जयपुर, 22 दिसंबर (भाषा) कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने सोमवार को आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने “सुधार” के नाम पर लोकसभा में एक और विधेयक पारित कर दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना ‘मनरेगा’ को खत्म कर दिया। उन्होंने केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार पर ग्रामीण गरीबों से काम का अधिकार छीनने का आरोप लगाया।
रंजन ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि ये बदलाव ‘मनरेगा की हत्या’ के बराबर हैं और यह दुनिया के सबसे बड़े रोजगार गारंटी कार्यक्रम को कमजोर करने की जानबूझकर की गई कोशिश है।
उन्होंने महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के नाम व व्यवस्था में अन्य बदलावों की ओर इशारा करते हुए कहा, “यह महात्मा गांधी की सोच को खत्म करने और सबसे गरीब भारतीयों से काम का अधिकार छीनने की जानबूझकर की गई कोशिश है।”
रंजन ने कहा, “मनरेगा’ गांधीजी के ग्राम स्वराज, काम की गरिमा और विकेन्द्रित विकास के सपने का जीता-जागता उदाहरण है, लेकिन इस सरकार ने न सिर्फ उनका नाम हटा दिया है, बल्कि 12 करोड़ मनरेगा मजदूरों के अधिकारों को भी बेरहमी से कुचला है।”
उन्होंने कहा, “अब तक मनरेगा संविधान के अनुच्छेद 21 से मिलने वाली अधिकारों पर आधारित गारंटी थी। नया ढांचा इसे सशर्त, केंद्र द्वारा नियंत्रित की जाने वाली योजना से बदल देता है, जो मजदूरों के लिए सिर्फ एक भरोसा है जिसे राज्य लागू करेंगे।”
सांसद ने कहा, “जो कभी काम करने का सही अधिकार था, उसे अब एक प्रशासनिक मदद में बदला जा रहा है और जो पूरी तरह से केंद्र की मर्जी पर निर्भर है।”
उन्होंने कहा, “यह कोई सुधार नहीं बल्कि गांव के गरीबों के लिए एक संवैधानिक वादे को वापस लेना है।”
रंजन ने दावा किया कि मौजूदा भाजपा सरकार द्वारा इस योजना के खिलाफ उठाए गए अनेक कदमों की वजह से गत पांच साल में योजना के तहत हर साल मुश्किल से 50-55 दिन काम मिल पा रहा है जबकि योजना 100 दिन के काम की गारंटी देती है।
उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा के तहत राज्यों पर वित्तीय बोझ डालने का भी आरोप लगाया।
सांसद ने कहा, “राज्य सरकारों को 40 फीसदी खर्च उठाने के लिए मजबूर किया जाएगा। नियमों, ब्रांडिंग और क्रेडिट पर पूरा नियंत्रण केंद्र के पास रहेगा। यह वित्तीय धोखा है। केंद्र द्वारा संघवाद को कमजोर करने का एक अनूठा उदाहरण है।”
कांग्रेस नेता ने कहा कि यह कदम महात्मा गांधी के आदर्शों का सीधा अपमान है और ग्रामीण रोजगार पर खुली जंग का ऐलान है।
उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड बेरोजगारी से भारत के युवाओं को तबाह करने के बाद मोदी सरकार अब गरीब ग्रामीण परिवारों की बची हुई आखिरी आर्थिक सुरक्षा को निशाना बना रही है।
रंजन ने कहा, “हम सड़क से लेकर संसद तक, हर मंच पर इस जन-विरोधी, मजदूर-विरोधी और संघ-विरोधी हमले का विरोध करेंगे।”
भाषा पृथ्वी जितेंद्र
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