ के जरिए मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना और घरेलू निवेश को वापस लाना; लैटिन अमेरिका से मनमाने आप्रवासन रोकने के लिए दक्षिणी सीमा को बंद करना और संसाधनों की खपत करने वाली और आत्मघाती साबित हो रही अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय भागीदारी से काफी हद तक, अगर पूरी तरह नहीं, तो पीछे हटना शामिल था. इसके लिए अमेरिकी विदेश नीति को चुनिंदा मुद्दों और चुनिंदा क्षेत्रों पर फिर से केंद्रित करने की बात कही गई.
लेकिन आज रिपब्लिकन पार्टी को ऊर्जा देने वाला MAGA आंदोलन इससे संतुष्ट नहीं हुआ. ऐसा लगता है कि एप्स्टीन के सैकड़ों पीड़ितों में से दर्जनों को विभिन्न संगठनों ने संगठित किया. MAGA “भ्रष्ट डेमोक्रेटिक एलीट्स” और उनके वैश्विक नेटवर्क वाले सहयोगियों को पकड़ना चाहता था, जो दोनों तटों—खासकर न्यूयॉर्क और कैलिफोर्निया में बसे थे, जिन्होंने खुद को अमीर बनाया और ऐशो-आराम की ज़िंदगी जी, जबकि मिडिल अमेरिका कमज़ोर होता चला गया. MAGA का मानना था कि एप्स्टीन डेमोक्रेटिक पार्टी के संरक्षण के बिना फल-फूल नहीं सकता था, क्योंकि यही पार्टी इन राज्यों और अमेरिका के सबसे बड़े शहरों—जैसे न्यूयॉर्क, सैन फ्रांसिस्को और लॉस एंजिलिस पर शासन करती है.
दूसरी ओर, डेमोक्रेट्स को यकीन था कि एप्स्टीन के नेटवर्क में रिपब्लिकन भी शामिल होंगे, जिनमें ट्रंप भी हो सकते हैं. ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने एप्स्टीन के साथ सामाजिक मेलजोल रखा था, लेकिन उसके दोषी ठहराए जाने के बाद उन्होंने दूरी बना ली. डेमोक्रेट्स को इस पर पूरा भरोसा नहीं था. अमेरिका की टकराव वाली राजनीति को देखते हुए, उन्हें ट्रंप के संबंधों की जांच करना अपने हित में लगा, ताकि संभव हो तो उन्हें कमजोर किया जा सके.
आखिरकार, प्रतिनिधि सभा में द्विदलीय सहयोग का एक दुर्लभ क्षण देखने को मिला, जो आज के ध्रुवीकृत दौर में लगभग असंभव सा लगता है. लगभग सर्वसम्मति से एक कानून पारित किया गया, जिसके तहत अमेरिकी न्याय विभाग को कानून लागू होने के 30 दिनों के भीतर, यानी 19 दिसंबर तक, एप्स्टीन फाइलें जारी करनी थीं. MAGA के दबाव के आगे झुकते हुए ट्रंप ने इस विधेयक पर हस्ताक्षर कर इसे कानून बना दिया.
अब तक जारी किए गए ईमेल और तस्वीरों से यह साफ झलकता है कि अमेरिका में सत्ता और संपत्ति किस तरह एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं और आने वाले हफ्तों में शायद और भी खुलासे हों. एप्स्टीन का दायरा राजनीति, कारोबार, लोकप्रिय संस्कृति, पत्रकारिता और शिक्षा जगत की ऊंचाइयों तक फैला हुआ था, और इसमें ब्रिटिश शाही परिवार तक का संपर्क शामिल था.
यह स्पष्ट करना ज़रूरी है कि ऊपर किया गया दावा क्या कहता है. इसका यह मतलब नहीं है कि एप्स्टीन से जुड़े ये एलीट लोग जो अलग-अलग क्षेत्रों से थे—ज़रूरी तौर पर आपराधिक गतिविधियों में शामिल थे. हालांकि, कुछ लोग, जैसे अब दोषी ठहराई जा चुकी गिस्लेन मैक्सवेल (जो एक दिवंगत ब्रिटिश मीडिया मालिक की बेटी हैं), ज़रूर शामिल थीं.
बड़ा दावा यह है कि इस एलीट घेरे ने एप्स्टीन से दोस्ती की, उसकी मेहमाननवाजी ली या चाही और उससे वित्तीय मदद मांगी या स्वीकार की. कुछ मामलों में यह सब उसके 2008 में बाल यौन अपराधी के रूप में दोषी ठहराए जाने के बाद भी होता दिखा. कम से कम इतना तो तय है कि दोषसिद्धि से पहले या बाद में एप्स्टीन के साथ गहरे सामाजिक संबंध रहे.
एप्स्टीन से जुड़े सितारों की इस पूरी गैलेक्सी पर नज़र डालिए. राजनीति में 42वें अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन, डोनाल्ड ट्रंप और MAGA के प्रमुख चेहरे स्टीव बैनन शामिल हैं. कारोबार जगत में माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक और दुनिया के सबसे अमीर लोगों में से एक बिल गेट्स और लिंक्डइन के को-फाउंडर रीड हॉफमैन हैं. पॉप कल्चर में माइकल जैक्सन, मिक जैगर, डायना रॉस, वुडी एलन और केविन स्पेसी के नाम आते हैं. पत्रकारिता में न्यूयॉर्क टाइम्स के प्रसिद्ध कॉलमिस्ट डेविड ब्रूक्स शामिल हैं.
