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Thursday, 8 January, 2026
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ईडी ने ऑनलाइन मंच के खिलाफ फेमा उल्लंघन पर समझौता आदेश जारी किया

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नयी दिल्ली, 19 दिसंबर (भाषा) ‘कारोबार सुगमता’ को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक ऑनलाइन मंच का संचालन करने वाली कंपनी के खिलाफ एक साल से चल रहे फेमा उल्लंघन मामले में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा जारी किए गए ‘कंपाउंडिंग ऑर्डर’ (समझौता आदेश) को हरी झंडी दे दी है।

नियामक संदर्भ में समझौता आदेश का अर्थ किसी प्राधिकरण द्वारा लिया गया ऐसा औपचारिक निर्णय है जिसके तहत दोषी को अभियोजन का सामना करने के बजाय मौद्रिक जुर्माना अदा करने की अनुमति देकर मामले का निपटारा किया जाता है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के एक बयान के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक ने 12 अक्टूबर को विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 (फेमा) की धारा 15 के तहत ‘नियरबाय इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ के खिलाफ मामले में समझौता आदेश जारी किया।

संघीय जांच एजेंसी ने कहा कि परिणामस्वरूप, कंपनी द्वारा 4.28 लाख रुपये का एकमुश्त भुगतान करने के बाद, कंपनी के खिलाफ फेमा कानून के कथित उल्लंघन के लिए कार्यवाही समाप्त कर दी गई।

बयान में कहा गया है, ‘‘ईडी द्वारा अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किए जाने के बाद आरबीआई ने उक्त आदेश पारित किया।’’

ईडी के बयान पर कंपनी की ओर से तत्काल कोई टिप्पणी नहीं आई।

मई में ‘ईडी दिवस’ कार्यक्रम में प्रवर्तन निदेशालय के निदेशक राहुल नवीन ने कहा था कि केंद्र सरकार की ‘कारोबार सुगमता’ नीति को बढ़ावा देने और मुकदमेबाजी को कम करने के लिए, एजेंसी इस दीवानी कानून के उल्लंघनकर्ताओं को विभिन्न मामलों में ‘समझौते’ के लिए आवेदन दाखिल करने को प्रोत्साहित करेगी।

अधिकारियों ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि फेमा के ‘मामूली या तकनीकी’ उल्लंघनों के मामलों को समझौते के लिए अनुमति दी जाएगी ताकि ‘तुच्छ’ मुकदमेबाजी समाप्त हो सके।

ईडी ने दिसंबर 2024 में ‘नियरबाय इंडिया’ द्वारा कथित तौर पर 100 करोड़ रुपये से अधिक के फेमा उल्लंघन को लेकर कंपनी के खिलाफ शिकायत दर्ज की थी।

जांच पूरी होने के बाद, ईडी ने इस साल फरवरी में कंपनी और उसके प्रवर्तकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया।

एजेंसी ने बताया कि इसके बाद कंपनी ने उक्त उल्लंघनों के निपटारे के लिए आरबीआई के समक्ष एक आवेदन दिया और आरबीआई के कहने पर, ईडी ने ‘अधिनियम की सच्ची भावना के अनुरूप’ अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किया।

इसके बाद आरबीआई ने कंपनी के पक्ष में समझौता आदेश जारी करते हुए 4.28 लाख रुपये का एकमुश्त भुगतान करने का आदेश दिया। ईडी ने बताया कि इसके परिणामस्वरूप कंपनी और उसके पदाधिकारियों के खिलाफ फेमा की न्यायिक कार्यवाही और आगे की कानूनी कार्यवाही समाप्त हो गई है।

भाषा

राजकुमार अविनाश

अविनाश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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