डार्क एकेडमिया
हाल के दिनों में अमेरिकी विश्वविद्यालयों में एप्स्टीन के दोस्तों और सहयोगियों पर सबसे ज्यादा फोकस गया है. इसकी एक वजह यह भी है कि अमेरिका के विश्वविद्यालय कितने ताकतवर हैं और देश में उनका क्या दर्जा है.
दो सबसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में एप्स्टीन ने प्रभावशाली लोगों से रिश्ते बनाए. मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) में उसका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर मीडिया लैब से संबंध था; इसके निदेशक जॉय इटो ने 2019 में इस्तीफा दे दिया, जब यह वित्तीय रिश्ता सामने आया.
इस साल हमें यह भी पता चला कि उसका रिश्ता नोम चॉम्स्की से था, जो एक दिग्गज भाषाविद हैं और 2002 तक MIT में पढ़ाते थे. भाषाविज्ञान में अपने शोध के अलावा, चॉम्स्की अमेरिकी विदेश नीति की वामपंथी आलोचना के लिए भी दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं.
लेकिन सभी शैक्षणिक संस्थानों में से, हार्वर्ड में, जो दुनिया का सबसे अमीर और शायद सबसे ताकतवर शैक्षणिक संस्थान है—एप्स्टीन के रिश्ते सबसे ज्यादा फले-फूले. उसने शोध के लिए लाखों डॉलर दिए. वह हार्वर्ड लॉ स्कूल के पूर्व प्रोफेसर एलन डर्शोविट्ज़ के काफी करीब आया, जो 2008 में उसके वकील भी थे.
अमेरिका के पूर्व वित्त मंत्री लैरी समर्स के साथ एप्स्टीन की दोस्ती भी खास तौर पर चर्चा में रही है. कई वर्षों तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध अर्थशास्त्र के प्रोफेसर रहने के अलावा, समर्स ने हार्वर्ड और वॉशिंगटन—दोनों जगह अहम भूमिकाएं निभाईं. वह हार्वर्ड विश्वविद्यालय के अध्यक्ष भी रहे. 2006 में इस पद से इस्तीफा देने के बाद, उन्हें यूनिवर्सिटी प्रोफेसर बनाया गया, जो हार्वर्ड में किसी फैकल्टी को दिया जाने वाला सबसे ऊंचा खिताब है.
दोषी ठहराए जाने के बाद भी समर्स एप्स्टीन के संपर्क में बने रहे. वह एप्स्टीन के निजी विमान से उसके निजी द्वीप पर उससे मिलने गए. बताया जाता है कि उन्होंने हार्वर्ड में अपनी पत्नी के प्रोजेक्ट के लिए फंड की मांग की और यह सलाह भी मांगी कि एक पूर्व छात्रा—जिसके वह मेंटर रह चुके थे, उनके साथ अपने रोमांटिक रिश्ते को कैसे आगे बढ़ाया जाए.
ये खुलासे इतने नुकसानदेह थे कि समर्स को हार्वर्ड में पढ़ाने से पीछे हटना पड़ा और कई बेहद लाभदायक कॉरपोरेट बोर्ड पदों से भी इस्तीफा देना पड़ा.
लेकिन बड़ा सवाल अब भी बना हुआ है. अमेरिका में अमीर लोग अक्सर निजी विश्वविद्यालयों से संपर्क रखते हैं—शोध और शिक्षा को समर्थन देने के लिए या बौद्धिक सम्मान पाने के लिए—अक्सर अच्छे इरादों से, लेकिन हमेशा नहीं. अमेरिका के निजी विश्वविद्यालय प्राइवेट फंड के बिना चल ही नहीं सकते, लेकिन फिर सवाल यह है कि इतने सारे अकादमिक सितारे, जिन्हें कई अन्य स्रोतों से संसाधन मिल सकते थे, एक ऐसे व्यक्ति की ओर क्यों खिंचे, जिसे बाल यौन अपराध में दोषी ठहराया गया था? इसका पूरा जवाब शायद केवल मनोवैज्ञानिक ही दे सकते हैं. लेकिन इस क्षेत्र से बाहर के लोगों के लिए, यह एक बहुत बड़ी नैतिक चूक है. शैक्षणिक काम के लिए वित्तीय मदद ली जा सकती है, लेकिन यह अनदेखा नहीं किया जा सकता कि मदद देने वाला कौन है.
कुल मिलाकर, एप्स्टीन प्रकरण ने अमेरिका की एलीट राजनीति, कारोबार और समाज के अंधेरे पहलू को उजागर कर दिया है. आने वाले हफ्तों में और सबूत सामने आने की संभावना है. यह साफ नहीं है कि ये सामग्री कितनी दूर तक जाएगी और इसके खुलासों से कौन-कौन अपनी साख खो सकता है. उतना ही, बल्कि उससे भी ज्यादा अहम सवाल यह है कि अगर MAGA के अपने कुछ सितारे दागदार होते हैं, तो क्या यह आंदोलन एलीट भ्रष्टाचार को उजागर करने के अपने अभियान पर कायम रहेगा या नहीं—यह भी अभी स्पष्ट नहीं है.
(आशुतोष वार्ष्णेय इंटरनेशनल स्टडीज़ और सोशल साइंसेज़ के सोल गोल्डमैन प्रोफेसर और ब्राउन यूनिवर्सिटी में पॉलिटिकल साइंस के प्रोफेसर हैं. व्यक्त विचार निजी हैं.)
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